Monsoon Forecast 2025: कैसा रहेगा मानसून? किस इलाकों में होगी झमाझम बारिश, क्या कहते हैं पूर्वानुमान?
Monsoon Forecast 2025: निजी मौसम पूर्वानुमान एजेंसी स्काईमेट वेदर ने देश के करोड़ों किसानों और नीति निर्माताओं को राहत पहुंचाने वाली एक अहम जानकारी दी है। एजेंसी ने मंगलवार 8 अप्रैल को कहा कि इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून के सामान्य रहने की उम्मीद है।
एजेंसी के अनुसार, 2025 का दक्षिण-पश्चिम मानसून दीर्घ अवधि औसत (LPA) के 103 प्रतिशत के साथ 'सामान्य' रहने की उम्मीद है। यह पूर्वानुमान 5 प्रतिशत की मॉडल त्रुटि के साथ जारी किया गया है। स्काईमेट के अनुसार, जून-सितंबर मानसून महीनों के लिए एलपीए 868.6 मिलीमीटर है। एलपीए के 96 और 104 के बीच बारिश को 'सामान्य' माना जाता है।

Monsoon Forecast 2025: क्या है LPA?
LPA यानी दीर्घ अवधि औसत, मौसम विज्ञान में एक मानक है जिससे मानसून की तुलना की जाती है। जून से सितंबर के मानसून महीनों के लिए भारत का एलपीए 868.6 मिलीमीटर है। अगर वर्षा एलपीए के 96% से 104% के बीच होती है, तो उसे 'सामान्य मानसून' माना जाता है।
स्काईमेट के प्रबंध निदेशक जतिन सिंह ने कहा कि इस वर्ष न तो अल-नीनो का प्रभाव रहेगा और न ही कोई प्रतिकूल वैश्विक मौसमीय गड़बड़ी। इसके बजाय, मौसम प्रणाली ENSO (एल-नीनो दक्षिणी दोलन) की 'तटस्थ' स्थिति में रहने की संभावना है, जो मानसून को बेहतर बना सकती है।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि पॉजिटिव IOD (इंडियन ओशियन डिपोल) मानसून को और मजबूती देगा। ऐतिहासिक रूप से, ENSO-तटस्थ और पॉजिटिव IOD की युगलबंदी अच्छे मानसून की संभावना बढ़ाती है। स्काईमेट को उम्मीद है कि मानसून का दूसरा भाग, यानी अगस्त-सितंबर, पहले हिस्से की तुलना में बेहतर रहेगा।
Monsoon Forecast 2025: देश के इन हिस्सों में स्थिति कैसी रहेगी?
स्काईमेट ने बताया कि इस साल भारत के पश्चिमी और दक्षिणी भाग में मानसून की अच्छी स्थिति देखने को मिलेगी। तटीय क्षेत्रों में भी अधिक बारिश होने की संभावना है।
- पश्चिमी और दक्षिण भारत में अच्छा मानसून देखने को मिलेगा।
- महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश जैसे वर्षा आधारित क्षेत्रों में पर्याप्त बारिश की संभावना है।
- पश्चिमी घाट, केरल, तटीय कर्नाटक और गोवा में अधिक वर्षा होने की संभावना जताई गई है।
- हालांकि, पूर्वोत्तर भारत और उत्तर भारत के पहाड़ी इलाके इस बार सामान्य से कम बारिश का सामना कर सकते हैं।
स्काईमेट द्वारा वर्षा की संभावनाएं इस प्रकार अनुमानित की गई हैं:
- 'सामान्य' मानसून की संभावना - 40%
- 'सामान्य से अधिक' - 30%
- 'अधिक' - 10%
- 'सामान्य से कम' - 15%
- 'सूखा' - केवल 5%
Monsoon Forecast 2025: किसानों के लिए राहत
जुलाई और अगस्त मानसून सीजन के सबसे महत्वपूर्ण महीने माने जाते हैं क्योंकि ये भारत की कृषि प्रणाली के लिए सबसे अधिक उपयोगी वर्षा प्रदान करते हैं। राज्य द्वारा संचालित भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) भी इस महीने के मध्य तक अपना पहला आधिकारिक पूर्वानुमान जारी करेगा।
अगर यह अनुमान वास्तविक पूर्वानुमान से मेल खाती है, तो इसका मतलब देश के कृषि क्षेत्र के लिए अच्छी खबर होगी। इससे सरकार को वित्त वर्ष 26 में खाद्य मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। वर्षा आधारित सिंचाई वाले राज्यों के लिए यह मानसून जीवनरेखा साबित हो सकता है। ऐसे में स्काईमेट का यह शुरुआती पूर्वानुमान देश भर में मानसून पर नजर बनाए रखने वालों के लिए एक दिशा-सूचक की तरह काम करेगा।












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