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PM Mudra Yojana के 10 बेमिसाल साल! स्वरोजगार से सशक्तिकरण तक, कैसे बदली मुद्रा योजना ने किस्मत?

Mudra Yojana: जब बात छोटे कारोबारियों, महिलाओं और वंचित वर्गों के सपनों को उड़ान देने की हो, तो प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) का नाम सबसे पहले लिया जाता है। 2015 में शुरू हुई यह योजना महज एक वित्तीय स्कीम नहीं, बल्कि एक क्रांति बन गई है।

एक समय था जब बैंकों से लोन पाना आम लोगों के लिए मुश्किल सपना था। बड़े-बड़े कारोबारियों को फोन कॉल पर लोन मिल जाते थे, जबकि छोटे दुकानदार, महिला उद्यमी और ग्रामीण युवा दस्तावेजों और जमानत की उलझनों में फंसे रहते थे। लेकिन मुद्रा योजना ने इस तस्वीर को बदल डाला।

PM Mudra Yojana

आज, गांव-गांव और गली-गली में नए कारोबारी उभर रहे हैं, महिलाएं अपने पैरों पर खड़ी हो रही हैं और युवाओं में स्वरोज़गार का आत्मविश्वास बढ़ा है। यह योजना केवल पैसा देने की बात नहीं करती, यह आत्मनिर्भर भारत की नींव को मजबूत कर रही है। आइए जानते हैं कैसे एक योजना ने करोड़ों जिंदगियों को नई दिशा दी।
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पुराने दौर में 'फोन बैंकिंग' का था बोलबाला

यूपीए सरकार के समय में बैंकिंग व्यवस्था में बड़े उद्योगपतियों को प्राथमिकता दी जाती थी। आम आदमी और छोटे कारोबारियों को लोन पाने में दिक्कत होती थी। राजनीतिक दबाव के चलते बिना सोचे-समझे लोन दिए जाते थे, जिससे एनपीए बढ़ते गए और जरूरतमंद लोग पीछे रह गए।

मुद्रा योजना: सभी को बराबरी का मौका

मुद्रा योजना ने इस व्यवस्था को बदला। बिना गारंटी के छोटे लोन देकर इस योजना ने छोटे और नए उद्यमियों को आगे बढ़ने का रास्ता दिया। अब तक इस योजना के तहत 52 करोड़ से ज्यादा लोन दिए जा चुके हैं, जिनकी कुल राशि 32.61 लाख करोड़ रुपये है।

गांव-गांव तक पहुंचा कारोबार

मुद्रा लोन की मदद से अब छोटे शहरों और गांवों में भी लोग खुद का व्यवसाय शुरू कर रहे हैं। लोग नौकरी मांगने वाले नहीं, नौकरी देने वाले बन रहे हैं। शिशु, किशोर, तरुण और अब तरुण प्लस जैसे विभिन्न श्रेणियों के तहत लोगों को उनकी जरूरत के अनुसार लोन मिल रहा है।

महिलाओं और वंचित वर्गों को मिला फायदा

करीब 70% मुद्रा लोन महिलाओं को दिए गए हैं। इसके अलावा, 50% से ज्यादा लोन एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के लोगों को मिले हैं। इससे इन वर्गों के आर्थिक और सामाजिक स्थिति में बड़ा सुधार देखने को मिला है।

रोजगार और आत्मनिर्भरता को मिला बढ़ावा

एक रिपोर्ट के अनुसार मुद्रा योजना ने हर साल औसतन 2.52 करोड़ लोगों को रोजगार दिया है। इसके अलावा, स्किल डेवलपमेंट, डिजिटल लेन-देन, और कारोबार का विस्तार भी इसमें शामिल है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मिली सराहना

आईएमएफ ने कई बार मुद्रा योजना की तारीफ की है, खासतौर से महिलाओं को वित्तीय सहायता देने और एमएसएमई सेक्टर को मजबूत बनाने के लिए। 2024 में IMF ने कहा कि यह योजना स्वरोज़गार और औपचारिक व्यापार को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभा रही है।

SBI रिपोर्ट में भी मिली सराहना

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की ताज़ा रिपोर्ट बताती है कि मुद्रा योजना की वजह से छोटे कारोबारियों को बड़ा समर्थन मिला है। औसत लोन राशि FY16 के 38,000 रुपये से बढ़कर FY25 में 1.02 लाख रुपये तक पहुंच गई है।

पर्यटन क्षेत्र में भी खुल रहे नए मौके

बजट 2025 में सरकार ने मुद्रा योजना के तहत होमस्टे बिजनेस के लिए भी लोन की घोषणा की है, जिससे पर्यटन से जुड़े छोटे कारोबारों को बढ़ावा मिलेगा।
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