मध्य प्रदेश में मिलकर लड़ते कांग्रेस और सपा, तो क्या हार जाती BJP? आ गई पक्की रिपोर्ट

SP Performance in MP election: 2024 के लोकसभा चुनाव से ठीक 6 महीने पहले हिंदी पट्टी के तीन प्रमुख राज्यों में हार ने कांग्रेस को एक बड़ा झटका दिया है। कांग्रेस को मध्य प्रदेश की सत्ता में लौटने की उम्मीद थी, लेकिन ना केवल उसकी ये उम्मीद टूटी, बल्कि छत्तीसगढ़ और राजस्थान भी उसके हाथ से चले गए।

ऐसे में कांग्रेस अब विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' में अपनों के निशाने पर आ गई है। पहले जेडीयू, फिर समाजवादी पार्टी और इसके बाद टीएमसी ने भी कांग्रेस को अपना अहंकार छोड़ने की सलाह दे डाली है। लेकिन, इस बीच मध्य प्रदेश चुनाव परिणाम से समाजवादी पार्टी को लेकर एक दिलचस्प तथ्य समाने आया है।

SP Performance in MP election

यहां पहले आपको बता दें कि समाजवादी ने मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में 71 सीटों पर अपने अलग प्रत्याशी उतारे थे। समाजवादी पार्टी का कहना था कि वो कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ना चाहती थी, लेकिन जब उनकी बात नहीं सुनी गई तो मजबूरन उन्हें अकेले ही मैदान में उतरना पड़ा। रविवार को आए चुनाव नतीजों के बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने बिना कांग्रेस का नाम लिए कहा कि अब अहंकार छोड़ देना चाहिए। ऐसे में एक बड़ा सवाल उठता है कि अगर मध्य प्रदेश में कांग्रेस ने सपा के साथ गठबंधन किया होता, तो उसे कितना फायदा होता?

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य प्रदेश की जिन 71 सीटों पर समाजवादी पार्टी ने अपने उम्मीदवार खड़े किए, उनमें से 55 सीटों पर भाजपा ने जीत हासिल की है। 15 सीटों पर कांग्रेस के उम्मीदवार जीते, जबकि एक सीट भारत आदिवासी पार्टी के खाते में गई, जिसका गठन हाल-फिलहाल में ही हुआ था। मतलब, 71 सीटों में से एक भी सीट समाजवादी पार्टी नहीं जीत पाई। इन 71 सीटों पर समाजवादी पार्टी को महज 0.46 फीसदी कुल वोट शेयर मिला, जो एक फीसदी से भी कम है।

सपा-कांग्रेस का गठबंधन कितनी और सीटें जीत जाता?
अब बात उस सवाल की करते हैं, जो सबके मन में उठ रहा है कि सपा-कांग्रेस मिलते, तो क्या होता? इन 71 सीटों पर अलग-अलग दलों को मिले वोटों पर माथापच्ची करें तो पता चलता है कि समाजवादी पार्टी का प्रदर्शन बेहद खराब रहा और वो कांग्रेस के वोट बैंक में भी कोई खास कटौती नहीं कर पाई। भाजपा ने इन 71 सीटों में से जो 55 सीटें जीती, उनमें केवल 5 सीट ऐसी हैं, जहां कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के प्रत्याशियों को मिले वोटों को अगर जोड़ दें, तो वो भाजपा से ज्यादा बैठते हैं।

70 सीटों पर जब्त हुई सपा की जमानत
समाजवादी पार्टी को केवल 16 सीटों पर एक फीसदी से ज्यादा वोट शेयर मिला, जबकि 7 सीटें ऐसी थीं, जहां उसे 5 फीसदी से ज्यादा वोट शेयर मिला। अगर एक निवाड़ी विधानसभा सीट को छोड़ दें, समाजवादी पार्टी का कोई भी उम्मीदवार अपनी जमानत नहीं बचा पाया। मतलब साफ है कि अगर सपा-कांग्रेस मिलकर लड़ते तो भी प्रदेश की 230 में से 163 सीटों पर जीत हासिल करने वाली भाजपा पर कोई खास असर नहीं पड़ता।

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