मुसलमानों को गटर में छोड़ने वाली बात, आरिफ मोहम्मद खान से इस कांग्रेसी मंत्री ने कही थी
नई दिल्ली- मंगलवार को लोकसभा में कांग्रेस पर मुस्लिमों को उनकी दयनीय हालात से आगे नहीं बढ़ने देने का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़ा हमला बोला था। उन्होंने एक कांग्रेस नेता का हवाला देते हुए कहा था कि कांग्रेस सोचती है कि मुसलमानों को आगे बढ़ाना उसकी ड्यूटी नहीं है। लेकिन, तब ये साफ नहीं हुआ था कि मोदी जिस नेता के बारे में कह रहे थे, वे नेता कौन थे? अब ये बात साफ हो गया है कि शाह बानो केस में सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलटने से नाराज होकर राजीव गांधी सरकार से इस्तीफा देने वाले तत्कालीन मंत्री आरिफ मोहम्मद खान से ये बात राजीव के ही एक दूसरे मंत्री पीवी नरसिम्हा राव ने कही थी।

मोदी ने लोकसभा में ये कहा था
मंगलवार को प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस पर ट्रिपल तलाक पर साथ देकर इतिहास में की गई बड़ी गलतियों को सुधारने का तंज कसा था। इस दौरान मोदी ने राजीव गांधी के कार्यकाल के विवादित शाह बानो केस का जिक्र छेड़ा, जिसमें राजीव सरकार ने मुल्ला-मौलवियों को खुश करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलट दिया था। मोदी ने कहा कि तब एक कांग्रेसी मंत्री ने मुसलमानों के बारे में कहा था कि, उनका विकास कांग्रेस की जिम्मेदारी नहीं है और "अगर वे गटर में ही पड़े रहना चाहते हैं, तो उन्हें गटर में ही छोड़ दो।" लेकिन प्रधानमंत्री ने उस नेता का नाम नहीं लिया था।

खान ने मोदी की टिप्पणी पर क्या कहा?
शाह बानो केस में राजीव गांधी के फैसले से नाराज होकर 1986 में मंत्री पद छोड़ने वाले आरिफ मोहम्मद खान ने प्रधानमंत्री मोदी के बयान की तस्दीक की है। उन्होंने कहा है कि "मैं समझता हूं कि उन्होंने (मोदी) जो कहा है वह सही है, क्योंकि इससे उन सारी कार्रवाइयों के पीछे के मकसद का खुलासा होता है, जो मूलरूप से समाज को बांटने के लिए था।"

नरसिम्हा राव ने की थी 'गटर' वाली बात- खान
अब आरिफ मोहम्मद खान ने उन सारी परिस्थितियों के बारे में बताया है, जिसके चलते उन्हें शाह बानो केस पर राजीव सरकार के बदले रवैये के चलते अपना पद छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा था। उन्होंने बताया कि उनसे इस्तीफे पर फिर से विचार करने के लिए किस तरह से कई नेता कह रहे थे। इसके लिए उन्होंने अरुण सिंह, अरुण नेहरू, माखनलाल फोतेदार जैसे वरिष्ठ मंत्रियों का जिक्र किया है। उनके मुताबिक बाद में नरसिम्हा राव भी उन्हें मनाने के लिए सामने आए। राव ने पहले उन्हें ये समझाया कि, 'आप इतने युवा, ऊर्जावान, बहुत अच्छे वक्ता हैं, आपके सामने पूरा करियर पड़ा है, आप ऐसे इस्तीफा कैसे दे सकते हैं?' राव ने उन्हें शाह बानो का भी हवाला दिया कि उसने भी अपना रवैया बदल लिया है। खान ने बताया कि ये सही है कि मौलवियों के दबाव में शाह बानो ने भी अपना रुख बदल लिया था। तब खान ने राव से कहा कि वह शाह बानो की नहीं, अपनी व्यक्तिगत ईमानदारी की लड़ाई लड़ रहे हैं। खा के मुताबिक पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कहने पर उन्होंने 55 मिनट तक संसद में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का बचाव किया था। तब सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटने वाले बिल का वो समर्थन कैसे कर सकते थे। तब नरसिम्हा राव ने खान से कहा था, "समझने की कोशिश कीजिए। हमारी पार्टी समाज सुधारकों की पार्टी नहीं है। अगर मुसलमान गटर में ही पड़े रहना चाहते हैं, तो उन्हें गटर में ही रहने दीजिए। आप क्यों इस्तीफा देंगे?" लेकिन, खान नहीं झुके और इसके चलते उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया था।












Click it and Unblock the Notifications