नवाब मलिक की बेटी नीलोफर ने लिखा दूसरा खुला खत, कहा- मैं असहाय थी और समीर वानखेड़े.....

नई दिल्ली, 9 नवंबर: महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री नवाब मलिक की बेटी नीलोफर ​​मलिक खान ने आरोप लगाया कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने उनके पति समीर खान को फंसाने के लिए झूठे सबूत गढ़े हैं। इस वजह से उन्हें और उनके बच्चों को मानसिक रूप से परेशान होना पड़ा। उन्होंने इस मामले में मीडिया पर भी सामान्य खबर को सनसनीखेज बनाने का आरोप लगाया। इसके लिए उन्होंने बकायदा एक दूसरा खुला खत लिखा है।

घर और ऑफिस से कुछ नहीं मिला

घर और ऑफिस से कुछ नहीं मिला

नीलोफर ने कहा कि हमारे घर और दफ्तर को उलटने के घंटों बाद भी एनसीबी को कुछ नहीं मिला लेकिन मीडिया इस खबर को सनसनीखेज बना रहा था। मेरे घर के बाहर कई पत्रकार रिपोर्ट कर रहे थे, उन्होंने उस दौरान 'खमीर खान के घर में प्रतिबंधित सामान', 'एनसीबी कानूनी कार्रवाई कर रहा है' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। उस दौरान उनका मन करता था कि वो चिल्लाएं कि मैं बेकसूर हूं। उस दौरान वो खुद को असहाय महसूस कर रहीं थी।

कर्मचारी ने कही बुलाने की बात

कर्मचारी ने कही बुलाने की बात

नीलोफर के मुताबिक उनके पैर में फ्रैक्चर था, एनसीबी ऑफिस की लिफ्ट 5 बजे के बाद काम नहीं करती थी। ऐसे में उनको ऊपर सीढ़ियों से जाना पड़ता था। एक दिन वो एनसीबी ऑफिस में थीं, तभी एक कर्मचारी ने कहा कि हम आपको भी एक दिन बुलाएंगे। इस पर उन्होंने कह दिया कि आप मुझे क्यों बुलाएंगे। मैं तो रोज आती हूं, पूछिए जो पूछना है। इस पर वो कर्मचारी मुस्कुराया और बोला हम आपको मीडिया के सामने बुलाएंगे।

 समीर वानखेड़े से की थी बात

समीर वानखेड़े से की थी बात

उन्होंने ओपन लेटर में आगे कहा कि समीर पहले पुलिस हिरासत में था और बाद में न्यायिक हिरासत में चला गया। फिर वो लोग अदालत गए, लेकिन एनसीबी ने ये कहकर जमानत खारिज करवाने की कोशिश की, कि जांच अभी जारी है। ऐसे में सबूतों से छेड़छाड़ हो सकती है। उन्होंने समीर वानखेड़े से खुद बात की थी और उनसे अन्य लोगों को गिरफ्तार करने को कहा, जो वास्तव में इन मामलों में शामिल थे। उनको लग रहा था कि जल्द चार्जशीट दाखिल होगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

पैसे की हुई दिक्कत

पैसे की हुई दिक्कत

उन्होंने बताया कि एनसीबी ने समीर और करण के बीच 5 लाख के लेनदेन की बात कही, जो काल्पनिक थी। इन सब वजहों से वो 8 महीनों तक सदमे में थीं। उनको उस दौरान बच्चों की फीस, ईएमआई सब कुछ देखना था, लेकिन उनके खाते फ्रीज थे। वो महीनों तक घर से बाहर नहीं जा पाईं। उनके 10 साल के बेटे ने भी ऑनलाइन खबर देखी कि उसके पिता किस केस के लिए जेल में हैं। उन्होंने एनसीबी के लोगों को ये कहते हुए सुना है कि ये मामला फर्जी है, जो दबाव की वजह से किया गया।

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