देश में COVID-19 बूस्टर की आवश्यकता के कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं, अभी डबल डोज है जरूरी: समीरन पांडा
नई दिल्ली, 21 नवंबर। कोरोना वायरस महामारी के खिलाफ देश ने बड़ा मील का पत्थर हासिल किया है। टीकाकरण अभियान की शुरुआत से अब तक पूरे भारत में 115 करोड़ से अधिक कोविड वैक्सीन की खुराकें लगाई जा चुकी हैं। इस बीच कई रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि कोरोना वैक्सीन की दोनों खुराकें लगवा चुके लोगों को 6 महीने बाद कोविड वैक्सीन की बूस्टर डोज लेनी होगी। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) में महामारी विज्ञान और संक्रामक रोग विभाग के प्रमुख डॉ. समीरन पांडा ने इन दावों का खंडन किया है।

डॉ. समीरन पांडा ने रविवार को अपने एक इंटरव्यू में बताया कि भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद ने अपने शोध में ऐसा कुछ नहीं पाया कि 6 महीने बाद किसी व्यक्ति को कोविड की बूस्टर डोज की जरूरत पड़ेगी। सभी लोगों को कोविड की दूसरी डोज लग जाए यही इस वक्त महत्वपूर्ण है। समीरन पांडा ने आगे कहा, 'स्वास्थ्य मंत्रालय वैज्ञानिक साक्ष्यों द्वारा निर्देशित होता है और एनटीएजीआई द्वारा भी सलाह दी जाती है।'
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बूस्टर खुराक पर बोलते हुए डॉ समीरन पांडा कहते हैं, 'ये सलाहकार निकाय हैं और नीति विकसित करने के लिए मंत्रालय और संबंधित विभागों द्वारा विचार किया जाता है। इसलिए, नीति निर्माण और निर्णय वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित होते हैं। अभी देश के भीतर के वैज्ञानिक प्रमाण बूस्टर खुराक की आवश्यकता को रेखांकित नहीं करते हैं। सार्वजनिक स्वास्थ्य के मुद्दे अब प्राथमिकता पर हैं। अगर आप मुझसे पूछें, तो समय की मांग यह है कि टीके की 2 खुराक वाले व्यक्तियों में से 80 फीसदी या इससे अधिक कवरेज प्राप्त होना जरूरी है। 80 फीसदी से अधिक पात्र व्यक्तियों तक पहुंचना अब सार्वजनिक स्वास्थ्य प्राथमिकता है।'












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