सीएम की रेस में पहले भी नहीं थे त्रिवेंद्र सिंह रावत और आज भी नहीं, खुद उन्होंने कही ये बात
देहरादून। तीरथ सिंह रावत के इस्तीफे के बाद उत्तराखंड के नए मुख्यमंत्री को चुनने के लिए भाजपा विधायक दल की बैठक से पहले, वरिष्ठ नेता त्रिवेंद्र सिंह रावत ने शनिवार को पार्टी नेतृत्व के पाले में गेंद डाल दी। पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने समाचार एजेंसी एएनआई के हवाले से कहा, "न तो मैं पहले दौड़ का हिस्सा था और न ही आज। विधायक दल के नेता का चुनाव आज बैठक में किया जाएगा।" उत्तराखंड के प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मदन कौशिक के बयान ने भी इस संभावना को मजबूती दे दी है। असल में मदन कौशिक ने इस बात के संकेत दिए हैं कि कोई वर्तमान विधायक ही यहां पर सीएम की कुर्सी संभाल सकता है। अगर त्रिवेंद्र सिंह रावत दोबारा उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बनते हैं तो यह इस राज्य की सियासत में एक बड़ा ट्विस्ट होगा।
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आपको बता दें कि तीरथ सिंह रावत ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा सीएम बनाए जाने के ठीक चार महीने बाद शुक्रवार देर शाम पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने त्रिवेंद्र सिंह रावत की जगह पद संभाला था। त्रिवेंद्र सिंह रावत मार्च 2017 से उत्तराखंड के सीएम थे, लेकिन उन्हें यह पद छोड़ना पड़ा क्योंकि भाजपा ने उनसे बाहर निकलने की मांग की थी। एक अंग्रेजी अखबार से बातचीत में भाजपा नेताओं ने बताया कि कई विधायक त्रिवेंद्र सिंह रावत से नाखुश थे। उन्होंने कहा कि विधायकों और पार्टी कार्यकर्ताओं के अंदर असंतोष विकसित हो रहा था। वहीं इस साल की शुरुआत में 13 विधायकों ने त्रिवेंद्र सिंह रावत की कार्यशैली के खिलाफ बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व को पत्र लिखकर उनकी बात नहीं मानने का आरोप लगाया था।
असल में त्रिवेंद्र सिंह रावत का नाम प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए भी आगे बढ़ाया जा रहा है। पार्टी के एक धड़े का मानना है कि अगले साल होने वाले चुनाव को देखते हुए किसी नए चेहरे पर दांव लगाने से बेहतर है कि त्रिवेंद्र सिंह रावत को ही एक फिर से बागडोर सौंप दी जाए। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि कई दौर की मीटिंग्स के बाद तीरथ सिंह रावत के इस्तीफे के बाद उत्तराखंड में भाजपा की राजनीति कमजोर पड़ सकती है।












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