'जेल में पड़ी लाठियां, रीढ़ की हड्डी में गैप, टूटे दांत...', सांसद चंद्रशेखर आजाद ने याद किए संघर्ष के दिन
सांसद व आजाद समाज पार्टी अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद रावण ने इस बार लोकसभा चुनाव में नगीना सीट जीत एक बड़ी जीत थी। उन्होंने बीजेपी कैंडिडेट को एक लाख 51 हजार 473 मतों से पछाड़ा था। सांसद बनने के बाद उन्होंने अपने संघर्ष के दिन याद किए।
चंद्रशेखर आजाद बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के विचारों को प्राथमिता देते हैं। उन्होंने आजाद समाज पार्टी के उद्देश्य भी अंबेडकर की ही विचारधारा के आधार पर तय किए हैं। जिसके लिए वे छात्र जीवन से ही संघर्ष कर रहे हैं। इस इंटरव्यू में आजाद ने उस दौर को याद किया जब जेल के अंदर भी उनके साथ कथित रूप से भेदभाव पूर्ण व्यवहार किया गया।

राजनीति में चंद्रशेखर आजाद रावण अब एक नया दलित चेहरा माने जा रहे हैं। उन्होंने छात्र जीवन से ही सार्वजनिक जीवन की शुरुआत कर दी थी। संविधान की सुरक्षा और दलितों की हक की लड़ाई के लिए उन्होंने सड़कों पर विरोध से लेकर जेल की यातना तक सही। इस बार लोकसभा चुनाव में नगीना से जीतकर जब वे संसद भवन पहुंचे तो अब जमीनी मुद्दों पर सरकार का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश में जुटे हैं।
संसद के लोक सभा सत्र में निर्दलीय सांसद चंद्रशेखर आजाद रावण ने अपने संबोधन के दौरान कई बड़ी मांगें उठाईं। उन्होंने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार से दलितों, मुस्लिमों के हक और उनकी सामाजिक सुरक्षा के साथ-साथ चमार रेजिमेंट को फिर से बहाल करने की मांग की। उन्होंने अग्निवीर योजना खत्म करने की आवश्यकता बताई।
सांसद ने पिछड़े और दलित वर्ष के उत्थान के लिए संघर्ष जारी रखने की बात कही। उन्होंने दावा किया कि उनके संगठन (आजाद समाज पार्टी) से जुड़े लोग और उनके समर्थकों को चंद्रशेखर आजाद से बड़ी उम्मीदे हैं। उन्होंने कहा कि आजादी के 70 साल बाद ही जब महिलाओं के साथ अत्याचार, मुछें रखने, घोड़े पर चढ़ने पर अत्याचार की घटनाएं सामने आती हैं...तो ऐसा लगता है कि जैसे लोगों को कभी इंसान माना ही नहीं गया।
अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए चंद्रशेखर आजाद ने उस वक्त का जिक्र किया जब उनके ऊपर एनएसए एक्ट के तहत कार्रवाई हुई और उन्हें जेल भेजा गया। एक सवाल के जवाब में आजाद समाज पार्टी सांसद ने कहा, "...जेल में खूब मार पड़ी, मेरे दांत तोड़ दिए गए। जितनी हड्डियां नहीं उससे ज्यादा मुझे लाठियां पड़ी।"












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