New Labour Codes 2025: 5 साल नहीं, अब इतने दिनों की नौकरी पर भी मिलेगा Gratuity का फायदा
Gratuity Rule Change: केंद्र सरकार ने 29 पुराने श्रम कानूनों को चार नए श्रम कानूनों (New Labour Codes) में बदलकर एक ऐतिहासिक बदलाव किया है। इन कानूनों का लक्ष्य सभी प्रकार के श्रमिकों - संगठित, असंगठित, गिग वर्कर्स, प्लेटफॉर्म वर्कर्स और महिलाओं को एक समान लाभ प्रदान करना है। इन कानूनों के तहत सैलरी, सोशल सिक्योरिटी और जॉब गारंटी जैसे कई महत्वपूर्ण फायदे शामिल हैं। सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव ग्रेच्युटी को लेकर किया गया है।
अब तक ग्रेच्युटी के लिए 5 साल की निरंतर सेवा आवश्यक थी, जिसे घटाकर केवल 1 साल कर दिया गया है। यह निर्णय लाखों कर्मचारियों के लिए एक बड़ी राहत है, खासकर उन लोगों के लिए जो छोटी अवधि के अनुबंधों या फिक्स्ड-टर्म पर काम करते हैं।

ग्रेच्युटी पात्रता में ऐतिहासिक विस्तार
पहले ग्रेच्युटी का लाभ केवल उन स्थायी कर्मचारियों को मिलता था जिन्होंने एक ही कंपनी में कम से कम 5 साल तक काम किया हो। नए श्रम कानूनों के तहत, इस पात्रता मानदंड में क्रांतिकारी बदलाव किया गया है। अब फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों और अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) पर काम करने वाले कर्मचारियों को भी ग्रेच्युटी का लाभ मिलेगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यदि कोई कर्मचारी केवल 1 साल तक ही नौकरी करता है, तो भी वह ग्रेच्युटी का हकदार होगा। यह बदलाव उन श्रमिकों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है जिनकी नौकरी की अवधि कम होती है या जो अक्सर नौकरी बदलते रहते हैं।
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New Labour Codes: ग्रेच्युटी गणना का सीधा फॉर्मूला
ग्रेच्युटी की गणना करना काफी सीधा है और इसे एक सरल फॉर्मूले का उपयोग करके किया जा सकता है। यह फॉर्मूला है: अंतिम सैलरी x (15/26) x कंपनी में काम किए गए साल। यहाँ 'अंतिम सैलरी' का अर्थ आमतौर पर कर्मचारी की अंतिम बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ता (DA) का योग होता है। यह फॉर्मूला सुनिश्चित करता है कि कर्मचारियों को उनकी सेवा अवधि और अंतिम आय के आधार पर न्यायसंगत ग्रेच्युटी प्राप्त हो। इस स्पष्ट फॉर्मूले से कर्मचारी स्वयं भी अपनी अनुमानित ग्रेच्युटी की गणना आसानी से कर सकते हैं।
5 साल की सेवा पर ग्रेच्युटी की गणना
यदि कोई व्यक्ति पुरानी प्रणाली के तहत 5 साल तक एक ही कंपनी में काम करता था और उसकी अंतिम सैलरी (बेसिक पे + डीए) 60,000 रुपये थी, तो उसकी ग्रेच्युटी की गणना इस प्रकार होगी 60,000 x (15/26) x 5 = 1,73,077 रुपये। यह उदाहरण दिखाता है कि कैसे एक लंबी सेवा अवधि के लिए ग्रेच्युटी एक महत्वपूर्ण राशि बन जाती है, जो कर्मचारी को उसकी सेवानिवृत्ति या नौकरी छोड़ने के बाद वित्तीय सुरक्षा प्रदान करती है। यह राशि कर्मचारी के करियर में किए गए योगदान का एक पुरस्कार होती है।
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अब 1 साल की सेवा पर भी ग्रेच्युटी
नए श्रम कानूनों के तहत, यदि ग्रेच्युटी गणना के फॉर्मूले में कोई बदलाव नहीं होता है और एक कर्मचारी की 1 साल की सेवा में अंतिम बेसिक सैलरी 50,000 रुपये है, तो उसकी ग्रेच्युटी की गणना इस प्रकार होगी: 50,000 x (15/26) x 1 = 28,847 रुपये। यह बदलाव छोटे सेवाकाल वाले कर्मचारियों के लिए अत्यधिक लाभदायक है, जिन्हें पहले कोई ग्रेच्युटी नहीं मिलती थी। अब, मात्र एक वर्ष की सेवा पर भी, वे एक सम्मानजनक राशि प्राप्त करने के हकदार होंगे, जिससे उनकी वित्तीय स्थिति मजबूत होगी।
ग्रेच्युटी: नियोक्ता का आभार और कर्मचारी का अधिकार
ग्रेच्युटी किसी भी कंपनी द्वारा अपने कर्मचारियों को उनके बहुमूल्य कार्य और समर्पण के बदले दिया जाने वाला एक प्रकार का 'तोहफा' या पुरस्कार है। यह अब तक एक ही संस्थान में 5 साल तक लगातार काम करने वाले स्थायी कर्मचारियों को मिलता था, लेकिन अब इसमें ऐतिहासिक बदलाव कर दिया गया है। नए नियमों के अनुसार, सिर्फ 1 साल तक सेवा करने वाले कर्मचारी भी इसके दायरे में आ गए हैं, और फिक्स्ड-टर्म तथा कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारियों को भी ग्रेच्युटी का लाभ मिलेगा। यह कदम कर्मचारियों के अधिकारों को मजबूत करता है और उन्हें बेहतर वित्तीय सुरक्षा प्रदान करता है।
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