'जावेद अख्तर, शबाना आजमी और नसीरुद्दीन शाह टुकड़े-टुकड़े गैंग के स्लीपर सेल', MP के गृह मंत्री का विवादित बयान
मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने फिल्मी सितारों पर विवादित टिप्पणी की है। मिश्रा ने जावेद अख्तर, शबानी आजमी और नसीरुद्दीन शाह को स्लीपर सेल करार दिया। narottam mishra tukde tukde gang sleeper cell shabana azmi
भोपाल, 03 सितंबर : मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा अपने उग्र बयानों को लेकर अक्सर सुर्खियों में रहते हैं। ताजा घटनाक्रम में उन्होंने जावेद अख्तर और शबाना आजमी के साथ-साथ नसीरुद्दीन शाह को टुकड़े-टुकड़े गैंग का स्लीपर सेल करार दिया। उन्होंने कहा, भाजपा शासित राज्यों में जब भी कुछ होता है तो नसीरुद्दीन शाह डर जाते हैं लेकिन राजस्थान या झारखंड में जो हुआ उस पर उन्होंने कुछ नहीं कहा।
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स्लीपर सेल के सदस्य हैं !
गौरतलब है कि अभिनेत्री शबाना आज़मी बिलकिस बानो बलात्कार मामले के 11 दोषियों की रिहाई की बात करते हुए एक टेलीविज़न साक्षात्कार के दौरान रो पड़ीं। इस पर मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा, शबाना आज़मी, जावेद अख्तर और नसीरुद्दीन शाह टुकड़े-टुकड़े गिरोह के स्लीपर सेल हैं।
ऐसे लोगों की कलई खुल चुकी है
बकौल गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा, जावेद अख्तर, शबाना आजमी और नसीरुद्दीन शाह ने राजस्थान में कन्हैया लाल के सिर काटने पर कुछ नहीं कहा। मिश्रा ने सवाल किया, झारखंड में, हमारी बेटी को आग लगा दी गई, लेकिन क्या उन्होंने कुछ कहा ? गृह मंत्री मिश्रा ने कहा, केवल जब भाजपा शासित राज्यों में कुछ होता है, तो वे बयान जारी करते हैं। मिश्रा ने एक वीडियो ट्वीट में लिखा, ऐसे लोगों की कलई खुल चुकी है।
धर्मनिरपेक्ष होने का दावा कैसे ?
उन्होंने कहा, "भाजपा शासित राज्यों में जब कुछ होता है तो नसरुद्दीन शाह इस देश में रहने से डरते हैं। फिर यह पुरस्कार-वापसी गिरोह है जो सक्रिय हो जाएगा और चिल्लाएगा।" उन्होंने सवाल किया, वे धर्मनिरपेक्ष होने का दावा कैसे कर सकते हैं ? अब सब लोग इन व्यक्तियों की सच्चाई जानते हैं।
क्या बोलीं शबाना आजमी
गौरतलब है कि एक साक्षात्कार के दौरान शबाना आज़मी रो पड़ीं। उन्होंने कहा कि उसके पास 15 अगस्त को सामूहिक बलात्कार के दोषियों की रिहाई के बाद की चुप्पी के लिए कोई शब्द नहीं है। शबाना ने कई तीखे सवाल भी दागे। उन्होंने पूछा, क्या हमें छतों से चिल्लाना नहीं चाहिए ताकि इस व्यक्ति के साथ न्याय हो सके ? और जो महिलाएं इस देश में असुरक्षित महसूस कर रही हैं, जिन महिलाओं को हर रोज बलात्कार की धमकी का सामना करना पड़ता है- क्या उन्हें सुरक्षा का कुछ एहसास नहीं होना चाहिए ? मैं अपने बच्चों, अपने पोते-पोतियों को क्या जवाब दूं? मैं बिलकिस से क्या कह सकती हूं ? मुझे शर्म आती है।
क्या है कैदियों की रिहाई का मामला
बता दें कि गुजरात सरकार ने 1992 की नीति के आधार पर बिलकिस बानो गैंगरेप और कई लोगों की हत्या के दोषियों की रिहाई से देश भर में आक्रोश का माहौल है। यह मुद्दा सुप्रीम कोर्ट तक जा पहुंचा है। देश की सबसे बड़ी अदालत ने दोषियों की रिहाई पर गुजरात सरकार से जवाब मांगा है।












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