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UP के टुकड़े-टुकड़े करने की मांग क्यों? नेहरू और अंबेडकर भी चाहते थे यूपी का बंटवारा, अब मायावती ने किया ऐलान

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष मायावती ने रविवार को ऐलान किया कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आती है तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश को एक अलग राज्य बनाने के लिए ठोस कदम उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोग लंबे समय से अलग राज्य की मांग करते आ रहे हैं।

भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री डॉ संजीव बालियान ने बसपा सुप्रीमो मायावती के बयान से सहमति जताते हुए कहा कि मायावती की ये मांग अच्छी है मगर उन्हें ये मौका नहीं मिलेगा। बालियान ने कहा कि जनता ने पीएम मोदी को फिर से प्रधानमंत्री बनाने का मन बना लिया है।

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आपको बता दें कि मायावती हों या संजीव बालियान दोनों ही पश्चिमी यूपी को एक अलग राज्य बनाने की मांग करते आ रहे हैं। हालांकि बीजेपी के कई नेता इस मांग से सहमत नहीं हैं। उनका मानना है कि अगर उत्तर प्रदेश का ये हिस्सा अलग राज्य बनता है तो ये 'मिनी पाकिस्तान' बन जाएगा। गौरतलब है कि इस इलाके में मुस्लिम आबादी अधिक है।

आपको बता दें कि साल 2012 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले तत्कालीन सीएम मायावती ने यूपी के बंटवारे का प्रस्ताव पास किया था। 21 नवंबर 2011 को यूपी विधानसभा में मायावती ने बिना चर्चा के ये प्रस्ताव पास करा लिया था। हालांकि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी ने इसका कड़ा विरोध किया।

केंद्र सरकार ने प्रस्ताव लौटाया

मायावती के प्रस्ताव के मुताबिक उत्तर प्रदेश के चार हिस्से होने थे। इन्हें पूर्वांचल (पूर्वी यूपी), पश्चिमी प्रदेश (पश्चिमी यूपी), बुंदेलखंड (दक्षिणी यूपी) और अवध प्रदेश (मध्य यूपी) में बांटा जाना था। हालांकि, केंद्र की तत्कालीन यूपीए सरकार ने मायावती सरकार के इस प्रस्ताव को वापस लौटा दिया था।

केंद्र ने तब कुछ मुद्दों पर स्पष्टीकरण भी मांगे थे। जैसे कि, नए राज्यों की सीमाएं कैसी होंगी? राजधानियां क्या बनेंगी? कर्ज का बंटवारा कैसे होगा? हालांकि इस पर कुछ आगे काम हो पाता, मायावती दोबारा सत्ता में नहीं आ पाईं। 2012 में अखिलेश यादव सीएम बन गए जिन्होंने अखंड उत्तरप्रदेश का नारा दिया।

अलग राज्य बनाए जाने के पक्षधर

आपको बता दें कि मायावती से पहले जवाहरलाल नेहरू, बीआर अंबेडकर, केएम पणिक्कर जैसे दिग्गज भी यूपी के बंटवारे के पक्ष में थे। राज्य पुनर्गठन आयोग के सदस्य केएम पणिक्कर उत्तर प्रदेश के दो भागों में बांटे जाने के पक्ष में थे। उनका मानना था कि राज्य के बंटवारे से कामकाज में आसानी होगी। वे एक अलग आगरा राज्य बनाए जाने के पक्ष में थे जिसमें मेरठ, आगरा, रोहिलखंड और झाँसी डिवीजन होता।

पणिक्कर के तर्क से अंबेडकर सहमत थे मगर उनका मानना था कि उत्तर प्रदेश को 2 नहीं 3 भागों में बांटे जाने की जरूरत है। वे मेरठ, कानपुर और इलाहाबाद को 3 राज्यों की राजधानियां बनाए जाने के पक्षधर थे। अंबेडकर का मानना था कि इससे प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी, राजव्यवस्था पर इतने बड़े राज्य के असमान प्रभाव को कम किया जा सकेगा और अल्पसंख्यकों की बेहतर सुरक्षा हो सकेगी।

नेहरू ने सात जुलाई 1952 को लोकसभा में कहा था, 'मैं व्यक्तिगत रूप से इस बात से सहमति रखता हूं कि उत्तर प्रदेश का बंटवारा किया जाना चाहिए। इसे चार राज्यों में बांटा जा सकता है। हालांकि, मुझे संदेह है कि कुछ साथी मेरे विचार को शायद ही पसंद करेंगे। हो सकता है कि मुझसे उलट राय रखने वाले साथी इसके लिए दूसरे राज्यों के हिस्सों को शामिल करने की बात कहें।'

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