निर्भया केस: तो क्या निर्भया का नाबालिग हत्यारा कांग्रेस की इस गलती से जेल से रिहा हुआ था !
Nirbhaya Case: So Did Nirbhaya's Minor Convict Succeed in Getting Released From Jail Due to Congress? निर्भया केस में छठा नाबालिग दोषी सुधार गृह में तीन साल की सजा काटकर रिहा हो गया था। कांग्रेस पार्टी पर भाजपा ने तभी आरोप लगाया था कि कांग्रेस की गलती से नाबालिग दोषी बाल सुधार गृह से रिहा होने में
बेंगलुरु। दिसंबर 2012 की वह भयावह घटना कौन भूल सकता है जब 23 वर्षीय युवती के साथ दिल्ली में बेरहमी से सामूहिक दुष्कर्म किया गया। निर्भया केस के नाम से चर्चित इस घटना के निर्भया केस में चारों दोषियों को 1 फरवरी की सुबह 6 बजे फांसी दी जाएगी। हालांकि अभी तीन दोषी के पास दया याचिका का विकल्प बचा हुआ है, ऐसे में कयास लगाया जा रहा है कि शायद एक बार फिर से फांसी की तारीख टल जाए।

गौरतलब है कि निर्भया के चार दोषियों को फांसी पर चढ़ाने के लिए दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने पहले 22 जनवरी के लिए डेथ वारंट जारी किया था तिहाड़ जेल में फांसी को लेकर तैयारियां भी पूरी हो चुकी थी लेकिन दोषी मुकेश की दया याचिका राष्ट्रपति द्वारा नामंजूर किए जाने के बाद कोर्ट को नियमों के कारण नया डेथ वारंट जारी करना पड़ा था। लोगों के जहन में निर्भया कांड के नाम से चर्चित इस दर्दनाक घटना की यादें आज भी ताजा है।

निर्भया के साथ छह लोगों ने 16 दिसंबर 2012, रविवार की रात बसंत विहार में चलती बस में हैवानियत की थी। उनमें निर्भया के साथ जिस 17 साल 6 महीने के किशोर ने सबसे ज्यादा बर्बरता की थी, वो नाबालिग होने के नाते तीन साल पहले ही सबसे कम सजा पाकर छूट गया था। निर्भया के चारो हत्यारें जहां तिहाड़ जेल में अपनी फांसी के दिन नजदीक आने पर भयभीत हैं वहीं सुधार गृह से रिहा होने के बाद निर्भया का छठां हत्यारा आजाद घूम रहा हैं। लोगों के मन में अब एक बार फिर से ये बात उठ रही हैं कि उस छठे हत्यारें को भी फांसी के फंदे पर लटकाया जाना चाहिए।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार निर्भया का छठा नाबालिग हत्यारा कांग्रेस और आम आदमी पार्टी की गलती से जेल से आजादी पाने में सफल हो गया था। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के इस केस को लेकर गैरजिम्मेदाराना रवैया दिखाया जिसके दरिंदे की रिहाई संभव हुई थी। जानिए पूरा सच ...

दिल्ली सरकार पर लगा था ये आरोप
गौरतलब है दिल्ली गैंगरेप केस का छठा नाबालिग दोषी सिर्फ बाल सुधार गृह में तीन साल की सजा काटने के बाद 20 दिसंबर 2016 को रिहा हो गया था। उसकी रिहाई की खबर पूरे देश में आग की तरह फैल गयी। उसकी रिहाई के समय पूरा देश दुखी होने के साथ आक्रोशित हो गया था। रिहाई की खबर पाकर पी निर्भया के परिजनों समेत हजारों की संख्या में लोग इंडिया गेट पर प्रदर्शन के लिए एकत्र हुए थे। बवाल बढ़ने पर पुलिस को इंडिया गेट पर धारा 144 लगानी पड़ी थी। वहीं निर्भया की मां और पिता की आंखों से आंसू बह रहे थे। वह बार-बार ये ही कर रहे थे कि उनके साथ न्याय नहीं हुआ। निर्भया के पिता ने कहा कि अगर ये मामला अपवाद जैसा था तो कानून में भी अपवाद कायम किया जाना चाहिए। दिल्ली की पब्लिक और निर्भया के परिजनों के गुस्से से उस छठे दोषी को बचाने के लिए पुलिस ने उसे एक एनजीओ के माध्यम से दूर भेज दिया था। तभी से वह गुमनामी की जिंदगी बिता रहा हैं। जब वो रिहा किया गया था तभी लोगों ने कहा कि सरकार को जब वो तीन साल तक सुधार गृह में बंद था तब सरकार ने वह रिहा नहीं हो इसके लिए तत्कालीन दिल्ली सरकार ने क्यों कदम नहीं उठाए।

