निर्भया केस: तिहाड़ जेल में दोषियों को एक साथ फांसी देने में क्या है चुनौती? जानिए

नई दिल्ली- तिहाड़ जेल प्रशासन के लिए निर्भया गैंगरेप और हत्या के चारों दोषियों को इकट्ठे फांसी देना एक बहुत बड़ी चुनौती साबित हो रही है। तिहाड़ जेल के इतिहास में यह पहली बार है कि वहां उपलब्ध फांसी के तख्ते पर एक साथ चार-चार दोषियों को सजा दी जाने की नौबत आई है। खबरों के मुताबिक जेल प्रशासन ने यह कोशिश की है कि फांसी के तख्ते में तकनीकी सुधार करके उस पर एक साथ चार फंदे लटकाने की व्यवस्था करे। लेकिन, यह काम इतना आसान नहीं है। 'फांसी कोठा' दशकों पुराना पड़ चुका है। फांसी के तख्ते कमजोर पड़ चुके हैं। एक साथ दो को ही फांसी दिए जाने की व्यवस्था पहले से मौजूद है। इन सभी परेशानियों को दूर करने के लिए जेल प्रशासन इन दिनों जी-जान से जुटे हुए हैं। क्योंकि, दया याचिका खारिज होते ही उन्हें इस कार्य को तामील करना होगा

चारों दोषियों को एक साथ फांसी देना होगा

चारों दोषियों को एक साथ फांसी देना होगा

तिहाड़ जेल प्रशासन सूत्रों के मुताबिक यह आवश्यक है कि निर्भया के चारों दोषियों को एक साथ ही फांसी दी जाए। अगर किसी वजह से एक भी दोषी को फांसी देने में कोई अड़चन आ गई तो पूरी प्रक्रिया रोकने पड़ सकती है। जानकारी के मुताबिक कम से कम दो बार इस बात की पड़ताल की गई है कि क्या मौजूदा फांसी का फ्रेम कम से कम उतने वक्त तक चारों दोषियों का भार उठाने में सक्षम है, जब तक कि उसे पूरी तरह से मृत न घोषित कर दिया जाए। इस प्रक्रिया को जेल अधिकारियों की एक टीम की देखरेख में पूरा किया जा रहा है। क्योंकि, इसके लिए जरूरी है कि वह इतना मजबूद हो कि चारों का वजन एक साथ संभाल सके।

फांसी के तख्ते की मरम्मत और उसमें सुधार की कोशिश

फांसी के तख्ते की मरम्मत और उसमें सुधार की कोशिश

तिहाड़ जेल के सूत्रों के मुताबिक 'फांसी कोठा' और फांसी का तख्ता 1950 के शुरुआती वर्षों में ही बना था। यहां कंक्रीट के दो पिलर से लोहे का फांसी का तख्ता जुड़ा हुआ है, जिसपर दो फंदे लटकाने का इंतजाम है। लेकिन, दशकों पुराने होने की वजह से वह लोहा भी कमजोर पड़ चुका है। अब जेल अधिकारी विशेषज्ञों की मदद से उसकी ताकत की छानबीन कर रहे हैं। जेल अधिकारियों ने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा कि लोहे के तख्ते की मजबूती और लंबाई बढ़ाने के लिए अलग से कंस्ट्रक्शन की कोशिश की जा सकती है, जिससे उन्हीं तख्तों के साथ अतिरिक्त फंदे लटकाने की भी व्यवस्था हो जाए। इससे पहले 1983 में पुणे की यरवदा जेल में जोशी अभयंकर केस में ही एक साथ चार लोगों की फांसी के फंदे पर लटकाया गया था।

बक्सर जेल से 8 नई रस्सियां मंगाई गई हैं

बक्सर जेल से 8 नई रस्सियां मंगाई गई हैं

तिहाड़ जेल के सूत्रों के मुताबिक बिहार के बक्सर जेल में तैयार 8 मनिला रस्सियां पहुंच चुकी हैं। बक्सर जेल के कैदी जो रस्सियां तैयार करते हैं उसमें मुलायम कॉटन का इस्तेमाल होता है और उसपर बटर या मोम लगा होता है, जो मुलायम तो होता है, लेकिन उतनी ही मजबूत भी होती है। जानकारी के मुताबिक इस तरह की रस्सी बनाने का मकसद यह होता है कि दोषियों की मौत कम दर्दनाक हो और उसका गला न कट जाए। फांसी के लिए बक्सर की रस्सियों का इस्तेमाल इससे पहले रेप और हत्या के दोषी धनंजय चक्रवर्ती को फांसी देने के लिए कोलकाता की अलीपुर जेल के अलावा अफजल गुरु और अजमल कसाब के केस में भी हो चुकी है।

दया याचिका खारिज होने के बाद भी लगेंगे 14 दिन

दया याचिका खारिज होने के बाद भी लगेंगे 14 दिन

जानकारी के मुताबिक जिस दिन राष्ट्रपति निर्भया के गुनहगारों की दया याचिका खारिज कर देंगे, उसके बाद भी फांसी की सजा देने में कम कम 14 दिन लग जाएंगे। इस दौरान दोषियों के परिवार वालों को सूचना दी जाएगी और उन्हें मुलाकात का मौका दिया जाएगा। इस मुलाकात में दोषी अपनी इच्छा भी परिवार वालों के सामने जाहिर कर सकता है और अपनी निजी चीजें उन्हें सौंप सकता है। जिस दिन फांसी की तारीख मुकर्रर होगी उससे एक दिन पहले दोषियों को उनके पसंद का खाना दिया जाएगा। इस दौरान उन्हें जेल में आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल होने की भी इजाजत दी जाएगी।

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