NCP ने कर्नाटक चुनाव में उतारे हैं ये नौ उम्‍मीदवार, अजित पवार का नाम स्‍टार प्रचारकों में नहीं किया है शामिल

Karnataka election: NCP ने कर्नाटक चुनाव में नौ उम्‍मीदवार उतारे हैं। नामांकन के बाद पहली उम्‍मीदवारों की लिस्‍ट जारी की इसके साथ स्‍टार प्रचारकों की लिस्‍ट जारी की।

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कर्नाटक विधानसभा चुनाव 10 मई को होने वाला है और नामांकन की आखिरी तारीख 20 मई को भी पार्टियों के उम्‍मीवदवारों का नामांकन समाप्‍त हो चुका है। वहीं नामांकन खत्‍म होने के एक दिन बाद एनसीपी ने अपने नौ उम्‍मीदवारों की पहली लिस्‍ट जारी की है। हालांकि इन सभी उम्‍मीदवारों ने अपना नामांकन पहले ही दाखिल कर दिया है।

अजित पवार को नहीं बनाया गया स्‍टार प्रचारक

नौ उम्‍मीदवारों की लिस्‍ट के साथ एनसीपी ने अपने स्‍टाार प्रचाराकों की लिस्‍ट जारी कर दी है। जिसमें सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि अजित पवार का नाम स्‍टार प्रचाराकों की लिस्‍ट में शामिल नहीं हैं। अजित पवार का इस लिस्‍ट में शामिल ना होना उनक खबरों को और पुख्‍ता कर रहा है जिसमें दावा किया जा रहा है कि एनसीपी प्रमुख शरद पवार के भतीते अजित पवार भापजा ज्‍वॉइन कर सकते हैं।

जिन सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला है वहां उतारे हैं अपने उम्‍मीदवार

शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) ने अपने उम्‍मीदवारों की लिस्‍ट जारी करते हुए बताया कि उन्‍होंने अपने कर्नाटक चुनाव में अपने जो नौ उम्मीदवार उतारे हैं, जहां भाजपा, कांग्रेस और जेडीएस के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है।

मराठी बहुल्‍य क्षेत्र बेलगावी में उतारा है अपना ये उम्‍मीदवार

एनसीपी ने उत्तम पाटिल को बेलगावी जिले के निप्पनी विधानसभा सीट से चुनाव में टिकट देकर उतारा है। ये क्षेत्र मराठी बहुल्‍य क्षेत्र है। यही पर छत्रपति शिवाजी महाराज की मूर्ति के अपमान के खिलाफ आंदोलन में सक्रिय भागीदारी की थी। याद रहे बेलगामी को लेकर लंबे समय से कर्नाटक और महाराष्‍ट्र के बीच विवाद चल रहा है। कर्नाटक के अंतर्गत आने वाले इस क्षेत्र पर महाराष्‍ट्र लंबे समय से दावा कर रहा है और आए दिन दोनेां राज्‍यों के बीच विवाद भी होता आया है।

लिस्‍ट में शामिल हैं ये नाम

  • देवर हिप्परगी से मसूर साहब बिलागी,
  • बासवान बागवाड़ी से जमीर अहमद इनामदार
  • नागथन से कुलप्पा चव्हाणयेलबुर्गा से हरि
  • रानेबेन्नूर से आर शंकर
  • हगारीबोम्मनहल्ली से के सुगुना
  • विराजपेठ से एसवाईएम मसूद फौजदार
  • नरसिम्हाराजा से रेहाना बानो को मैदान में उतारा है।

भाजपा के इस बागी एमएसी को भी एनसीपी ने बनाया उम्‍मीदवार

हरि एनसीपी की कर्नाटक इकाई के अध्यक्ष हैं और शंकर बीजेपी एमएलसी हैंजिन्होंने 10 मई को चुनाव लड़ने के लिए टिकट ना मिलने पर भाजपा छोड़ दी थी

बता दें 2018 में रानीबेन्नूर निर्वाचन क्षेत्र से आर शंकर कर्नाटक प्रज्ञावंत जनता पार्टी (केपीजेपी) के एकमात्र विधायक के रूप में चुने गए, आर शंकर बाद में कांग्रेस में शामिल हो गए।

हालांकि उन्‍होंने तत्‍कालीन एच डी कुमारस्वामी के नेतृत्व वाली कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया, जब दोनों दलों के कुछ विधायकों ने इस्तीफा दे दिया। तब वे कांग्रेस के सदस्‍य थे इसलिए उन्‍हें अयोग्य घोषित कर दिया गया था कि वे कांग्रेस के सदस्य थे।

इसके बाद शंकर भाजपा में शामिल हो गए और विधान परिषद के लिए चुने गए और जब भाजपा ने टिकट नहीं दिया तो भाजपा एमएससी पद से इस्‍तीफा देकर जेडीएस में शामिल हो गए थे।

एनसीपी ने इन्‍हें बनाया है अपना स्‍टार प्रचारक

एनसीपी की स्‍टार प्रचारकों की सूची में एनसीपी प्रमुख शरद पवार, प्रफुल्ल पटेल, सुप्रिया सुले, पी पी मोहम्मद फैजल, फौजिया खान, क्लाइड क्रास्टो समेत अन्‍य लोग शामिल हैं।

एनसीपी कर्नाटक के जरिए पाना चाहती है अपना खोया हुआ ये स्‍टेटस

कर्नाटक में उम्मीदवारों को मैदान में उतारने के एनसीपी के फैसले को गोवा, मेघालय और मणिपुर जैसे राज्यों में विफल होने के बाद राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा हासिल करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। याद रहे हाल ही में चुनाव आयोग ने एनसीपी से राष्‍ट्रीय पार्टी का दर्जा छीन लिया है।

याद रहे कर्नाटक में चुनावी मैदान में एनसीपी की एंट्री तब हुई जब एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए पीएम मोदी के खिलाफ विपक्षी पार्टियों की एकता को मजबूत करने में जुटे हुए हैं।

कांग्रेस बड़ी जीत हासिल करने के लिए बहा रही पसीना

वहीं कांग्रेस कर्नाटक विधानसभा चुनावों में बड़ी जीत हासिल करने के लिए हाथ पैर मार रही है। इसकी वजह है कि पिछले दिनों हुए चुनाव में हरियाणा को छोड़कर अन्‍य राज्‍यों में कांग्रेस का बहुत ही खराब प्रदर्शन रह। हालांकि 2014 के लोकसभा चुनावों में हार के बाद से कांग्रेस अपने खोए हुए आस्तिव को पाने की जद्दोजहेद कर रही है। लोक सभा चुनाव 2024 से पहले कांग्रेस जीत कर अपना खोए हुए राज्‍य की सता को दोबारा पाकर मजबूत होना चाहती हैं। याद रहे कर्नाटक एक ऐसा राज्‍य है जहां कांग्रेस एक मजबूत विपक्ष के रूप में स्‍टैंड कर रही है।

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