कांग्रेस और आप पार्टी ने की ये गलती!
कांग्रेस और आप पार्टी पर तब यह आरोप लगा था कि दिल्ली सरकार अगर दोषी की रिहाई न होने के लिए अगर थोडी भी गंभीर होती तो वह उस दोषी की रिहाई की तारीख के काफी पहले ही कानूनी प्रकिया का सहारा लेती। आपको बता दें दिल्ली के जिस सुधार गृह में निर्भया के इस छठे हत्यारें को रखा गया था वो दिल्ली सरकार के अंडर में आता हैं। दिल्ली सरकार घटना के तीन साल तक चुप रही लेकिन महिला आयोग का सरकार पर दबाव और रिहाई से पहले दिल्ली की जनता के गुस्से को कैश करने के लिए उसने रिहाई के महज एक दिन पहले उसकी रिहाई रोकने के लिए एक्शन में आयी। दिल्ली सरकार ने आधी रात को दोषी की रिहाई न करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
दोषी की रिहाई के एक दिन पहले सुप्रीम कोर्ट में अनुरोध करने का नाटक करने वाली आमआदमी पार्टी की वहीं सरकार थी जिसके मुख्यमंत्री ने इसके कुछ दिनों पहले यह कहा था कि निर्भया कांड के किशोर दोषी की रिहाई के बाद वह उसे 10 हजार रुपय और एक सिलाई मशीन देंगे। ताकि वह दर्जी का कार्य कर अपना जीवन यापन कर सकें।

निर्भया केस को लेकर कांग्रेस पर लगा ये गंभीर आरोप
वही कांग्रेस पर तत्कालीन दिल्ली विधानसभा नेता विपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने आरोप लगाया था कि भाजपा उस किशोर की रिहाई बिलकुल भी नही चाहती थी लेकिन आम आदमी पार्टी की तहर कांग्रेस का भी इस केस को लेकर दोमुंहा व्यवहार रहा। किशोर न्याय संशोधन कानून को लोकसभा में पारित कर दिया था जिसमें निर्भया जैसी घटना के नाबालिग दोषियों को भी बालिगों की तरह सजा देने का प्रवाधान था। राज्यसभा में कांग्रेस के कारण यह कानून पास होने में देरी हुई जिसके कारण निर्भया का छठा दोषी रिहा होने में कामयाब हो गया। अगर पहले यह कानून पास हो गया होता तो उस नाबालिग किशोर को भी फांसी पर लटकते हुए पूरी दुनिया देख पाती। जब देश की अदालत की ओर से किशोर को रिहा कर दिया गया तो भाजपा के सामने कोई विकल्प नहीं बचा जिसके कारण उसे जेल में रख सके। बता दें कुछ ऐसा ही आरोप तभी भाजपा नेता उमा भारती ने भी लगया था उन्होंने कहा था कि नाबालिग रहे दोषी की रिहाई मामले में जनता का जो आक्रोश है उसकी वजह कांग्रेस है उसके गतिरोध के कारण किशोर न्याय संशोन अधिनियम राज्यसभा में समय से पारित नहीं हो सका था।

