क्यों खास है तिरुवल्लूवर की प्रतिमा, जिससे कुछ दूर ही पीएम मोदी करेंगे ध्यान

लोकसभा चुनाव के आखिरी चरण के मतदान से ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कन्याकुमारी ध्यान करने के लिए पहुंच गए हैं। प्रधानमंत्री कन्याकुमारी में विवेकानंद रॉक मेमोरियल के पास ध्यान करेंगे।

इसके लिए तैयारियां जोरशोर पर चल रही है। प्रधानमंत्री की सुरक्षा को देखते हुए यहां की निगरानी के लिए तकरीबन 2000 पुलिसकर्मियों को और सुरक्षा एजेंसियों को तैनात किया जाएगा।

pm modi

प्रधानमंत्री मोदी आज शाम से 1 जून तक यहां पर ध्यान करेंगे। पीएम के दो दिनों के ध्यान को देखते हुए यहां समुद्र तट पर किसी को भी जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। गुरुवार और शनिवार को समुद्र तट पर्यटकों के लिए बंद रहेगा।

यहां किसी भी प्राइवेट नाव को आने की अनुमति नहीं होगी। पीएम मोदी का हेलीकॉप्टर यहां पहुंचेगा, जिसका ट्रायल पहले ही किया जा चुका है।

पीएम मोदी का ध्यान कार्यक्रम

पीएम मोदी एमआई-17 हेलीकॉप्टर से कन्याकुमारी जाएंगे और यहां पहुंचने के बाद शाम तकरीबन 4.35 बजे वह सूर्यास्त को देखेंगे और फिर ध्यान में बैठ जाएंगे। वह 1 जून को दोपहर 3.30 बजे कन्याकुमारी से वापस आएंगे।

एक बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है कि पीएम मोदी ने ध्यान के लिए कन्याकुमारी के विवेकानंद रॉक को ही क्यों चुना। माना जाता है कि स्वामी विवेकानंद को भी यहां पर दिव्य दर्शन प्राप्त हुआ था।

स्वामी विवेकानंद ने भी यहीं किया था ध्यान

जिस चट्टान पर पीएम मोदी ध्यान करेंगे उसका विवेकानंद जी के जीवन में काफी गहरा असर है। इस जगह को सारनाथ जितना ही अहम माना जाता है। स्वामी विवेकानंद ने देशभर में घूमने के बाद यहां पहुंचे और तीन दिन तक उन्होंने यहां पर ध्यान किया था, इसके बाद स्वामी विवेकानंद ने विकसित भारत का सपना देखा था।

तिरुवल्लूवर की प्रतिमा का महत्व

जिस जगह पर पीएम मोदी ध्यान लगाएंगे वहां पास में ही तिरुवल्लूवर की भी प्रतिमा है। तिरुवल्लूवर महान तमिल कविऔर दार्शनिक थे, उन्हीं की श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए इस प्रतिमा को यहां लगाया गया है।

तिरुवल्लूवर को उनकी महान साहित्यिक कृति थिरुक्कुरल के लिए याद किया जाता है। पूर्व मुख्यमंत्री करुणानिधि की सरकार ने यहां पर इस प्रतिमा की स्थापना करवाई थी।

10 वर्ष में प्रतिमा का निर्माण

तिरुवल्लूवर की प्रतिमा का निर्माण 1990 में शुरू हुआ और 2000 में पूरा हुआ। 1 जनवरी 2000 को इस प्रतिमा का अनावरण शहस्त्राब्दी की शुरुआत के तौर पर किया गया। इस प्रतिमा को 133 फीट की ऊंचाई पर स्थापित किया गया है, जोकि थिरुक्कुरल के 133 अध्याय का प्रतीक है। तमिलनाडु में इस प्रतिमा का विशेष महत्व है।

सांस्कृतिक विरासत की पहचान

तमिल अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को बनाए रखने और उसे संरक्षित रखना चाहते हैं, यही वजह है कि थिरुक्कुरल धर्मों से परे उन्हें एक खास पहचान देती है, यह प्रतिमा उसी सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। यह मूर्ति ज्ञान के प्रतीक के तौर पर काम करती है।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+