सावरकर को समलैंगिक बताने पर अब NCP भी कांग्रेस पर भड़की, कही ये बड़ी बात
सावरकर के बारे में आपत्तिजनक बातों को लेकर शिवसेना के बाद अब एनसीपी ने भी कांग्रेस पर हमला बोला है...
नई दिल्ली। कांग्रेस सेवादल की बुकलेट में विनायक दामोदर सावरकर के बारे में विवादित टिप्पणी को लेकर सियासी हंगामा खड़ा हो गया है। इस पूरे विवाद को लेकर जहां भाजपा ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है तो वहीं, महाराष्ट्र सरकार में सहयोगी शिवसेना ने कहा है कि कांग्रेस के दिमाग में गंदगी भरी है। दरअसल भोपाल में कांग्रेस सेवादल ने विनायक दामोदर सावरकर को लेकर एक बुकलेट छापी है, जिसमें लिखा गया है कि सावरकर और नाथूराम गोडसे के बीच समलैंगिक संबंध थे। इस मामले को लेकर कांग्रेस पर भड़कते हुए अब एनसीपी ने भी बड़ा बयान दिया है।

'इस तरह से किसी के बारे में आपत्तिजनक लेख लिखना गलत'
एनसीपी के प्रवक्ता नवाब मलिक ने सावरकर को लेकर चल रहे विवाद पर कहा, 'इस तरह से किसी के बारे में आपत्तिजनक लेख लिखना गलत है। वैचारिक मतभेद ठीक हैं, लेकिन किसी के ऊपर व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं की जानी चाहिए, खासकर तब, जब वह व्यक्ति (सावरकर) जीवित नहीं हैं। उस विवादित बुकलेट को वापस लिया जाना चाहिए।' आपको बता दें कि कांग्रेस सेवादल की इस बुकलेट में सावरकर को लेकर कई ऐसी आपत्तिजनक बातें लिखी गई हैं, जिन्हें लेकर विवाद हो रहा है।
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विभागों के बंटवारे में क्यों हो रही है देरी, नवाब मलिक ने बताया
वहीं, महाराष्ट्र सरकार में विभागों के बंटवारे में हो रही देरी को लेकर जब नवाब मलिक से पूछा गया तो उन्होंने कहा, 'महाराष्ट्र में विभागों के बंटवारे में देरी के पीछे कोई खास वजह नहीं है, देरी इसलिए हो रही है क्योंकि हम कुछ नए विभाग बनाए जाने पर विचार कर रहे हैं और इसमें समय लग रहा है। सोमवार को सभी मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा कर दिया जाएगा।' गौरतलब है कि महाराष्ट्र में मंत्रियों के शपथ लेने के बाद भी अभी तक विभागों का बंटवारा नहीं हुआ है। हालांकि डिप्टी सीएम के तौर पर अजित पवार का नाम फाइनल हो चुका है।

'सावरकर के अपमान पर कब तक चुप रहती है शिवसेना'
इससे पहले महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सावरकर के ऊपर विवादित टिप्पणी को लेकर शिवसेना पर निशाना साधा। देवेंद्र फडणवीस ने कहा, 'इस पूरे मामले पर मैं देखना चाहता हूं कि आखिर सावरकर के अपमान पर शिवसेना कब तक चुप रहती है। कांग्रेस सेवादल की किताब में देशभक्त विनायक दामोदर सावरकर की साख पर सवाल उठाए गए हैं। ऐसी विवादित टिप्पणी वाली किताब के जरिए कांग्रेस ने अपनी घटिया मानसिकता का परिचय दिया है। अगर आज बाला साहेब ठाकरे जीवित होते तो इस किताब का विरोध करने वाल वो पहले इंसान होते। मैं उम्मीद करता हूं कि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे जल्द से जल्द इस किताब को प्रतिबंध करने का ऐलान करेंगे।












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