नाबालिग मुजरिम की रिहाई के खिलाफ अपील सुप्रीम कोर्ट ने कर दी खारिज
दिल्ली महिला आयोग ने 16 दिसंबर 2016 को रात में सामूहिक बलात्कार निर्भया केस के नाबालिग़ मुजरिम को सुधार गृह से छोड़े जाने के ख़िलाफ़ अपील दायर की थी। जिसे सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि कोर्ट संविधान के दायरे से बाहर नहीं जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट का कहना था कि जुविनाइल जस्टिस एक्ट में इस तरह का कोई प्रावधान नहीं है जिसके तहत नाबालिग़ दोषी की रिहाई रोकी जा सके। इसके फैसले के लिए दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने कहा था कि कमज़ोर जुविनाइल जस्टिस एक्ट के लिए राज्यसभा को ज़िम्मेदार ठहराया गया था। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख़्तार अब्बास नक़वी ने कहा कि सरकार क़ानून में संशोधन विधेयक को कई बार पेश कर चुकी है और अगर कांग्रेस के सदस्य चाहते हैं तो इस मामले पर समय रहते भी चर्चा हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस वीएन खरे ने कहना था कि क़ानून में सुधार का असर मौजूदा मामलों पर नहीं पड़ेगा क्योंकि किसी भी क़ानून के पास होने के समय के पहले के मुक़दमों पर उसे लागू नहीं किया जा सकता है।

जानें निर्भया का इस नाबालिग ने क्या किया था हाल
पहले बता दें 16 दिसंबर 2016 की वो काली रात इसी नाबालिग दोषी ने ही निर्भया और उसके मित्र को बस में चढ़ने का आग्रह किया था। निर्भया के बस में बैठने के बाद इसी नाबालिग ने बाकी पांच साथियों को गैंगरेप के लिए उकसाया और घटना का सूत्रधार बना था। इस लड़के ने ही निर्भया का दो बार बेरहमी से बलात्कार किया था। पुलिस ने अपनी जांच के बाद ये भी बताया था कि ये वहीं लड़का है क जिसकी वहशियाना हरकतों के कारण मेडिकल छात्रा की आंते तक बाहर आ गई थीं। निर्भया जब उन वहशियों से बचने के लिए जूझ रही थी उन्हें दांत काट रही थी, लात मार रही थी तभी इसी नाबालिग दुष्कर्मी ने लोहे की जंग लगी रॉड से उसे टॉर्चर किया था। निर्भया की आंते बाहर आने के बाद उसे बचाने के लिए डाक्टरों को उसके कई आपरेशन करने पड़े। लेकिन पस पड़ जाने के कारण पूरे शरीर में इंफेक्शन फैल गया जिसके बाद उसे सिंगापुर इलाज के लिए भेजा गया लेकिन उसकी हालत दिन पर दिन खराब होती गयी और अंत में जिंदगी की जंग हार गयी।

निर्भया का ये दरिंदा इस कारण से गुजार रहा गुमनामी की जिंदगी
बता दें निर्भया का यह हत्यारा वर्तमान समय में 24 साल का हो गया हैं। अपने इस कुकर्म के कारण वह यहां वहां अपनी पहचान छिपा कर जीवन के एक एक दिन काट रहा है। हर पल वो इसी खौफ में जीवन बिता रहा है कि उसके अपराध का राज कही खुल न जाएं। इसी कारण उसने अपना नया नाम रख लिया है । दिल्ली बदांयू का मूल निवासी यह आरोपी महज 11 वर्ष की उम्र में अपने घर से भागकर दिल्ली आ गया था और यहां राम सिंह जिनने निर्भया कांड के बाद तिहाड़ जिले में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। उसके लिए काम करता था। घर से भाग कर दिल्ली आते ही सबसे पहले उसकी मुलाकात राम सिंह से हुई थी। इसके बाद बस की सफाई के लिए रामसिंह ने उसे रख लिया था। रिपोर्ट के अनुसार चालक रामसिंह के पास किशोर नामक युवक के 8000 रुपये बकाया थे। जिसे मांगने वो बार-बार रामसिंह के पास जाता रहता था। वारदात की रात भी वह राम सिंह से अपने पैसे लेने के लिए गया था और इस कुमर्म को अपने साथियों के साथ अंजाम दिया।
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