भारत में जल्द लागू होगी नेशनल मिलिट्री स्पेस पॉलिसी, इससे जानें क्या होगा लाभ?
National Military Space Policy: भारत ने नेशनल मिलिट्री स्पेस पॉलिसी पर काम शुरू कर दिया है। नेशनल मिलिट्री स्पेस पॉलिसी आगामी तीन महीने में लागू होने की उम्मीद है। इस बात का खुलासा चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने किया।
इसके साथ ही उन्होंने बताया कि देश की नेशनल मिलिट्री स्पेस पॉलिसी में भारतीय सेना की तीनों शाखाओं यानी आर्मी, एयरफोर्स और नेवी भी अपनी साझा स्पेस डॉट्रिन चंद महीनों में रिलीज कर रही है।

सके साथ ही भारत की सेना के तीनों अंग यानी आर्मी, एयरफोर्स और नौसेना भी अपनी साझा स्पेस डॉक्ट्रिन अगले कुछ महीनों में रिलीज करने जा रहे हैं। 'डेफस्पेस' वार्षिक कार्यक्रम में स्पेस वारफेयर से जुड़ी ये अहम जानकारी चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने किया। उन्होंने इस मौके पर भविष्य के युद्धों का भी जिक्र किया।
यह सहयोग अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी प्रगति का लाभ उठाते हुए रक्षा क्षेत्र की क्षमताओं को बढ़ाने के लिए तैयार है। सैन्य उद्देश्यों के लिए अंतरिक्ष का उपयोग करने की दिशा में बड़े बदलाव का प्रतीक पॉलिसी को तीन महीने के भीतर अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है।
नेशनल मिलिट्री स्पेस पॉलिसी से किसे होगा लाभ?
नेशनल मिलिट्री स्पेस पॉलिसी तैयारी हो जाने के बाद सेना और इसरो एक ही प्लेटफॉर्म पर आ जाएंगे जिससे भारतीय सेना को लाभ होगा। सेना अपने विकास में आसानीसे इसरो की मदद ले सकेगा।
क्या है उद्देश्य
'डिफस्पेस' वार्षिक कार्यक्रम के दौरान चौहान ने सेना, वायु सेना और नौसेना द्वारा आगामी संयुक्त अंतरिक्ष सिद्धांत के बारे में बात की। उन्होंने बताया उद्देश्य अंतरिक्ष युद्ध की चुनौतियों का समाधान करना है, जिसमें उपग्रह संचार जामिंग और मिसाइल-आधारित उपग्रह विनाश शामिल हैं।
रक्षा विशेषज्ञ लंबे समय से भविष्य के युद्ध के मैदान के रूप में अंतरिक्ष पर ध्यान केंद्रित करने की वकालत करते रहे हैं। एंटी-सैटेलाइट (A-SAT) मिसाइलों का विकास और CDS के तहत रक्षा अंतरिक्ष एजेंसी (DSA) का गठन इस क्षेत्र में भारत की तैयारियों का संकेत है। ये प्रयास यह सुनिश्चित करने के लिए किए गए हैं कि भारत सैन्य प्रौद्योगिकी के मामले में सबसे आगे रहे, और अंतरिक्ष युद्ध के तेजी से आगे बढ़ते क्षेत्र में खतरों का मुकाबला करने के लिए तैयार रहे।
इसके अलावा, अंतरिक्ष युद्ध की तैयारियों में स्टार्टअप्स की भागीदारी रक्षा रणनीतियों के लिए एक अभिनव का परिणाम है। इसरो और उभरती हुई तकनीकी कंपनियों के साथ सहयोग करके, भारतीय सेना अपनी अंतरिक्ष क्षमताओं को मजबूत करने का लक्ष्य रखती है। यह पिछले नवंबर में आयोजित रक्षा अंतरिक्ष एजेंसी के तीन दिवसीय अंतरिक्ष अभ्यास, 'अंतरिक्ष-अभियान' में स्पष्ट था, जिसका उद्देश्य भारतीय उपग्रहों की सुरक्षा और रणनीतिक अंतरिक्ष युद्ध की तत्परता को बढ़ाना था।
अंतरिक्ष युद्ध क्षमताओं को मिलेगी मजबूती
एकीकृत सैन्य अंतरिक्ष नीति लागू हो जाने सेअंतरिक्ष से संबंधित कार्यों में विभिन्न रक्षा एजेंसियों और शाखाओं की भूमिका और जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया जाएगा। स्टार्टअप्स के योगदान से समर्थित सेना, वायु सेना, नौसेना और इसरो के बीच समन्वय एक अंतरिक्ष युद्ध रणनीति स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह सहयोग न केवल आक्रामक और रक्षात्मक क्षमताओं को बढ़ाने के बारे में ही नहीं है, बल्कि भारत की अंतरिक्ष संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के बारे में भी है।












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