'2022 में घाटी से एक भी कश्मीरी पंडित का पलायन नहीं', टारगेट किलिंग पर केंद्र सरकार का जवाब
नई दिल्ली, 27 जुलाई। कश्मीर घाटी में टारगेट किलिंग की घटनाओं पर केंद्र सरकार ने जवाब दिया है। राज्यसभा में गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने जम्मू कश्मीर में पिछले तीन वर्षों में कश्मीरी पंडितों के साथ हुई घटनाओं और इस दौरान उनके जीवन पर असर को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। गृह राज्यमंत्री ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में एक भी कश्मीरी पंडित ने घाटी से पलायन नहीं किया है।

घाटी में पिछले दिनों कथित रुप से टारगेट किलिंग की घटना को लेकर केंद्र सरकार ने सदन में जवाब दिया है। बुधवार को गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में पिछले तीन वर्षों के दौरान कश्मीरी पंडितों पर हमले, पलायन और उसके बाद उनके जीवन पर प्रभाव को लेकर रिकॉर्ड प्रस्तुत किए। उन्होंने सदन में कहा कि केंद्र के रिकॉर्ड के मुताबिक वर्ष 2022 के दौरान कोई भी कश्मीरी पंडित कश्मीर घाटी से नहीं गया है। अभी भी घाटी में रहने वाले कश्मीरी पंडितों की संख्या 6,514 है। उन्होंने आगे कहा कि वर्ष 2020, 2021 और 2022 के दौरान जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों द्वारा मारे गए कश्मीरी पंडितों की संख्या क्रमशः 1, 4 और 1 है।
यानी केंद्र सरकार के आंकड़ों के अनुसार 2021 लेकर 2022 तक कुल 6 कश्मीरी पंडितों की हत्याएं हुईं है। वहीं अब तक घाटी से एक भी कश्मीरी पंडित का पलायन साल 2022 के दौरान नहीं हुआ। ये जवाब केंद्र सरकार की ओर से राज्यसभा में दिया गया।
बता दें कि पिछले दिनों घाटी में आंतंकी हमलों और टारगेट किलिंग को लेकर कश्मीर में विरोध प्रदर्शन हुए थे। पिछले तीन महीनों में घाटी में कश्मीरी हिन्दू आतंकियों के निशाने पर रहे हैं। कई हिंदुओं को गोली मारकर हत्या कर दी गई है। हालत को देखते हुए एक बार फिर से वर्ष 1990 वाले हालात लौटने की बात कही जाने लगी थी। घाटी में टारगेट किलिंग की घटनाओं को लेकर कश्मीर से लेकर दिल्ली तक विरोध प्रदर्शन किए गए। कश्मीरी पंडितों ने कहा कि अगर सरकार हमें सुरक्षा नहीं दे सकती तो वह कश्मीर छोड़कर चले जाएंगे। घाटी में हत्याओं को देखते हुए जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल ने में बड़ा निर्णय लिया और कश्मीरियों को उनके जिला मुख्यालयों में ट्रांसफर कर दिया था।












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