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तब्लीगी जमात के कट्टरपंथी सदस्यों ने की नूपुर शर्मा का समर्थन करने वाले अमरावती के फार्मासिस्ट की हत्या: NIA

अमरावती में मेडिकल स्टोर चलाने वाले उमेश कोल्हे की इसी साल 21 जून की रात भाजपा की पूर्व नेता नूपुर शर्मा का समर्थन करने की वजह से हत्या कर दी गई थी।

Amravati pharmacist Murder Case

Amravati pharmacist Umesh Kolhe Murder Case: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने दावा किया है कि अमरावती के फार्मासिस्ट उमेश कोल्हे की कथित तौर पर हत्या करने वाले लोग कट्टरपंथी थे और तब्लीगी जमात के सदस्य थे। जिन्हें सामाजिक कार्यकर्ता इरफान खान और मौलवी मुशफिक अहमद ने उमेश कोल्हे की हत्या के लिए उकसाया था। भाजपा की पूर्व नेता नूपुर शर्मा का समर्थन करने वाले अमरावती के फार्मासिस्ट उमेश कोल्हे की 21 जून 2022 की रात हत्या कर दी गई थी।

अमरावती में मेडिकल स्टोर चलाने वाले उमेश कोल्हे 21 जून की रात अपने स्कूटर से घर जा रहे थे, तभी बाइक सवार तीन युवकों ने उन्हें टक्कर मार दी और उनकी हत्या कर दी। उमेश कोल्हे की बहू और उसका बेटा दूसरी गाड़ी में उसके साथ चल रहे थे लेकिन वे उसे बचा नहीं सके।

NIA ने 11 आरोपियों के खिलाफ दायर की चार्जशीट

एनआईए के अनुसार, फार्मासिस्ट उमेश कोल्हे की हत्या के लिए तब्लीगी जमात के कट्टरपंथी सदस्यों की दूसरी कोशिश थी। उससे पहले भी तब्लीगी जमात के कट्टरपंथी सदस्यों ने उमेश कोल्हे की हत्या का प्रयास किया था। एनआईए ने 11 आरोपियों के खिलाफ शुक्रवार को दायर अपनी चार्जशीट में दावा किया है कि "तब्लीगी जमात के कट्टरपंथी इस्लामवादी ने उमेश कोल्हे की हत्या की।"

कैसे शुरू हुई उमेश कोल्हे की हत्या की साजिश?

एनआईए की चार्जशीट के मुताबिक उमेश कोल्हे को खत्म करने की साजिश एक आरोपी यूसुफ खान के साथ शुरू हुई थी। यूसुफ खान (पशु चिकित्सक) को सबसे पहले यह सूचना मिली की 14 जून को उमेश कोल्हे ने ब्लैक फ्रीडम नामक एक ग्रुप पर पोस्ट किया था।

एनआईए ने दावा किया कि यूसुफ ने जानबूझकर उमेश कोल्हे का नंबर बदलने के बाद पोस्ट का स्क्रीनशॉट लिया और इसे इरफान द्वारा बनाए गए "कलीम इब्राहिम" नामक एक अन्य ग्रुप में इसको शेयर किया और अन्य लोगों को भड़काया। एनआईए ने दावा किया कि उमेश कोल्हे की हत्या की साजिश इन संदेशों के शेयरिंग की से शुरू हुई थी।

एजेंसी ने दावा किया कि 19 जून को पोस्ट के बाद सभी मुख्य आरोपी मोहम्मद शोएब, आतिब राशिद, इरफान और शाहिम अहमद अमरावती के गौसिया हॉल में मिले। समूह ने बैठक में उमेश कोल्हे को मारने का फैसला किया और इरफान उन्हें पूरा समर्थन देने के लिए तैयार हो गए।

दो बार हुई थी हत्या की कोशिश

उस बैठक में इरफान ने आरोपियों को मोबाइल फोन नहीं ले जाने, काली टी-शर्ट और ट्रैक पैंट पहनने और अपनी पहचान छुपाने के लिए अनिवार्य रूप से अपने चेहरे को दुपट्टे से ढकने के बारे में बताया था। इस तरह आरोपी व्यक्तियों ने अपने सामान्य इरादे से उमेश कोल्हे को मारने के लिए ए-7 (इरफान) के नेतृत्व में एक आतंकवादी गिरोह बनाया। जिसके बाद उमेश कोल्हे 20 जून को जब वह अपनी दवा की दुकान के लिए निकल रहा था तो आरोपी उसकी हत्या करना चाहते थे। हालांकि उमेश कोल्हे के नहीं आने से उनकी प्लानिंग फेल हो गई।

इसके बाद इरफान ने एक और योजना तैयार की और उनकी साजिश को अंजाम देने के लिए उमेश कोल्हे की हरकतों पर नजर रखने के लिए एक रेकी टीम बनाई। यह ग्रुप 20 जून की रात को अन्य आरोपियों शेख शकील, अब्दुल अरबाज मुदस्सिर अहमद, अब्दुल तौफीक शेख और अतीब के साथ फिर से मिला और अपनी योजना को अंजाम देने की रणनीति तैयार करने के लिए इरफान के साथ इकट्ठा हुए। रेकी करने वाले मोहम्मद शोएब और शाहिम अहमद ने उमेश कोल्हे का पता लगाने में मदद की। जब वह मौके पर पहुंचा तो दोनों ने उसकी बाइक रोक दी और शोएब ने उस पर चाकू से हमला कर दिया।

हत्या के बाद मनाया गया था जश्न

जांच में पता चला कि हत्या के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए थे और इरफान से मिले थे। जिसके बाद सभी ने साथ मिलकर हत्या का जश्न मनाया और पार्टी का आयोजन किया था। एजेंसी ने दावा किया कि अब्दुल अरबाज जो उनके ग्रुप का हिस्सा था, वह पुष्टि करने के लिए अस्पताल गया कि उमेश कोल्हे मरा या नहीं। कंफर्म होने के बाद मौलवी को मौत के बारे में बताया गया।

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