Morbi: पुल हादसे ने फिर हरे कर दिए 43 साल पुराने जख्म, पीएम मोदी ने पीवी सिंधू को सुनाई थी आंखो-देखी

morbi, गुजरात के मोरबी में मच्छु नदी पर बने एक पुल टूटने से सैकड़ों लोगों की जान चली चली गयी। 43 साल पहले भी इसी शहर में इसी नदी में एक भयंकर त्रासदी घटित हुई थी। जिसमें हजारों लोगों की जान चली गयी और लाखों लोग बेघर हो गए। राजकोट ज़िले में जसदण के समीप पहाड़ों से निकलने वाली मच्छु नदी 130 किलोमीटर बहकर मालिया के समीप कच्छ के रण में समाप्त हो जाती है। इस दौरान वे मोरबी से भी होकर गुजरती है जहाँ 1959 और 1972 में दो बांध बनाये गए थे। इन दोनों बांधों को क्रमशः मच्छू 1 और मच्छू 2 नाम दिया गया था। राजकोट से 20 मील दूर बने मच्छु बाँध की नींव स्वाधीन भारत के पहले गवर्नर जनरल सी राजगोपालाचारी ने 23 अक्टूबर 1948 को रखी थी। यह सौराष्ट्र की प्रमुख सिचाईं योजनायों में से एक था जिसका उद्देश्य बाँध के निर्मित होनेपर आसपास के लगभग 74 एकड़ एरिया को सिंचित करना था। मगर 11 अगस्त 1979 को मच्छू 2 बाँध टूट गया जिससे लगभग 1400 लोगों की जान चली गयी। बाँध के टूटने के चलते आसपास के 30 गाँवों सहित 100 किलोमीटर के एरिया को सीधे प्रभावित किया। एक अनुमान के मुताबिक इस त्रासदी से 65 करोड़ की सम्पति को नुकसान पहुंचा था। उस समय चौधरी चरण सिंह देश के प्रधानमंत्री थे और गुजरात में जनता पार्टी के बाबुभाई पटेल मुख्यमंत्री थे। विश्व के इतिहास में इस बाँध के टूटने को अपने आप में सबसे दुखद घटना का दर्जा दिया गया है। मोरवी शहर का सरकारी अस्पताल जिसमें 100 से अधिक मरीज भर्ती थे, वह सभी अस्पताल के डॉक्टर्स और अन्य स्टाफ सहित डूब गए। आजतक उनकी कोई खबर नहीं मिली है।

घटना कैसे हुई

घटना कैसे हुई

मोरवी में अगस्त 1979 में लगातार कई दिनों से बहुत तेज बारिश हो रही थी, जिसके चलते बाँध में पानी का स्तर उसकी क्षमता से अधिक हो गया था। इस बढ़ते जलस्तर को कम करने के लिए बांध के गेट खोलने एकदम जरुरी हो गया था। एतिहात के तौर पर और जानमाल की हानि को कम करने के लिए मोरवी और उसके आसपास रहने वाले परिवारों को 11 अगस्त 1979 को सायरन बजाकर सूचित किया गया।मगर यह सूचना बहुत देरी से दी गयी। दरअसल, जब बाँध में पानी का स्तर बढ़ने लगा तो मोरवी म्युन्सिपल प्रेसिडेंट, तालुका मामलातदार और डिप्टी इंजिनियर ने मिलकर मोरवी निवासियों को शहर खाली करने की चेतावनी, बाँध के दरवाजे खोलने से मात्र छह घंटे पहले सायरन बजा कर दी थी। चूँकि उस दौरान बहुत तेजी से बारिश हो रही थी और शहर खली करने के लिए प्रशासन की तरफ से कोई साधन भी उपलब्ध नहीं करवाए गए थे।यही नहीं, बाँध अधिकारीयों को भी इस बात का बिलकुल अंदाजा नहीं लगा सके कि एकबार पानी छोड़ने पर उसका स्तर कितना रहेगा। गौरतलब है कि पानी छोड़ने पर 20 फीट की उंचाई तक पहुँच गया। उधर पानी का बहाव और मात्रा इतनी अधिक थी कि बांध भी उसे सहन करने में नाकामयाब रहा और वह टूट गया।

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    गलती किसकी थी?

    गलती किसकी थी?

    बांध के टूटने में बांध के गलत डिजायन को भी कसूरवार बताया गया था। साथ ही, स्थानीय प्रशासन ने समय रहते मोरवी और उसके आसपास के लोगों को सूचित करने के कोई ठोस कदम नहीं उठाये गए।राज्य सरकार ने घटना की जांच के लिए एक जुडिसियल कमीशन भी गठित किया था। जिसमें गुजरात हाईकोर्ट के जस्टिस बीके मेहता सहित सेंट्रल वाटर कमीशन के पूर्व चेयरमैन वाईके मूर्ति और आईआईएम (अहमदाबाद) के पूर्व निदेशक रवि मथाई शामिल थे। बाद में, 22 सितम्बर 1986 को कमीशन ने अपनी रिपोर्ट पेश की तो इस कमीशन में सिर्फ वाईके मूर्ति ही बचे थे। उन्होंने अपनी इस रिपोर्ट में को बताया गया कि बाँध के डिजायन और रखरखाव में कोई कमी नहीं थी। लगातार बारिश और बाढ़ से पानी का स्तर बढ़ने के चलते बाँध टूट गया था।

    प्रधानमंत्री मोदी ने की सहायता

    प्रधानमंत्री मोदी ने की सहायता

    पीएम नरेंद्र मोदी ने भी कई बार इस घटना को याद किया और बताया कि उस वक्त उन्होंने स्वयंसेवक के तौर पर घटना में लोगों की निस्वार्थ सेवा की थी। पीएम मोदी ने बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधू को इस घटना के बारे में बताया था।पीएम मोदी ने बताया था कि उस वक्त उन्होंने लोगों को हिम्मत देने के लिए एक भावुक पत्र लिखा और इसे घर-घर जाकर बांटा था। तब गुजरात सरकार की तरफ से राहत कार्य का जिम्मा संभालने वाले अधिकारियों ने लोगों का मनोबल बढ़ाने के लिए नरेंद्र मोदी की तारीफ की थी।

    तत्कालीन मुख्यमंत्री शरद पवार ने भी भेजी थी मदद

    तत्कालीन मुख्यमंत्री शरद पवार ने भी भेजी थी मदद

    पीएम मोदी के अलावा, महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री शरद पवार ने भी गुजरात के मुख्यमंत्री बाबुभाई पटेल को 50 लाख रूपये की सहायता राशि प्रदान की थी। यह राशि सिटिजन फ्लड रिलीफ कमिटी की तरफ से एकत्रित कर शरद पवार के माध्यम से गुजरात के मुख्यमंत्री को सौंपी गयी थी। इस सहायता राशि के अलावा दवाई कंपनियों ने मुफ्त दवाइयां, टेक्सटाइल मिलों के मालिकों ने भी करोड़ों रूपये की सहायता राशि उपलब्ध करवाई थी। जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने दयाशील समिति के माध्यम से चंदा और कपड़े एकत्रित कर जरुरतमंदों में बांटे थे। संजीवनी ट्रस्ट, बॉम्बे टेक्सी यूनियन, हेंडीक्राफ्ट एंड हैण्डलूम्स एक्सपोर्ट चैम्बर ने भी सहायता राशि एकत्रित कर बाढ़ पीड़ितों में बांटी थी।

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