New Parliament Building: संसद की नई बिल्डिंग को किसी ने बताया 'ताबूत' तो किसी ने कहा-'राज्यसभा का अपमान'
New Parliament Building: संसद की नई बिल्डिंग के उद्घाटन के बीच अलग-अलग दल के नेता इसपर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। तमाम विपक्षी दल इसके उद्घाटन का विरोध कर रहे हैं और उन्होंने इसका बहिष्कार किया है।

New Parliament Building: आज जब संसद की नई बिल्डिंग का उद्घाटन हो रहा है तो उसको लेकर अलग-अलग दलों के नेताओं की अलग-अलग प्रतिक्रिया आ रही है। कई विपक्षी दल आज के इस कार्यक्रम का बहिष्कार कर रहे हैं।
सुधांशु त्रिवेदी
भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि आज जब देश के नए संसद भवन का उद्घाटन हो रहा है तो इसपर कोई भी राजनीतिक टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। सभी राजनीतिक दलों को राजनीति से ऊपर उठकर इसका सम्मान करना चाहिए।
लोकतंत्र का ताबूतीकरण
आरजेडी ने कहा कि लोकतंत्र का ताबूतीकरण किया जा रहा है। हम शुरू से कह रहे हैं कि लोकतंत्र का मंदिर सम्मान करना चाहिए। आप इन जगहों को अलग रास्ता दिखाना चाहते हैं, देश इसको स्वीकार नहीं कर रहा है। संविधान और परंपरा दोनों का उल्लंघन हैं, राष्ट्रपति सर्वेसर्वा होते हैं संसद के। संविधान का अनुच्छेद 79 यह स्पष्ट करता है। हमारा पीएम से आग्रह है कि लोकतंत्र का ताबूतीकरण ना किया जाए।
सुशील मोदी
नया संसद भवन जनता के पैसे से बना है। ये तमाम दल जो बहिष्कार कर रहे हैं, क्या उन्होंने यह तय कर लिया है कि वह इस नए भवन में नहीं आएंगे, जब सभी संसद की कार्रवाई यहां होगी। संसद भवन की तुलना ताबूत से कर देना, इससे ज्यादा संसद का अपमान क्या हो सकता है।
सुप्रिया सुले
हमे अपने लोकतंत्र पर गर्व है, लोकतंत्र तभी लोकतंत्र है जब वहां विपक्ष भी हो। ऐसे में बिना विपक्ष के यह कार्यक्रम अधूरा है। इन लोगों ने तीन दिन पहले व्हाट्सएप पर न्योता दिया है। सरकार को सभी विपक्ष के नेताओं को फोन करना चाहिए था। हम सभी पूजा में ओम बिरला को देख रहे हैं जोकि लोकसभा के स्पीकर हैं, लेकिन राज्यसभा के सभापति को नहीं बुलाया गया, यह राज्यसभा का अपमान है।
अर्जुन मुंडा
आज का ऐसा ऐतिहासिक दिन भारत के इतिहास में जुड़ रहा है, जब भारतीय संसद भवन का भारत की सरकार पीएम मोदी के नेतृत्व में उद्घाटन कर रही ही। यह अविस्मरणीय दिन है। यह अनंतकाल के लिए है, भारत जबतक है तबतक यह लोकतंत्र का मंदिर भारत को मजबूती के साथ प्रस्तुत करेगा। विपक्ष को इसपर राजनीति नहीं करनी चाहिए और उद्घाटन कार्यक्रम में हिस्सा लेकर लोकतंत्र को मजबूत करना चाहिए।












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