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'तुम काले हो,मेरे लायक नहीं',पत्नी ने प्रेमी संग रची पति की हत्या की स्क्रिप्ट, कौन है MP की प्रियंका पुरोहित?

MP Dhar Husband Death Priyanka Purohit: मध्य प्रदेश के धार से सामने आई यह कहानी किसी क्राइम थ्रिलर फिल्म की स्क्रिप्ट जैसी लगती है, लेकिन हकीकत इससे कहीं ज्यादा खौफनाक है। यह कहानी है उस 'बेवफा' पत्नी की, जिसने सात फेरों के बंधन को सिर्फ इसलिए लहूलुहान कर दिया क्योंकि उसे अपने पति का रंग पसंद नहीं था। जिसे पुलिस शुरुआत में एक साधारण लूट और हत्या का मामला समझ रही थी, उसकी परतें जब खुलीं तो पीछे छिपा था नफरत, धोखे और ठंडे दिमाग से बुना गया एक खौफनाक 'मर्डर प्लान'। एक पत्नी, उसका प्रेमी और एक सुपारी किलर-तीनों ने मिलकर हत्या कांड को अंजाम दिया।

MP Dhar Husband Death Priyanka Purohit

शादी में दरार से शुरू हुई खतरनाक कहानी

इस पूरे हत्याकांड की नींव बरसों पहले उस नफरत से पड़ गई थी, जो प्रियंका पुरोहित के मन में अपने पति देवकृष्ण के लिए थी। 28 वर्षीय देवकृष्ण एक मसाला कारोबारी थे, लेकिन प्रियंका की नजरों में उनकी सबसे बड़ी कमी उनका 'रंग' था।

देवकृष्ण पुरोहित की जिंदगी बाहर से सामान्य दिखती थी, लेकिन घर के अंदर रिश्तों में गहरी दरार थी। परिवार के मुताबिक उनकी पत्नी प्रियंका पुरोहित अक्सर उन्हें अपमानित करती थी।

देवकृष्ण की बहन ज्योति ने बताया कि प्रियंका अक्सर कहती थी, "तुम काले हो, मुझे डिजर्व नहीं करते... मुझे इससे बेहतर चाहिए।" यह सिर्फ ताने नहीं थे, बल्कि एक गहरे असंतोष और अलग जिंदगी की चाह का संकेत थे। धीरे-धीरे यह घरेलू कलह एक खतरनाक मोड़ लेने लगी। प्रियंका देवकृष्ण से दूरी बनाने के लिए घर के काम नहीं करती थी, अपनी सास से उन्हें अलग रखती थी और घंटों फोन पर किसी और से बातें करती रहती थी।

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बाल विवाह और एक अधूरा रिश्ता, कौन है प्रियंका पुरोहित?

प्रियंका पुरोहित धार जिले के एक आम परिवार की लड़की है। जिसकी उम्र 21 साल है। 15 साल की उम्र में प्रियंका पुरोहित का बाल विवाह हुआ था।

धार के एसपी मयंक अवस्थी के मुताबिक, देवकृष्ण और प्रियंका की शादी साल 2015 में हुई थी। उस वक्त दोनों की उम्र महज 15 साल थी। बाल विवाह होने के कारण दोनों बालिग होने तक अपने-अपने परिवारों के साथ अलग रहे।

21 साल की उम्र पूरी होने पर जब प्रियंका को देवकृष्ण के साथ रहने के लिए भेजा गया, तो वह इसके लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं थी। दरअसल, 2017 में ही उसकी जिंदगी में कमलेश पुरोहित नाम के शख्स की एंट्री हो चुकी थी। प्रियंका का दिल कमलेश के लिए धड़कता था और देवकृष्ण उसे अपनी राह का कांटा नजर आने लगा था। यही रिश्ता आगे चलकर इस पूरे हत्याकांड की जड़ बना।

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1 लाख की सुपारी और 'खूनी' डील

प्रियंका और उसके प्रेमी कमलेश ने तय कर लिया था कि देवकृष्ण को रास्ते से हटाना ही होगा। इसके लिए कमलेश ने अपने दोस्त और पेशेवर अपराधी सुरेंद्र भाटी को इस साजिश में शामिल किया। देवकृष्ण की जान की कीमत लगाई गई 1 लाख रुपये। डील पक्की हुई और 50 हजार रुपये एडवांस के तौर पर शूटर को दे दिए गए। 31 मार्च को यह डील फाइनल हुई थी।

