डेंगू से मर गया मासूम तो मकान मालिक ने मां को बॉडी के साथ घर में नहीं घुसने दिया

हैदराबाद में महिला को अपने 10 साल के बेटे के साथ सड़क पर गुजारनी पड़ी रात, डेगूं की वजह से हुई थी मासूम की मौत, मकान मालिक ने घर के भीतर शव लाने से किया इनकार, पड़ोसियों ने की मदद

हैदराबाद। मानवीय संवेदनाओं ने उस वक्त बीच सड़क पर दम तोड़ दिया जब हैदराबाद में महिला को उसके बेटे के शव के साथ जबरदस्ती रात गुजारनी पड़ी। हाई-टेक सिटी कहे जाने वाले हैदराबाद में जब महिला का 10 वर्ष का बेटा मृत हो गया तो जिस जगह महिला रहती थी वहां के मकान मालिक ने महिला को उसके बेटे का शव घर के भीतर लाने से मना कर दिया, जिसके चलते महिला को रातभर अपने बेटे के शव और छोटे बेटे के साथ सड़क पर रहना पड़ा।

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 डेंगू की वजह से हुई थी मृत्यु

डेंगू की वजह से हुई थी मृत्यु

अपने 10 साल के मासूम बेटे को खोने के गम से महिला पहले ही जूझ रही थी, ऐसे में जिस तरह से महिला के मकान मालिक ने तमाम मानवीय संवेदनाओं को ताक पर रखते हुए उसे घर के भीतर नहीं आने दिया उसने महिला की पीड़ा को और बढ़ा दिया। यह घटना हैदराबाद के वेंकटेश्वर नगर की है जोकि कुकटपल्ली इलाके में है। महिला का नाम इश्वरअम्मा है, उनके बेटे की डेंगू की वजह से निलोफर अस्पताल में बुधवार की शाम को मृत्यु हो गई थी।

पड़ोसियों ने दिखाई मानवता

पड़ोसियों ने दिखाई मानवता

महिला की इस स्थिति को देखने के बाद यहां के पड़ोसियों ने अपने भीतर की मानवता को जिंदा रखा और महिला के लिए तिरपाल और शव रखने के बॉक्स का इंतजाम किया। यही नहीं लोगों ने महिला के बेटे के अंतिम संस्कार के लिए पैसे भी इकट्ठा किए, जिसके बाद गुरुवार को महिला के बेटे का अंतिम संस्कार किया गया। आपको बता दें कि जब बुधवार की रात महिला को बाहर सड़क पर रहने के लिए मजबूर किया गया तो यहां भारी बारिश हो रही थी।

घर अपवित्र ना हो इसलिए आने नहीं दिया भीतर

घर अपवित्र ना हो इसलिए आने नहीं दिया भीतर

बच्चों के अधिकार के लिए काम करने वाले एक्टिविस्ट जगदीश गुप्ता इस मुद्दे को लोगों के सामने लाए। उन्होंने बताया कि महिला को भारी बारिश के बीच अपने मृत बेटे के शव के साथ रात सड़क पर गुजारने के लिए मजबूर किया गया। मकान मालिक ने इश्वरअम्मा को उनके बेटे सुरेश का शव घर के भीतर लाने की इजाजत नहीं दी, उनका कहना है कि ऐसा करने से हमारा घर अपवित्र हो जाएगा। मकान मालिक का कहना था कि हाल ही में उनकी बेटी का विवाह हुआ है, लिहाजा हम घर के भीतर शव लाने की इजाजत नहीं दे सकते हैं, क्योंकि यह अपशकुन है।

मानवाधिकार का हनन

मानवाधिकार का हनन


आपको बता दें कि इश्वरअम्मा महबूबनगर जिले की रहने वाली हैं और वह यहां पिछले चार सालों से किराए के मकान में रह रही थीं, उनके दो बेटे थे। चाइल्ड राइट एक्टिविस्ट व बलाला हक्कुला संघ के अध्यक्ष अच्युत राव का कहना है कि यह बच्चों के अधिकार और मानवाधिकार का गंभीर हनन है, हम इसके लिए मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाएंगे। हम मकान मालिक के इस अमानवीय व्यवहार की आलोचना करते हैं और उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग करते हैं।

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