आखिरकार सरकार ने वापस लिया एनक्रिप्शन पॉलिसी का ड्रॉफ्ट
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने विवाद बढ़ता देख मंगलवार को आखिरकार नेशनल एनक्रिप्शन पॉलिसी का ड्रॉफ्ट वापस ले लिया है। केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने जानकारी दी कि सरकार सोशल मीडिया पर लोगों की आजादी का समर्थन करती है। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार अब इस नीति को नए ढंग से तय करेगी।

सरकार ने यह फैसला चारो ओर इस ड्रॉफ्ट के बाद हो रही आलोचनाओं की वजह से लिया है। कई विशेषज्ञों ने इस ड्रॉफ्ट पर सवाल उठाते हुए पूछा था कि सरकार को अचानक इस तरह की नीति की जरूरत क्यों पड़ गई।
सरकार ने विवाद बढ़ता देख सफाई भी पेश की थी कि सरकार का सोशल मीडिया साइट्स और नेट बैकिंग को इससे दूर रखने का इरादा है।
इस पॉलिसी के आने के कुछ ही घंटों बाद सरकार की ओर से बयान आया कि सरकार ने सोशल मीडिया को इससे बाहर रखा है। लेकिन इसके साथ ही लोग सवाल करने लगे कि जब सोशल मीडिया दायरे से बाहर होगा तो फिर सरकार को इस नीति की जरूरत ही क्यों पड़ी।
सरकार की ओर से रुख स्पष्ट करते हुए कहा गया है कि सरकार ने इस पर जनता से सुझाव मांगे थे। सरकार ने साफ कहा कि इनक्रिप्शन पॉलिसी में व्हाट्सएप, फेसबुक और सोशल मीडिया को शामिल नहीं किया गया है। जबकि पहले यह कहा जा रहा था कि ऑनलाइन चैट के मैसेजेज को 90 दिनों से पहले डिलीट करना गैरकानूनी होगा।
विशेषज्ञों की मानें तो कई कंपनियों को भी सरकार के साथ एग्रीमेंट में शामिल होना पड़ता और यहां पर सरकार के लिए मुश्किलें पैदा हो सकती थीं। कई कंपनियां विदेशों में है और वह सरकार के साथ ऐसा कोई भी एग्रीमेंट साइन करने से बचतीं जिनमें उनके यूजर्स की निजता को नुकसान पहुंचता।












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