अमित शाह ने नीतीश कुमार को बताया 'झूठा', कहा- आरसीपी सिंह को जेडीयू की मर्जी से बनाया था मंत्री
नई दिल्ली, अगस्त 17। बिहार में एनडीए से अलग होकर महागठबंधन के साथ मिलकर सरकार बनाने के बाद जेडीयू और भाजपा के बीच आरसीपी सिंह को लेकर घमासान जारी है। जेडीयू के पूर्व नेता आरसीपी सिहं पर यह आरोप लगाए गए थे कि उन्हें नीतीश कुमार की बिना सहमति के ही भाजपा ने केंद्रीय मंत्रीमंडल में शामिल कर लिया था। जेडीयू के इन आरोपों का जवाब केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने दिया है।

शाह ने नीतीश के आरोपों का दिया जवाब
अमित शाह ने कहा है कि नीतीश कुमार ने गलत बोला है कि आरसीपी सिंह को उनकी मर्जी के बिना मंत्रीमंडल में शामिल किया गया था। आपको बता दें कि अमित शाह ने मंगलवार को बिहार में हुए सियासी घटनाक्रम को लेकर भाजपा की कोर कमेटी की बैठक बुलाई थी। यह मीटिंग जेडीयू के अचानक एनडीए से अलग होने के बाद की रणनीति पर चर्चा करने के लिए बुलाई गई थी।
दो मंत्रियों की सीट चाहते थे नीतीश कुमार- शाह
इस मीटिंग में अमित शाह ने कहा कि आरसीपी सिंह को मंत्री बनाने को लेकर उनकी नीतीश कुमार से दो बार फोन पर बात हुई थी, नीतीश कुमार दो मंत्री सीटें चाहते थे, जिसमें से एक लोकसभा और राज्यसभा से, लेकिन अमित शाह ने इस पर असहमति जाहिर की थी। इसके बाद नीतीश कुमार ने आरसीपी सिंह के नाम पर मुहर लगाई थी। साथ ही अमित शाह ने यह भी कहा था कि भविष्य में हम दो मंत्रियों की मांग पर विचार करेंगे।
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सुशील मोदी ने भी दागे नीतीश पर सवाल
अमित शाह के साथ-साथ इस मीटिंग में सुशील मोदी ने भी नीतीश के आरोपों को गलत बताया। उन्होंने कहा कि अमित शाह जी की नीतीश से दो बार आरसीपी सिंह को लेकर बात हुई थी और अगर मान लीजिए कि आरसीपी सिंह को नीतीश की बिना सहमति के मंत्री बनाया गया था तो फिर उन्होंने आरसीपी सिंह को पार्टी से बाहर क्यों नहीं किया? क्यों एक साल तक वो आरसीपी सिंह को बर्दाश्त करते रहे?
आरसीपी सिंह की वजह से बिहार में टूटा जेडीयू-एनडीए गठबंधन!
आपको बता दें कि अमित शाह और सुशील मोदी के अलावा खुद आरसीपी सिंह ने भी नीतीश कुमार के लगाए आरोपों को गलत बताया है। उन्होंने कहा है कि भाजपा उन्हें मंत्री बनाना चाहती थी और उनकी नीतीश कुमार से बात भी हो गई थी। फिर जब मैंने नीतीश कुमार से इस बारे में बातचीत की तो उन्होंने कहा कि दिल्ली जाकर शपथ ले लीजिए। बता दें कि आरसीपी सिंह को इस बार राज्यसभा चुनाव के लिए जदयू की ओर से टिकट नहीं दिया गया था, जिसके बाद उनका मंत्री पद चला गया। इसके बाद से ही आरसीपी सिंह और जेडीयू के रिश्ते बिगड़ने लगे। बाद में आरसीपी सिंह ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया और फिर बिहार में नीतीश ने एनडीए का साथ छोड़ दिया।












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