Nirbhaya Case: अब तीसरे दोषी अक्षय ठाकुर ने भेजी राष्ट्रपति को दया याचिका
नई दिल्ली। निर्भया गैंगरेप के तीसरे दोषी अक्षय ठाकुर ने राष्ट्रपति के पास दया याचिका भेजी है। अक्षय से पहले गैंगरेप के एक और दोषी विनय शर्मा ने भी राष्ट्रपति के पास दया याचिका भेजी थी जिसे खारिज कर दिया गया है। शनिवार एक फरवरी को तिहाड़ जेल में सुबह छह बजे 16 दिसंबर निर्भया गैंगरेप और हत्या के दोषी पवन, अक्षय, मुकेश और विनय को फांसी दी जानी थी। दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट ने शुक्रवार को अपने आदेश में कहा है कि अगले आदेश तक दोषियों को फांसी नहीं जा सकती है।

साल 2013 में मिली थी मौत की सजा
दिल्ली गैंगरेप के चारों दोषी मुकेश सिंह, पवन कुमार गुप्ता, अक्षय ठाकुर और विनय शर्मा को फास्ट ट्रैक कोर्ट ने साल 2013 में मौत की सजा सुनाई थी। अक्षय से पहले मुकेश सिंह औ विनय की तरफ से अलग-अलग दया याचिकाएं राष्ट्रपति को भेजी गई थीं। लेकिन चार दिनों के अंदर ही इन्हें खारिज कर दिया गया था। अभी तक इन दया याचिकाओं की वजह से दोषियों की फांसी अटकी हुई है। इनकी वजह से ही दिल्ली के कोर्ट को दो बाद डेथ वॉरंट को फ्रीज करना पड़ा गया था। पहले दोषियों को 22 जनवरी को फांसी होनी थी और फिर फांसी की तारीख एक फरवरी तय की गई थी।

चौथे दोषी के पास क्यूरेटिव पीटिशन का विकल्प
शुक्रवार को दिल्ली जज धर्मेंद्र राणा ने चारों दोषियों की फांसी रोक दी थी क्योंकि विनय की दया याचिका राष्ट्रपति के पास थी। साल 2014 में सुप्रीम कोर्ट की तरफ से दिए गए एक फैसले के तहत जज को दया याचिका खारिज होने के बाद 14 दिन का समय दोषियों को देना होगा। 16 दिसंबर 2012 को पैरामेडिकल की पढ़ाई कर रही 23 साल की स्टूडेंट जब फिल्म देखकर अपने घर लौट रही थी तो उसके साथ गैंगरेप किया गया था। चलती बस में छह लोगों ने हैवानियत की सारी हदें पार कर दी थी। पीड़िता ने काफी उपचार के बाद भी दम तोड़ दिया था। हालांकि, चौथे दोषी पवन के पास अभी क्यूरेटिव पीटिशन फाइल करने का मौका बचा है।

दिल्ली जेल नियम का सेक्शन 854
दिल्ली जेल नियम का सेक्शन 854 एक ऐसा कानून है जिसके तहत एक केस में एक से ज्यादा दोषियों को तब तक फांसी नहीं दी जा सकती है जब तक कि वे अपने सभी कानूनी विकल्पों का प्रयोग न कर लें। इन कानूनी विकल्पों में रिव्यू पीटिशन से लेकर क्यूरेटिव पीटिशन और साथ ही राष्ट्रपति पास दया याचिका तक भेजने का नियम शामिल हैं। यहां तक कि अगर राष्ट्रपति ने दया याचिका को खारिज कर दिया है तो भी दोषी के पास सुप्रीम कोर्ट में इसके खिलाफ अपील करने का अधिकार है। गृह मंत्रालय की तरफ से हाल ही में सुप्रीम कोर्ट से अपील की गई थी कि वह मौत की सजा में एक समय सीमा निर्धारित करे।

समय सीमा निर्धारित करने की अपील
गृह मंत्रालय ने अपील में यहां तक कहा है कि डेथ वॉरंट जारी होने के बाद फांसी के लिए सात दिनों की समयसीमा निर्धारित की जानी चाहिए। हालांकि सुप्रीम कोर्ट की तरफ से गृह मंत्रालय की याचिका पर जो भी फैसला लिया जाएगा उसका निर्भया के केस पर कोई भी असर नहीं पड़ेगा। 29 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट की तरफ से दोषी मुकेश सिंह की क्यूरेटिव पीटिशन को खारिज कर दिया गया था। मुकेन ने अपने दया याचिका के ठुकराए जाने के राष्ट्रपति के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। अब उसके पास कोई भी कानूनी विकल्प नहीं बचा है।
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