NITI Aayog Report Cow: मिट्टी को अधिक उपजाऊ बनाने में गोमूत्र-गोबर मददगार, टास्क फोर्स ने गिनाए गाय से लाभ
मिट्टी को अधिक उपजाऊ बनाने में गोमूत्र-गोबर बेहद फायदेमंद है। नीति आयोग की टास्क फोर्स ने गाय, गोबर, गोमूत्र के लाभ गिनाए हैं।

NITI Aayog Report Cow यूरिन यानी गोमूत्र के फायदों के कारण सुर्खियों में है। नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ को बढ़ावा देने में गोमूत्र और गोबर का इस्तेमाल बेहद फायदेमंद है। नीति आयोग ने "गौशालाओं की आर्थिक व्यवहार्यता में सुधार पर विशेष ध्यान देने के साथ जैविक और जैव उर्वरकों के उत्पादन और संवर्धन" शीर्षक से टास्क फोर्स की रिपोर्ट जारी की है।
गोबर और गोमूत्र के प्रभावी उपयोग
नीति आयोग की वरिष्ठ सलाहकार (कृषि) डॉ. नीलम पटेल ने कहा कि मवेशियों के शौच का प्रभावी उपयोग एक चक्रीय अर्थव्यवस्था का एक आदर्श उदाहरण है। इससे कचरे से संपत्ति की अवधारणा मजबूत होती है। शुक्रवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार, डॉ पटेल गौशालाओं को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाने, आवारा और परित्यक्त मवेशियों की समस्या का समाधान करने और कृषि समेत ऊर्जा क्षेत्र में गाय के गोबर और गोमूत्र के प्रभावी उपयोग के उपाय सुझाने के लिए नेशनल इंस्टीट्यूशन फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (NITI) आयोग की टास्क फोर्स के सदस्य सचिव हैं।
भारत में पारंपरिक कृषि प्रणाली
नीति आयोग के टास्क फोर्स की रिपोर्ट रिलीज होने के बाद सचिव डॉ. नीलम पटेल ने कहा, "मवेशी भारत में पारंपरिक कृषि प्रणाली का एक अभिन्न अंग थे और गौशालाएं प्राकृतिक खेती और जैविक खेती को बढ़ावा देने में बहुत मदद कर सकती हैं। मवेशियों के कचरे से विकसित कृषि-इनपुट- गाय का गोबर और गोमूत्र एग्रोकेमिकल्स को कम या रिप्लेस कर सकते हैं। पौध पोषक तत्व और पौध संरक्षण, आर्थिक, स्वास्थ्य, पर्यावरण के मद्देनजर भी ये बेहद फायदेमंद हैं।

50 वर्षों में फर्टिलाइजर का बेजा इस्तेमाल
नीति आयोग के सदस्य (कृषि) रमेश चंद ने टास्क फोर्स के सदस्यों, वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों और गौशालाओं के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में रिपोर्ट जारी कर कहा, दक्षिण एशियाई कृषि की अनूठी ताकत फसलों के साथ पशुधन का एकीकरण है। उन्होंने कहा, "पिछले 50 वर्षों में, अकार्बनिक उर्वरक और पशुधन खाद के उपयोग में गंभीर असंतुलन सामने आया है। यह मिट्टी के स्वास्थ्य, भोजन की गुणवत्ता, दक्षता, पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है।"
जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा
उन्होंने स्वीकार किया कि सरकार स्थायी कृषि पद्धतियों जैसे जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा कि जैव और जैविक आदानों की आपूर्ति के लिए संसाधन केंद्र के रूप में कार्य करके गौशालाएं प्राकृतिक और टिकाऊ खेती को बढ़ाने का एक अभिन्न अंग बन सकती हैं।
गौशालाओं की आर्थिक व्यवहार्यता में सुधार
हिमाचल प्रदेश के सोलन में स्थापित संस्था- डॉ. वाईएस परमार बागवानी और वानिकी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. राजेश्वर सिंह चंदेल ने प्रदेश के अनुभव शेयर कर बताए कि टास्क फोर्स की रिपोर्ट जैविक और जैव उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा देकर कचरे से धन बनाने की पहल को मजबूत करेगी। उन्होंने गौशालाओं की आर्थिक व्यवहार्यता में सुधार के लिए संस्थागत सहयोग के महत्व पर भी जोर दिया। टास्क फोर्स के सदस्यों और गौशालाओं के प्रतिनिधियों ने स्थायी खेती और कचरे से धन की पहल को बढ़ावा देने में गौशालाओं की भूमिका के बारे में अपने अनुभव और विचार साझा किए।

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लागत और निवेश का तथ्यात्मक अनुमान
शुक्रवार को जारी की गई रिपोर्ट में गौशालाओं के परिचालन लागत, निश्चित लागत और अन्य मुद्दों और गौशालाओं में बायो-सीएनजी संयंत्र और प्रोम संयंत्र स्थापित करने में शामिल लागत और निवेश का तथ्यात्मक अनुमान प्रदान किया गया है। यह गौशालाओं की वित्तीय और आर्थिक व्यवहार्यता में सुधार के लिए सुझाव और सिफारिशें प्रदान करता है। प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए आवारा, परित्यक्त और गैर-आर्थिक पशु धन की क्षमता को चैनलाइज़ करता है।












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