नरेंद्र मोदी से डरकर अफगानिस्तान में छिप गया डॉन दाऊद!

संभावना जताई गई है कि यह सभी सदस्य दाऊद के साथ पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर ही कहीं चले गए हैं जहां पर तालिबान का प्रभुत्व स्थापित है। अभी तक पूरी की पूरी डी कंपनी पाक की आर्थिक राजधानी कराची में ही मौजूद था।
गौरतलब है कि अपने चुनावी अभियान के समय नरेंद्र मोदी की ओर से एक इंटरव्यू दिया गया था। इस इंटरव्यू में मोदी ने कहा था कि वह अगर सत्ता में आते हैं तो दाऊद को पाकिस्तान से भारत हरहाल में लाकर रहेंगे।
अब केंद्र में मोदी और बीजेपी की सरकार बनने जा रही है और इंटेलीजेंस की मानें तो इस बात से दाऊद काफी घबरा गया है। इसी घबराहट में वह कहीं चला गया है।
दाऊद को तो यहां तक डर है कि कहीं नरेंद्र मोदी किसी कमांडो-टाइप ऑपरेशन में उसका खात्मा न कर दें क्योंकि मोदी अपने एक इंटरव्यू में दाऊद के खिलाफ ओसामा बिन लादेन के जैसे ऑपरेशन का समर्थन कर चुके हैं।
दाऊद जहां कहीं भी है आईएसआई उसकी सिक्योरिटी में हर पल मुस्तैद है और उसने सुरक्षा पहरा और कड़ा कर दिया है। इंटलीजेंस ब्यूरों के एक वरिष्ठ अधिकारी की ओर से बताया गया है कि मोदी के सत्ता में आने के बाद से ही दाऊद का डर दोगुना हो गया है।
ऐसा भी माना जा रहा है कि नरेंद्र मोदी अजित डोवाल जिन्हें आतंकियों के खिलाफ बेहतरीन ऑपरेशंस के लिए जाना जाता है, दाऊद का खत्म करने के लिए डोवाल को एक अहम पद दे सकते हैं। डोवाल फिलहाल नई दिल्ली स्थित विवेकानंद सेंटर के साथ जुड़े हुए हैं।
बीजेपी अक्सर पाकिस्तान को लेकर अपने कड़े रुख को सबसे सामने पेश कर चुकी है। इतना ही नहीं बीजेपी के वरिष्ठ नेता नितिन गडकरी भी इस बात को साफ कर चुके हैं कि बीजेपी और केंद्र की नई सरकार आतंकवाद के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाएगी।
सुशील कुमार शिंदे जो अक्सर ही दाऊद को भारत लाने की बात कह चुके हैं और उन्होंने तो यहां तक दावा किया था कि उनकी सरकार इसके लिए एफबीआई के साथ बातचीत भी कर रही थी लेकिन उस समय केंद्रीय गृह सचिव आरके सिंह उनके इस दावे को खारिज कर चुके हैं।
आरके सिंह आरा से बीजेपी के नए सांसद हैं और वह भी अक्सर दाऊद के खिलाफ सख्त कार्रवाई के हिमायती रहे हैं। माना जा रहा है कि वह भी मोदी सरकार के साथ मिलकर उनके 'मिशन दाऊद' में उनकी मदद कर सकते हैं।












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