हैरानी की बात यह है कि हत्या की पहली तारीख 4 अप्रैल 2026 तय की गई थी, लेकिन उस दिन सुरेंद्र नहीं आया। इस पर प्रियंका और कमलेश ने उससे पैसे वापस तक मांग लिए थे। आखिरकार 7 अप्रैल की रात वह खूनी मंजर तय हुआ, जिसने पूरे इलाके को दहला दिया।

लूट की 'फेक' कहानी और कत्ल की रात

7 अप्रैल की रात, जब देवकृष्ण गहरी नींद में सो रहे थे, प्रियंका ने घर का दरवाजा जानबूझकर खुला छोड़ दिया। शूटर सुरेंद्र घर में दाखिल हुआ और सोते हुए देवकृष्ण पर धारदार हथियार से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। देवकृष्ण की मौके पर ही मौत हो गई।

वारदात को अंजाम देने के बाद, इसे 'लूट' का रंग देने के लिए पूरे कमरे के सामान को बिखेर दिया गया। प्रियंका ने खुद को भी एक कमरे में बंधक बनवा लिया ताकि पुलिस को लगे कि लुटेरों ने उसे भी नहीं बख्शा। उसने शोर मचाया और पुलिस को बताया कि बदमाशों ने 3.5 लाख के गहने और नकदी लूट ली और विरोध करने पर उसके पति को मार डाला।

पुलिस ने कैसे किया पूरा केस का खुलासा?

धार पुलिस को शुरुआत से ही प्रियंका की बातों पर शक था। एक अनुभवी पुलिसकर्मी की नजर से देखें तो प्रियंका के बयानों में काफी विरोधाभास था। वह बार-बार अपनी कहानी बदल रही थी। पुलिस ने जब वैज्ञानिक साक्ष्यों और डॉग स्क्वायड की मदद ली, तो मामला उलझने लगा। घर की तलाशी ली गई तो वे गहने बरामद हो गए जिन्हें प्रियंका ने लूटा हुआ बताया था।

इसके बाद साइबर सेल ने मोबाइल डेटा खंगाला। प्रियंका के फोन कॉल्स की डिटेल्स ने पूरी सच्चाई उगल दी। हत्या के वक्त और उससे पहले प्रियंका और कमलेश के बीच हुई बातचीत ने पुलिस को पुख्ता सबूत दे दिए। जब पुलिस ने प्रियंका से कड़ाई से पूछताछ की, तो उसका बनाया हुआ झूठ का किला ढह गया और उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया।

न्याय की गुहार और अधूरा इंसाफ

महज 36 घंटों के भीतर धार पुलिस ने प्रियंका और उसके प्रेमी कमलेश को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। हालांकि, मुख्य शूटर सुरेंद्र भाटी, जो पहले भी चार साल जेल काट चुका है, अब भी फरार है। पुलिस की टीमें उसकी तलाश में जगह-जगह दबिश दे रही हैं।

इधर, देवकृष्ण की मां खियांची बाई और बहन ज्योति का रो-रोकर बुरा हाल है। मां की एक ही मांग है- "मेरे बेटे के हत्यारों को फांसी की सजा मिले।" यह मामला समाज को सोचने पर मजबूर करता है कि कैसे एक गलत धारणा और अवैध संबंध एक हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ सकते हैं। प्रियंका की नफरत और धोखे ने न केवल एक बेगुनाह की जान ली, बल्कि खुद को भी उम्रभर के अंधेरे में धकेल दिया।

एक रिश्ते का खौफनाक अंत

पुलिस का मानना है कि यह हत्या अचानक नहीं हुई, बल्कि वर्षों से चल रहे तनाव, अपमान और अवैध संबंधों का नतीजा थी। एक ऐसा रिश्ता, जो बचपन में मजबूरी में बना, लेकिन समय के साथ नफरत और साजिश में बदल गया। फिलहाल पुलिस फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार कर रही है, जिससे यह साफ हो सके कि हत्या से पहले किसी तरह का नशा दिया गया था या नहीं। वहीं फरार आरोपी सुरेंद्र की गिरफ्तारी के बाद इस केस के और भी पहलू सामने आने की उम्मीद है।

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