निर्भया केस: सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की दोषी पवन की क्यूरेटिव याचिका, नाबालिग होने का किया गया था दावा
नई दिल्ली। निर्भया के गुनहगारों में से एक दोषी पवन की क्यूरेटिव पिटिशन सुप्रीम कोर्ट में खारिज। इस पिटिशन में यह दावा किया गया था कि अपराध के समय वो नागालिग था। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद वकील एपी सिंह ने कहा, सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट में सब काम बंद है, लेकिन यह नहीं हो रहा है कि फांसी की सजा पर रोक लगाई जाए। यह बहुत दुखद बात है। यह सब प्रेशर में हो रहा है।
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पवन की याचिका में दावा किया गया था कि अपराध के समय वह नाबालिग था इसलिए उसकी मौत की सजा की जगह उम्र कैद की सजा दी जाए। पवन की इस दलील को कोर्ट ने ठुकरा दिया है। वहीं दोषी मुकेश भी अपनी याचिका को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट पहुंचेगाबता दें कि मुकेश ने पटियाला हाउस कोर्ट के फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए याचिका दायर की है। यहां आपको बता दें कि मुकेश का दावा था कि वो अपराध वाले दिन दिल्ली में मौजूद ही नहीं था। इस याचिका को पटियाला हाउस कोर्ट ने खारिज कर दिया था।
मुकेश के वकील एमएल शर्मा को पटियाला हाउस कोर्ट ने संवेदनशील बनने की सलाह दी थी। एडिश्नल सेशन जज धर्मेंद्र राणा ने दोषी की याचिका खारिज करते हुए कहा था कि कोर्ट का समय बहुत कीमती होता है। राणा ने बार काउंसिल के पास मामले को भेज दिया था और ये निर्देश भी दिया था कि वो अधिवक्ता एमएल शर्मा को संवेदनशील बनाएं।
बच्चे को ना दो फांसी
एपी सिंह ने कहा, 'प्रकृति कह रही है कि अगर रस्सी खरीदेंगे फांसी बढ़ाने के लिए तो मास्क बढ़ाने पड़ेंगे और मास्क बढ़ाने पड़ेंगे। एक दिन ऐसा होगा कि मास्क से भी इलाज नहीं होगा। इसलिए मैं कह रहा हूं कि प्रकृति को मानो। ऐसा मत करो। साढ़े 16 साल के बच्चे को फांसी मत दो। अन्याय हो रहा है। दबाव में हो रहा है। मीडिया का प्रेशर है। पॉलिटिकल प्रेशर है। कोई आतंकी तो हैं नहीं। आदतन अपराधी तो हैं नहीं। यह सबसे बड़ी बात है। इसको ध्यान में रखा जाना चाहिए।'












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