Morbi Bridge: 140 साल पुराना मच्छु नदी का ब्रिज, 7 महीने बाद खुला तो ले डूबा कई जिंदगियां, मच गई चीख पुकार
मोरबी ब्रिज के रिनोवेशन पर अब सवाल खड़े हो रहे हैं। रविवार को पुल पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। वे अपने परिवारों के साथ ब्रिज पर सैर करने और तस्वीरें लेने पहुंचे थे। भीड़ में बड़े, बूढ़े, बच्चे और महिलाएं सब शामिल थीं
Morbi Bridge: गुजरात के मच्छु नदी का मोरबी ब्रिज रविवार को लोगों के लिए मौत का सैलाब ले आया। मोरबी पुल हादसे में अब तक 132 लोगों की मौत हो गई है। इस ब्रिज का निर्माण 19 वीं सदी में तत्कालीन मोरबी शासक राजा वाघजी रावाजी ठाकोर ने करवाया था। राजा नदी को पार करने के लिए इसी पुल का प्रयोग करते थे। तब से आज तक ये पुल संरक्षित रहा। सरकारें देखरेख और मरम्मत पर करोड़ों खर्च करती रहीं। लेकिन जब ये ब्रिज नदी में डूबा तो कई जिंदगियां डुबो गया। आइए जानते हैं रविवार को उस दर्दनाक हादसे से पहले और बाद का क्या मंजर था?

1887 के आसपास हुआ निर्माण
1.25 मीटर चौड़ा और 200 मीटर लंबा मोरबी ब्रिज गुजरात के दरबार गढ़ पैलेस और लखधीरजी इंजीनियरिंग कॉलेज को जोड़ता है। इस पुल का इतिहास 140 साल पुराना है। इसका मोरबी शासक राजा वाघजी रावाजी ठाकोर ने 1887 के आसपास ने मच्छु नदी को पार करने के लिए करवाया था। इस पुल के निर्माण में उस वक्त की सर्वश्रेष्ठ तकनीकी का इस्तेमाल कर सस्पेंशन ब्रिज के रुप में इसे तैयार किया गया। यह ब्रिज मोरबी के लोगों के एक प्रमुख टूरिस्ट स्पॉट था। पुल का निर्माण जब किया गया तो उसमें यूरोप की उस वक्त की सबसे आधुनिक तकनीकी इस्तेमाल की गई थी।

5 दिन पहले खुला था ब्रिज
मरम्मत के चलते मोरबी पुल पिछले 7 महीने से बंद था। 2 करोड़ रुपये खर्च कर इसे फिर से फिर से लोगों के चलने के तैयार किया गया था। दीपावली पर्व पर इसे खोला गया। इसको लेकर मोरबी और आसपास के लोग इस पुल होकर सैर करने को काफी उत्सुक थे। यही वजह है कि रविवार को छुट्टी के दिन पुल पर काफी भीड़ एकत्र हो गई। जिसके बाद पुल नदी में डूब गया। जिस वक्त हादसा हुआ पुल पर करीब 500 लोद मौजूद थे।

177 लोगों का किया गया रेस्क्यू
महज पांच दिन पहले ही मरम्मत पूरी होने के बाद इस ब्रिज को आमजन के लिए खोला गया था। बताया जा रहा है कि बड़ी संख्या में पुल पर एक साथ लोग पहुंच गए। एक रिपोर्ट के मुताबिक जिस वक्त हादसा हुआ पुल पर पांच सौ के करीब लोग मौजूद थे। हादसे के दौरान नदी में गिरे लोगों को बचान के लिए रेक्यू ऑपरेशन अभी भी जारी है। हादसे में घायल हुए 177 से अधिक लोगों का रेस्क्यू किया जा चुका है। जिन्हें मोरबी सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं 132 लोगों के मौत की पुष्टि की गई है। ये आंकड़ा अभी बढ़ सकता है।

हादसे वक्त दर्दनाक मंजर
मोरबी ब्रिज के रिनोवेशन पर अब सवाल खड़े हो रहे हैं। रविवार को पुल पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। वे अपने परिवारों के साथ ब्रिज पर सैर करने और तस्वीरें लेने पहुंचे थे। भीड़ में बड़े, बूढ़े, बच्चे और महिलाएं सब शामिल थीं। पुल के नीचे की ओर जाते ही अफरा-तफरी मच गई। जिन लोगों को तैरना आता वो तो बाहर निकल आए। जबकि बड़ी संख्या में लोग पुल में फंस गए। कफी लोग नदी में डूब गए। हादसे कि वक्त मंजर ऐसा था कि मुच्छ नदी के आसपास सिर्फ चीख पुकारें ही सुनाई दे रही थीं। लोग अपनों के मौत के मुंह जाते देख भी कुछ नहीं कर पा रहे थे।

NDRF, नेवी, एयरफोर्स की टीमें रेस्क्यू में जुटी
गुजरात के गृह मंत्री हर्ष संघवी के अनुसार, घटना में 68 लोगों की मौत हुई है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल स्थिति की निगरानी खुद कर रहे हैं। सभी सरकारी एजेंसियां की मदद ली जा रही है। NDRF, नेवी, एयरफोर्स की टीमें घटना स्थल पर हैं। गृहमंत्री ने कहा कि हादसे के कारणों की गंभीरता से जांच की जाएगी।
Recommended Video


गुजरात सरकार ने गठित की एसआईटी
पुल गिरने के कारणों की जांच के लिए गुजरात सरकार ने एसआईटी गठित कर दी है। विशेष जांज दल में 5 वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया गया है। दल में म्युनिसिपल एडमिनिस्ट्रेशन कमिश्नर IAS राजकुमार बेनीवाल, R&B के चीफ इंजीनियर के.एम पटेल, HoD के स्ट्रकचरल इंजीनियर डॉ गोपाल टैंक, R&B के सचिव संदीप वसावा और आईजी CID सुभाष त्रिवेदी का नाम शामिल है।












Click it and Unblock the Notifications