मोदी और शिवराज सरकार के कई मंत्रियों ने रद्द किए अपने दौरे के तयशुदा कार्यक्रम, क्यों?
नई दिल्ली। एससी-एसटी एक्ट में किेए गए संशोधन को लेकर देशभर में सवर्ण जातियों के लोग सड़क पर उतरने की तैयारी में है। संशोधन के खिलाफ 6 सितंबर को कथित देशव्यापी बंद का भी ऐलान किया गया है। राजनीतिक तौर पर मजबूत अगड़ी जातियों के इस आंदोलन से बीजेपी की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। बीजेपी कोशिश कर रही है कि उसका पारंपररिक वोट बैंक उससे छिटक ना जाए। लेकिन फिलहाल केंद्र सरकार द्वारा किए गए संशोधन से ये जातियां नाराज़ हैं। नाराजगी का आलम ये है कि सरकार के कई मंत्रियों ने अपने प्रस्तावित दौरे और कार्यक्रम रद्द कर दिये हैं। उन्हें लग रहा है कि अगर वो इस वक्त जनता के बीच जाते हैं तो उन्हें गुस्से का सामना करना पड़ सकता है।

केंद्रीय मंत्रियों के दौरे रद्द
एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के खिलाफ आंदोलन को देखते हुए केंद्र की एनडीए सरकार के कई मंत्रियों और नेताओं ने अपने पहले से प्रस्तावित दौरे रद्द कर दिए हैं। सूत्रों से खबर है कि एनडीए में भागीदार लोक जनशक्ति पार्टी के नेता रामविलास पासवान और उनके बेटे चिराग पासवान के कई प्रस्तावित दौरे रद्द कर दिए गए हैं। रामविलास पासवान प्रधानमंत्री के दूत के तौर पर लोगों के बीच इस एक्ट को लेकर बात रखने वाले थे। पासवान को 4 सितंबर को अहमदाबाद जाना था, 8 सितंबर को लखनऊ, 19 को हैदराबाद और विजयवाड़ा में 20 सितंबर को कार्यक्रम था लेकिन अब ये सारे कार्यक्रम अनिश्चितकाल के लिए टाल दिए गए हैं। पासवान की सिर्फ पंजाब में रैली होगी जहां देश में सबसे ज्यादा अनुसूचित जाति के लोगों की जनसंख्या है।

मध्यप्रदेश में दुबके मंत्री
एक्ट में संशोधन के खिलाफ आंदोलन का असर पूरे देश में दिख रहा है लेकिन मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तर भारत के कई इलाकों में ये ज्यादा उठ खड़ा हुआ है। मध्यप्रदेश के पांच जिलों में धारा-144 लागू कर दी गई है। इसमें ग्वालियर शहर,शिवपुरी,भिंड, अशोकनगर और गुना शामिल है। मध्यप्रदेश इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं और मौजूदा बीजेपी की शिवराज सिंह चौहान के लिए इस आंदोलन ने बड़ी समस्या खड़ी कर दी है। प्रदेश सरकार के कई मंत्रियों ने अपने सार्वजनिक कार्यक्रम खासकर जो चंबल संभाग में होने थे वो रद्द कर दिए। मध्यप्रदेश में खासकर इसे लेकर बड़ा आंदोलन खड़ा हो गया है।

यशोधरा राजे सिंधिया
खेल एवं युवा कल्याण मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया को शिवपुरी में आयोजित कार्यक्रमों में शामिल होना था लेकिन वो वहां नहीं पहुंचीं। बाद में उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि मैंने कोई कार्यक्रम निरस्त नहीं किया है। मैं भोपाल में हूं, लेकिन उन्होंने ये नहीं बताया कि वो शिवपुरी क्यों नहीं गईं।

नारायण सिंह कुशवाह
नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री नारायण सिंह कुशवाह को अपने ही समाज यानी कुशवाह समाज द्वारा आयोजित एक समारोह में मुरैना जिले के अम्बाह में शामिल होना था लेकिन वो नहीं गए। हालांकि वो ग्वालियर में ही मौजूद थे।

ललिता यादव
मध्यप्रदेश की पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री ललिता यादव को भी दतिया में यादव समाज के कार्यक्रम में आना था लेकिन उन्होंने भी आखिरी वक्त पर दौरा रद्द कर दिया।

भारत सिंह कुशवाह
ग्वालियर ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र के बीजेपी विधायक भारत सिंह कुशवाह भी अम्बाह में कुशवाह समाज के कार्यक्रम में आमंत्रित थे। वो भी ग्वालियर में ही मौजूद थे लेकिन कार्यक्रम में नहीं गए।
सूत्रों का कहना है कि कई और नेताओं के दौरे रद्द किए गए हैं क्योंकि सरकार को खुफिया एजेंसियों से सूचना मिली है कि देशभर में नेताओं के कार्यक्रमों में हंगामा हो सकता है। खबर है कि ग्वालियर में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के घर की सुरक्षा को भी बढ़ा दिया गया है।

बीजेपी और आरएसएस के हैं लोग
पूरे मामले पर दलित संगठनों के राष्ट्रीय संघ के चेयरमैन अशोक भारती ने 'वन इंडिया' से बात करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस मामले में देखना चाहिए कि सरकार के फैसले का विरोध कौन कर रहा है। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश पूरा देश नहीं हैं। विरोध करने वाले बीजेपी और आरएसएस के ही लोग हैं और यही प्रधानमंत्री का विरोध कर रहे हैं।
भारती आगे कहते हैं कि इन प्रदर्शनकारियों का पर्दाफाश करने के लिए, सरकार को सामाजिक, आर्थिक और जाति आधारित जनगणना के आंकड़े जारी करने चाहिए। मेरी जानकारी के मुताबिक इसमें ब्राह्मण, राजपूत और वैश्य समाज की कुल जनसंख्या 9 प्रतिशत ही है। उन्होंने कहा कि सरकार को ये समझना होगा कि यही 9 प्रतिशत लोग विकास नहीं चाहते हैं और वो वास्तव में पीएम के नारे ' सबका साथ सबका विकास' के खिलाफ हैं। जहां तक अन्य पिछड़ा वर्गों का संबंध है, वो इस आंदोलन के समर्थन में नहीं हैं। ये सरकार का दायित्व है कि वो उन लोगों से निपटे जो केवल अपना ही विकास चाहते हैं।
दरअसल देश के कुछ बड़े राज्यों में विधानसभा चुनावों से ठीक पहले बीजेपी एससी-एसटी एक्ट को लेकर दोहरे संकट में फंस गई है एक तरफ वो अनुसूचित जाति जनजाति के लोगों और उसके नेताओं की नारजगी मोल नहीं ले सकती तो वहीं वो अगड़ी जातियों का वोट बैंक खोकर राजनीतिक सुसाइड नहीं कर सकती है।
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