'वह केवल आंकड़ों से खेल रही हैं', महुआ, प्रियंका,अखिलेश ने निर्मला सीतारमण के जवाब पर उठाये सवाल
Mahua Moitra: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा केंद्रीय बजट 2025-26 पर हुई आम चर्चा का लोकसभा में मंगलवार को जवाब दिया। इधर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद महुआ मोइत्रा ने एक बार फिर अपनी तीखी टिप्पणी की। मोइत्रा ने केंद्रीय वित्त मंत्री के जवाब को "विषाक्त और पक्षपाती" करार देते हुए कहा कि सीतारमण हर बार वही बातें दोहराती हैं और केवल आंकड़ों से खेल रही हैं।
महुआ मोइत्रा ने ने यह भी आरोप लगाया कि बजट में गरीबों, युवाओं, और किसानों पर ध्यान देने का दावा केवल दिखावे तक सीमित है, और इससे वास्तविक समस्याओं का समाधान नहीं हो सकता।

इससे पहले केंद्रीय वित्त मंत्री ने लोकसभा में वैश्विक आर्थिक चुनौतियों, जैसे कि पश्चिम एशिया में संघर्ष और रूस-यूक्रेन युद्ध, का जिक्र करते हुए कहा कि इस बजट का उद्देश्य "ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया" को "विकसित भारत" में बदलना है। बजट में समावेशी विकास और कृषि, एमएसएमई और निर्यात को बढ़ावा देने की बात की गई है, ताकि आर्थिक विकास को गति मिल सके। इसके साथ ही, वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार पूंजीगत व्यय के लिए 99 प्रतिशत उधार का उपयोग कर रही है, जो सकल घरेलू उत्पाद का 4.3 प्रतिशत है।
अखिलेश यादव, प्रियंका गांधी और केसी वेणुगोपाल ने क्या कहा?
समाजवादी पार्टी (एसपी) के सांसद अखिलेश यादव ने हाल ही में केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, "सबसे बड़ा महा कुम्भ 144 साल बाद हो रहा है और भारत सरकार ने महाकुम्भ के लिए कोई फंड नहीं दिया।" उनका यह बयान यूपी में होने वाली कुम्भ मेला तैयारियों को लेकर विवादास्पद हो गया।
वहीं, कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखा हमला करते हुए कहा, "मुझे नहीं पता वह किस ग्रह पर रहती हैं। वह कह रही हैं कि महंगाई नहीं है, बेरोजगारी नहीं बढ़ी है, कीमतों में कोई वृद्धि नहीं हो रही है..." प्रियंका का यह बयान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के द्वारा महंगाई और बेरोजगारी के बढ़ने से इनकार किए जाने के संदर्भ में था।
कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बयानों पर प्रतिक्रिया दी। वेणुगोपाल ने कहा, "प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि जब मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे, तब रुपये की कीमत गिर गई थी। उस समय गुजरात के मुख्यमंत्री ने इसकी आलोचना की थी। अगर आज निर्मला सीतारमण द्वारा डॉलर की स्थिति को लेकर दिया गया स्पष्टीकरण सही है, तो इसे उस समय भी लागू किया जाना चाहिए। अप्रत्यक्ष रूप से, आप यह कह रहे हैं कि उस समय मोदी गलत थे।"
इन बयानों के जरिए अखिलेश यादव, प्रियंका गांधी और केसी वेणुगोपाल ने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं और उनके बयानों ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचाई है। यह देखा जाएगा कि इस राजनीतिक बयानबाजी का आगामी चुनावी राजनीति पर क्या असर पड़ता है।
जेपी नड्डा ने दिया जवाब, महुआ मोइत्रा ने घेरा
वहीं, राज्यसभा में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाओं की कमी के सवाल पर जवाब दिया। नड्डा ने कहा कि सरकार मेडिकल सीटों में वृद्धि कर रही है और अगले पांच साल में 75 हजार नए डॉक्टरों की नियुक्ति की योजना है। उन्होंने यह भी दावा किया कि भारत की मातृ मृत्यु दर में वैश्विक स्तर पर दोगुनी गिरावट आई है। सांसद महुआ मोइत्रा ने इस दौरान यूजीसी नियमों को संविधान-विरोधी करार दिया। उनका कहना था कि इन नियमों के तहत राज्य सरकारों का कोई प्रतिनिधि नहीं है, जो कि एक केंद्रीयकरण की कोशिश है और संघीय व्यवस्था के खिलाफ है।
महुआ मोइत्रा ने रेत खनन के मुद्दे पर भी सवाल उठाए और केंद्र सरकार से मांग की कि वह केरल, गुजरात और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में रेत खनन पर अपने फैसले को वापस ले। उनका कहना था कि इससे तटीय पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान होगा और मछुआरों की आजीविका प्रभावित होगी।
इन मुद्दों पर महुआ मोइत्रा की तीखी टिप्पणियां राजनीति के गर्म विषय बने हुए हैं, और यह देखा जाएगा कि इस पर सरकार और विपक्ष का क्या रुख होता है।
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