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Nirbhaya: फांसी दिए जाने के बाद आखिर क्या होता है उस रस्सी के फंदे का?

नई दिल्ली। निर्भया के दोषियों को आज आखिरकार सुबह फांसी पर लटका दिया गया है। पिछले सात साल से इंसाफ की राह देख रहे निर्भया के परिजनों का आज आखिरकार इंतजार खत्म हो गया। तिहाड़ जेल में आज सभी चार दोषियों मुकेश, अक्षय, विनय और पवन को फांसी पर लटका दिया गया। गौर करने वाली बात यह है कि आज फांसी से पहले कई बार इन दोषियों के खिलाफ फांसी का डेथ वारंट कई बार जारी हो चुका था, लेकिन हर बार ये दोषी कानूनी दांवपेंच के चलते बच जा रहे थे, लेकिन आज इन दोषियों का कोई भी दांवपेंच काम नहीं आया।

रस्सी को लेकर अंधविश्वास

रस्सी को लेकर अंधविश्वास

निर्भया के दोषियों को फांसी देने की तैयारी दो दिन पहले ही दिल्ली के तिहाड़ जेल में शुरू हो गई थी। लेकिन दोषियों को फांसी दिए जाने के बाद एक बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि जिस फांसी के फंदे पर दोषियों को लटकाया गया था, उस रस्सी का अब क्या होगा। फांसी दिए जाने के बाद फांसी दी जाने वाली रस्सी को लेकर कई तरह के अंधविश्वास प्रचलित हैं। ब्रिटेन में फांसी दिए जाने के बाद रस्सी को जल्लाद को दिए जाने की परंपरा थी। लेकिन इसके बाद यह अंधविश्वास लोगों में फैल गया कि अगर इस रस्सी के टुकड़े को घर पर रखें या फिर इसके एक टुकड़े का लॉकेट पहनें तो इससे किस्मत पलट सकती है।

जेल में सबको बांटा जाता था रस्सी के टुकड़े को

जेल में सबको बांटा जाता था रस्सी के टुकड़े को

इतिहास पर नजर डालें तो इस तरह की जानकारी सामने आती है कि ब्रिटेन में जल्लाद रस्सी को बेच देते थे और लोग बड़ी खुशी से इसे खरीद लेते थे। लेकिन 1965 में ब्रिटेन में फांसी दिए जाने पर रोक लगा दी गई। भारत की बात करें तो यहां भी आमतौर पर फांसी दिए जाने के बाद रस्सी को जल्लाद को दे दिया जाता है और वह इसे लेकर इसे कई टुकड़ों में काटता था और फिर इसे बड़े अधिकारियो से लेकर गार्ड तक को इसका एक टुकड़ा दे देता था।

2004 में जल्लाद ने रस्सी से कमाया पैसा

2004 में जल्लाद ने रस्सी से कमाया पैसा

वर्ष 2004 की बात करें तो रेप और हत्या के दोषी धनंजय चटर्जी को फांसी पर लटकाया गया था। उसे नाटा मल्लिक जल्लाद ने फांसी दी थी। लेकिन उस वक्त नाटा मल्लिक ने इस रस्सी के टुकड़ों से बड़ी कमाई की थी। उस वक्त यह अंधविश्वास फैल गया था कि अगर फांसी की रस्सी का लॉकेट पहनें तो इससे किस्मत बदल जाएगी, बेरोजगार को नौकरी मिल जाएगी, कर्ज के बोझ तले दबे हैं तो उससे मुक्त हो जाएंगे, अच्छे दिन शुरू हो जाएंगे वगैरह। कोलकाता में इस अंधविश्वास के फैलने के बाद लोगों की भीड़ नाटा मल्लिक के घर पर जुटने लगी थी।

मोटी कमाई की थी जल्लाद ने

मोटी कमाई की थी जल्लाद ने

कोलकाता में फैले इस अंधविश्वास का यहां की डेथ पेनाल्टी एसोसिएशंन ने इसका विरोध किया था और कहा था कि जल्लाद को इस तरह से रस्सी बेचकर पैसा कमाने का कोई अधिकार नहीं है। यहां तक कि कोलकाता के मंदिरों में इसका भारी विरोध हुआ था। लेकिन इन सब के बाद भी नाटा मल्लिक फांसी देने के बाद इसे अपने साथ ले आता था और इससे कमाई करता था। वह रस्सी के टुकड़े से बने लॉकेट को 2000 रुपए तक में बेचता था। उसने अपने घर के बाहर तौलिए को फांसी की गांठ के तौर पर टांग रखा था। हालांकि कई बार फांसी की रस्सी को तुरंत जला भी दिया जाता था। बड़े विवादित कैदी या आतंकवादी को फांसी दिए जाने पर रस्सी को तुरंत नष्ट कर दिया जाता है।

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