निर्भया के दोषियों के वकील ने कहा- कानून में अस्पष्टता का खामियाजा भुगतने के लिए दोषी नहीं ठहराया जा सकता

Recommended Video

      Nirbhaya Case: जिनके कानूनी Option खत्म, केंद्र ने मांगा उन्हें फांसी देनी की इजाजत | वनइंडिया हिंदी

      नई दिल्‍ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने निर्भया सामूहिक बलात्कार-हत्या मामले में चारों दोषियों की फांसी पर लगी रोक को चुनौती देने वाली केन्द्र की याचिका पर सुनवाई हो रही है। न्यायमूर्ति सुरेश कैत के समक्ष मामले की सुनवाई चल रही है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता केन्द्र सरकार की ओर से दलीलें पेश कर रहे हैं। सॉलिसिटर जनरल मेहता ने उच्च न्यायालय से कहा कि पवन गुप्ता जानबूझकर सुधारात्मक या दया याचिका दायर नहीं कर रहा। यदि निचली अदालत का आदेश बरकरार रहता है तो पवन सुधारात्मक या दया याचिका दायर कर सकता है, अन्य को फांसी नहीं दी जाएगी। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जजों से कहा कि निर्भया के दोषी देश के धैर्य की परीक्षा ले रहे हैं। आपको बता दें कि दिल्ली की एक अदालत द्वारा शुक्रवार (31 जनवरी) को निर्भया सामूहिक बलात्कार एवं हत्याकांड के चार दोषियों की मृत्यु के वारंट की तामील अगले आदेश तक स्थगित किए जाने के बाद उन्हें शनिवार सुबह दी जाने वाली फांसी एक बार फिर टाल दी गई थी।

      निर्भया के दोषियों के वकील ने कहा- कानून में अस्पष्टता का खामियाजा भुगतने के लिए दोषी नहीं ठहराया जा सकता

      दोषियों के वकील मुकेश के लिए कोर्ट में बहस कर रहीं वरिष्ठ अधिवक्ता रेबेका जॉन ने कहा कि केंद्र जहां निर्भया मामले के दोषियों पर विलंब का आरोप लगा रहा है, वहीं खुद वह महज दो दिन पहले जागा है। मेरे कानूनी उपायों का उपयोग करने के लिए आप मेरी निंदा नहीं कर सकते। संविधान के अनुसार, मुझे अपने जीवन के अंतिम सांस तक हर विकल्प को इस्तेमाल करने का अधिकार है। एपी सिंह ने आगे कहा कि इस ही मामले में जल्दबाजी क्यों दिखाई जा रही है? उन्होंने कहा कि दोषी गरीब, ग्रामीण और दलित परिवारों से ताल्लुक रखते हैं। कानून में अस्पष्टता का खामियाजा भुगतने के लिए उसे दोषी नहीं ठहराया जा सकता। एपी सिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट और संविधान द्वारा फांसी की सजा देने के लिए कोई निर्धारित समय नहीं दिया गया है।

      क्‍या कहा सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने

      तुषार मेहता ने आगे कहा कि ट्रायल कोर्ट द्वारा फांसी की सजा पर लगाई गई रोक के ऑर्डर पर रोक लगनी चाहिए। सभी दोषी देश में न्यायिक प्रणाली को हराने का आनंद उठा रहा है। दिल्ली हाईकोर्ट से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, मृत्युदंड की सजा देने के लिए संस्था की विश्वसनीयता दांव पर है। तेलंगाना में लोगों ने बलात्कार के आरोपियों के एनकाउंटर के बाद जश्न मनाया। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि कानून के मुताबिक दोषियों को फांसी दिए जाने से पहले 14 दिनों का नोटिस दिया जाना जरूरी है।

      इस मामले में, 13 वें दिन एक दोषी कुछ दलील दायर करेगा और फिर सभी के खिलाफ जारी डेथ वारंट पर रोक लगाने की मांग करेगा। ये सभी मिलकर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि दया क्षेत्राधिकार हमेशा एक व्यक्तिगत अधिकार क्षेत्र है। राष्ट्रपति अपनी परिस्थितियों के कारण किसी दोषी के प्रति दया दिखा सकते हैं। यह अन्य दोषियों पर कैसे लागू होगा? तुषार मेहता ने हाईकोर्ट से कहा कि दिल्ली जेल नियम के मुताबिक, सभी दोषियों को एक साथ फांसी दी जानी चाहिए, अगर 'अपील या आवेदन' लंबित है। इस 'अपील या आवेदन' में दया याचिकाएं शामिल नहीं हैं। वे अलग हैं और इसमें शामिल नहीं किया जा सकता है।

      Notifications
      Settings
      Clear Notifications
      Notifications
      Use the toggle to switch on notifications
      • Block for 8 hours
      • Block for 12 hours
      • Block for 24 hours
      • Don't block
      Gender
      Select your Gender
      • Male
      • Female
      • Others
      Age
      Select your Age Range
      • Under 18
      • 18 to 25
      • 26 to 35
      • 36 to 45
      • 45 to 55
      • 55+