National Herald केस: 2010 में 5 लाख और अब 800 करोड़ रुपए की संपत्ति! सोनिया-राहुल घेरे में क्यों ? जानिए
नई दिल्ली, 2 जून: नेशनल हेराल्ड मामले में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के परिवार की मुश्किलें बढ़ी हुई हैं। दरअसल, प्रवर्तन निदेशालय ने जो अबतक इस मामले की पड़ताल की है, वह किसी मामूली सी कंपनी की प्रॉपर्टी में कल्पना से भी ज्यादा इजाफा का मामला है और शायद इसी वजह से सोनिया और राहुल गांधी की उलझनें बढ़ गई हैं और उन्हें अब ईडी अधिकारियों के सामने पेश होकर खुद को बेदाग साबित करना होगा। सोनिया को इस मामले में 8 जून को पेश होना है, जबकि राहुल को आज की तारीख दी गई थी, लेकिन विदेश में रहने की वजह से उन्होंने थोड़ी मोहलत मांगी है। लेकिन, जो खटकने वाली बात है वह ये कि गांधी परिवार की स्वामित्व वाली एक कंपनी की संपति सिर्फ एक दशक में 5 लाख रुपये से बढ़कर 800 करोड़ रुपये की कैसे हो गई ?

बड़े शहरों की प्राइम लोकेशन पर हैं नेशनल हेराल्ड की संपत्ति
कांग्रेस पार्टी के मुखपत्र नेशनल हेराल्ड अखबार की मूल कंपनी एसोसिटेड जर्नल लिमिटेड (एजेएल) 2008 तक लगभग बंद होने लगी थी। तब इसके मालिक यानी कांग्रेस पार्टी ने तय किया दिल्ली, मुंबई, पंचकूला, लखनऊ और पटना के प्रमुख स्थानों पर मौजूद इसकी प्रॉपर्टी से कमाई का दूसरा विकल्प तलाशा जाए। कंपनी ने अखबार छापना भी बंद करने का भी फैसला कर लिया। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस पार्टी ने इन शहरों के प्राइम लोकेशनों पर मौजूद इसकी प्रॉपर्टी उस समय औने-पौने दामों में खरीदी थी, जब संबंधित राज्यों में उसकी सरकारें हुआ करती थीं। हालांकि, इसका मकसद पार्टी के अखबारों का प्रकाश करना था।
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गांधी परिवार की स्वामित्व वाली कंपनी है यंग इंडियन
2010 के नवंबर में सोनिया गांधी, ऑस्कर फर्नांडीज और गांधी परिवार के कुछ और करीबी मित्रों ने एक नई कंपनी यंग इंडियन बनाई। जब यह कंपनी अस्तित्व में आई तो इसके पास सिर्फ 5 लाख रुपए की पूंजी थी। कुछ ही समय बाद कथित रूप से इसने कोलकाता-स्थित एक शेल कंपनी से 1 करोड़ रुपए की लोन लिया, ताकि यह कांग्रेस पार्टी के साथ एजेएल और उसकी सभी संपत्तियों के अधिग्रहण के लिए लेन-देन कर सके। आज की तारीख में सोनिया गांधी, उनके बेटे राहुल गांधी और बेटी प्रियंका गांधी यंग इंडियन कंपनी के सबसे बड़े शेयरहोल्डर है।

2010 में 5 लाख और अब 800 करोड़ रुपए की संपत्ति!
प्रवर्तन निदेशालय की शुरुआती जांच के हिसाब से सोनिया गांधी और उनके दोनों बच्चों की स्वामित्व वाली कंपनी यंग इंडियन जो 2010 में महज 5 लाख रुपये से शुरू हुई थी, उसके पास आज देशभर में 800 करोड़ रुपये की संपत्ति है। जबकि, वह उसका कोई बहुत बड़ा वित्तीय कारोबार भी नजर नहीं आता है। सिर्फ 12 साल में कंपनी का इतना चमत्कारिक ग्रोथ ईडी के जांच के दायरे में है। राजधानी दिल्ली में आईटीओ के पास बहादुर शाह जफर मार्ग पर स्थित इसकी प्राइम प्रॉपर्टी हेराल्ड हाउस में एक पासपोर्ट ऑफिस काम कर रहा है। पंचकूला में जो प्रॉपर्टी एजेएल को आवंटित की गई थी और जिसे ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में अटैच किया हुआ है, उसकी अनुमानित कीमत 65 करोड़ रुपये (बाजार भाव इससे भी ज्यादा हो सकता है) बताई जाती है।

कंपनी बनने से पहले मिल चुकी थी आयकर से छूट!
आयकर विभाग ने भी यंग इंडियन के द्वारा एसोसिटेड जर्नल लिमिटेड (एजेएल) की खरीद को दिल्ली हाई कोर्ट (2017 की असेस्मेंट रिपोर्ट के आधार पर ) में चुनौती दी थी। हाई कोर्ट ने आयकर विभाग के आरोपों की पुष्टि की थी और उसे सोनिया और राहुल गांधी के आईटी रिटर्न खोलने की इजाजत भी दी थी, जिनके पास यंग इंडियन का अधिकांश शेयर है। दरअसल, यंग इंडियन को सेक्शन 25 के तहत एक चैरिटेबल संस्था बनाई गई थी, जिसे टैक्स से छूट दी गई थी। गांधी परिवार की कंपनी ने आयकर विभाग में इस छूट के लिए 29 मार्च, 2011 को (साल 2010-11 से लागू होने के लिए) आवेदन दिया था, जब केंद्र में कांग्रेस की अगुवाई वाली सरकार थी और 9 मई, 2011 को बिना किसी दिक्कत के इसे मंजूरी भी दे दी गई। इसका मतलब ये हुआ कि जब कंपनी अस्तित्व में आई भी नहीं थी और इसके लिए आवेदन दिया भी नहीं दिया था, तभी से उसे टैक्स में छूट मिल चुकी थी।

दिल्ली हाई कोर्ट से लग चुका है झटका
यंग इंडियन अपनी (नेशनल हेराल्ड वाली ) बेशकीमती संपत्तियों पर नियंत्रण के लिए संघर्ष कर रही है, जिसमें दिल्ली का हेराल्ड हाउस भी शामिल है। इसकी अनुमानित कीमत सैकड़ों करोड़ में है। आवास और शहरी विकास मंत्रालय ने इसकी लीज इस इस आधार पर रद्द कर दिया था कि अखबार छापने की जगह यह इसका इस्तेमाल वित्तीय फायदे के लिए कर रही है, जो लीज के नियमों का उल्लंघन है। गांधी परिवार ने इस आदेश के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसे खारिज किया जा चुका है। पंचकूला की प्रॉपर्टी भी पहले ही ईडी जब्त कर चुकी है। सोनिया और राहुल गांधी को प्रवर्तन निदेशालय अधिकारियों के सामने कंपनी की इन्हीं 'कामयाबियों' के बारे में बताना है।












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