NEET-UG पेपर लीक की पूरी कहानी, कब-कहां-कैसे हुआ फर्जीवाड़ा, कहां तक पहुंची जांच
NEET-UF Paper Leak: नीट-यूजी की परीक्षा में हुई गड़बड़ी की जांच अब सीबीआई कर रही है। सीबीआई गुजरात, बिहार और राजस्थान में नीट परीक्षा में गड़बड़ी से जुड़े 5 मामलों की जांच कर रही है। सीबीआई ने गुजरात, बिहार में फिर से नया केस दर्ज किया गया।
जबकि राजस्थान में तीन नई एफआईआर सीबीआई की ओर से दर्ज कराई गई है। नए केस को मिलाकर सीबीआई अब नीट परीक्षा में गड़बड़ी से जुड़े कुल 6 मामलों की जांच कर रही है।

हालांकि ईडी की ओर से अभी तक नीट-यूजी की परीक्षा में हुई गड़बड़ी की जांच शुरू नहीं की गई है। लेकिन एजेंसी ने दूसरी परीक्षा में ओमएआर से छेड़छाड़ के मामले की जांच शुरू कर दी है। यह जांच मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल, राजस्थान, झारखंड में है, यहां ईडी मनी लॉन्ड्रिंग के लिहाज से मामले की जांच कर रही है।
बिहार में सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा
नीट-यूजी पेपरलीक का सबसे बड़ा मामला बिहार के पटना से आया, यहां बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने 18 लोगों को गिरफ्तार किया, जिसमे मुख्य आरोपी सिकंदर यदवेंदु, उसके सहयोगी, और कुछ अभ्यर्थियों के माता-पिता भी शामिल हैं।
इस मामले का मुख्य आरोपी सिकंदर यदवेंदु, उसका भतीजा अनुराज यादव और दलाल नीतीश कुमार, अमित आनंद है। इन लोगों ने पुलिस को बताया कि कैसे उन्होंने 5 मई को परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों को सवाल और उनके जवाब रटाए, हर उम्मीदवार से 40-40 लाख रुपए लिए गए। बताया जा रहा है कि इस पूरे मामले का मास्टरमाइड संजीव मुखिया है, जोकि फरार है। संजीव सिंह ऊर्फ मुखिया का नाम पहले भी पेपर लीक में सामने आ चुका है।
कैसे हुई चीटिंग
रिपोर्ट के अनुसार अभ्यर्थियों से 30-40 लाख रुपए लिए गए थे। इन लोगों ने पटना के छोटे से लॉज में छात्रों को ठहराया, जहां छात्रों को प्रश्नपत्र बढ़ाया गया और यहां इन लोगों से सवालों को रटने के लिए कहा गया। मिडलमैन अमित आनंद ने पुलिस से पूछताछ में बताया कि उसके साथियों ने लीक पेपर इन लोगों को परीक्षा से एक दिन पहले मुहैया कराया। जिसके बाद छात्रों को प्रश्न और उनके जवाब रटाए गए।
आनंद ने अपने बयान में कहा कि उसने आयुष कुमार से 32 लाख रुपए लिए थे, उसने नीट की परीक्षा डीएवी स्कूल दी, बाद में उसे सेंटर से ही हिरासत में ले लिया गया था। अपने कबूलनामे में सिकंदर प्रसाद यदवेंदु ने कहा कि उसने लोगों से 40-40 लाख रुपए लिए।
आखिर कैसे पकड़ में आए
बिहार पुलिस ने जब 5 मई को फोन कॉल खंगालना शुरू किया तो जानकारी मिली कि इसमे झारखंड का गैंग शामिल है, जिसके बाद स्थानीय पुलिस को अलर्ट किया गया और एक के बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू की। गौर करने वाली बात है कि 5 मई को ही नीट-यूजी की परीक्षा हुई थी।
महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात के मामले
नीट-यूजी पेपर लीक का मसला पिछले हफ्ते महाराष्ट्र पहुंच गया। यहां एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड ने लातूर के जिला परिषद स्कूल के हेडमास्टर को हिरासत में लिया। पुलिस ने इस मामले में जलील खान उमर खान पठान नाम के हेडमास्टर को रविवार रात को गिरफ्तार किया। इसके साथ ही स्कूल के शिक्षक संजय जाधव से भी पुलिस ने सोमवार को पूछताछ की। पुलिस ने बताया कि ये दोनों प्राइवेट कोचिंग चलाते हैं।
प्रथम दृष्टया प्रतीत होता है कि पठान और जाधव के मध्यस्त के तौर पर कोंगलवार काम करता था। वह आईटीआई उमर्ग में तैनात है। ये लोग 50 हजार लेकर कार्ड देते थे, जिसके बाद डील होने पर 5 लाख लेकर छात्रों को पेपर दिया गया।
एटीएस को संदिग्धों की टिप मिली कि नीट छात्रों को परीक्षा में पास करने के लिए ये लोग पैसे ले रहे हैं। जिसके बाद पुलिस एक्शन में आई। एटीएस ने जाधव और पठान को लातूर से हिरासत में लिया।
गुजरात के गोधरा में पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिसमे स्कूल प्रिंसिपल और एक टीचर भी शामिल हैं। इन लोगों ने कथित तौर पर 27 लोगों से 10-10 लाख लेकर परीक्षा में पास कराने का आश्वासन दिया था। आरोपी तुषार भट्ट, स्कूल प्रिंसिपल पुरुषोत्तम शर्मा, वडोदरा के एजूकेशन कंसल्टेंट परशुराम रॉय, उसके साथी आनंत और मिडलमैन आरिफ वोहरा को गिरफ्तार गया।
एफआईआर के अनुसार तुषार भट्ट के पास से 7 लाख रुपए बरामद किए गए हैं जोकि जय जलराम स्कूल में टीचर के तौर पर काम कर रहा था। उसे शहर में नीट के लिए सेंटर डिप्टी सुप्रिटेंडेंड बनाया गया था। इन लोगों ने छात्रों से कहा कि वह गोधरा सेंटर को चुनें, जहां उनकी मदद हो सकती है।
छात्रों से कहा गया था कि जो सवाल आप जानते हैं उन्हें हल करें बाकी छोड़ दें। इस फर्जीवाड़े में 27 छात्र शामिल हुए। गोधरा के डीएम को इस बारे में टिप मिली और स्कूल पर पुलिस व अधिकारी पहुंचे। यहां 16 छात्रों के नाम पाए गए, जोकि उस लिस्ट में शामिल थे।












Click it and Unblock the Notifications