दो अक्टूबर को खुद झाड़ू उठाएंगे नरेंद्र मोदी
बेंगलोर। नरेंद्र मोदी बेंगलोर में पहुंचे। लोगों को सफाई से लेकर देश की समृद्धि और मूल समस्याओं के समाधान के लिए कई सुझाव और अपनी आगामी योजनाओं के बारे में बताया। इस दौरान उन्होंने क्या कहा पढ़िए वन इंडिया की अपडेटः

- भारत सरकार के जितने भी मंत्रालय हैं उनमेें सफाई का अभियान रखा।
- कानूनों का जंगल बनाया गया है उसको भी साफ किया जाएगा। ढेर सारे कानून को खत्म किया जाएगा।
- पहले सरकारों को आनंद आता था कि इतने कानून बना दिए, मैने तो ठान लिया है कि इतने ज्यादा कानूनों को खत्म किया जाएगा। फालतू कानूनों को खत्म किया जाएगा। इससे शासन में रुकावट पैदा होती है। डेढ़ सौ साल पुराना कानून काम नहीं आएगा।
- जब बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया तो कहा गया बैंक का पैसा गरीबों के लिए काम आना चाहिए। इसलिए ही किया गया राष्ट्रीयकरण। बीस चालीस साल बीत गए लेकिन यह बैंक गरीबों के काम नहीं आया।
- गरीब तो साहूकार के घर जाता, अपनी पूंजी गिरवी रखता है। पत्नी का मंगलसूत्र भी। ब्याज के चक्कर में ऐसा फंसता कि कभी वह दबाव से नहीं उभर पाता।
- किसान कर्ज लेता तो दबाव से आत्महत्या कर रहे हैं। फिर यह खजाना यह बैंक क्या अमीरों के लिए है।
- क्या बैंक बड़े-बड़े उद्योगों के लिए है। नहीं। गरीबों के लिए है। इसलिए हमने जनधन योजना बनाई।
- इतने कम समय में बैंक के खाते खुलने का अभियान चलाया चार करोड़ से अधिक परिवारों को काम में जोड़ दिया। अब उनको साहूकार के पास नहीं जाना पड़ता।
- पंद्रह सौ करोड़ रुपए अभी तक खाते खोलने में लोगों ने जमा करवाए। एक खाते पर एक लाख रुपए का बीमा दिया गया।
- देश मेें इतनी कम्पनियां चलती हैं क्या गरीब को दुर्घटना बीमा मिलना नहीं चाहिए। इसलिए हमने गरीब को एक लाख रुपए का दुर्घटना (अचानक हुई मौत पर) बीमा मिल गया।
- बेटी की शादी के लिए पैसा एकत्र कर सकेंगे। गरीब के मां बाप के मन में रहता है कि वह पैसा जमा करे।
- निर्णय ऐसे होने चाहिएं जो गरीबों की भलाई करें।
- पेंशन में इतने कम पैसे मिलते हैं जिनको बढ़ाया जाए। अब एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं होगा जिसका पेंशन एक हजार रुपए से कम होगा। बत्तीस लाख लोगों को फायदा होगा। मैने इसके लिए अपने एमपी और मंत्रियों से कहा है कि अपने इलाकों मेें लोगों को बुलाएं और यह सुविधाएं देना शूरू करें।
- माताएं सम्मान के साथ जीवन जीएं।
- देश का किसान मेहनत करता है। देश का पेट भरता है। अन्न के भंडार भरता है।
- देश का नौजवान रोजगार चाहता है। यदि नौजवानों को रोजगार मिलेगा तो देश भी तेज गति से भारत दौड़ेगा।
- भारत के पास पैंतीस साल से कम उम्र के लोग जनसंख्या में सबसे ज्यादा है।
- स्किल पर काम किया जाएगा। हुनर होना चाहिए। हमने स्किल या कला विकास की जरूरत है। हमने इसका बीड़ा उठाया है। स्किल इंडिया का सपना पूरा करेंगे, नौजवानों के सपने पूरे करेंगे।
- कोई परिवार, उसका बेटा बेरोजगार हो उसकी परेशानी सबसे ज्यादा है।
- साफ सफाई भी होनी चाहिए। इसका भी बीड़ा हमने उठा लिया है। देश साफ-सुथरा क्यों नहीं है। अगर हम तय करें कि मैं गंदगी नहीं करूंगा तो देश साफ हो जाएगा। दुनियां ताकत ही नहीं कि देश को गंदा करे। गंदगी से देश को मुक्ति दिलाने के लिए हमे तय करना होगा।
- महात्मा गांधी ने गुलामी से मुक्ति दिलाई हम भारत मां को गंदगी से मुक्ति दिलाएंगे। सारी दुनिया माने या न माने, अब भारत बदल रहा है। इसकी शुरूआत यहीं से होगी। हमारे घर जब मेहमान आते हैं तो हम सबसे पहले सफाई करते हैं। तो मेहमान के लिए आने के लिए सफाई करते हैं तो समृद्धि के लिए देश को साफ करना पड़ेगा। इसलिए मैं देश वासियों सो भीख मांगता हूं। मैं आपके पास भीख मांगने के लिए निकला हूं। मैं भीख में देशवासियों से एक साल में सौ घंटे मांगता हूं।
- दो अक्टूबर से पूरे देश में सफाई का अभियान प्रारंभ करना है। मैं सारे देश वासियों से आग्रह करता हूं जब दिवाली आती है तो हम महीने पहले ही सफाई में लग जाते हैं। क्या आप मुझे हर साल सौ घंटे दोगे?
- मैं खुद झाड़ू उठाकर इसकी शुरुआत करुंगा।
- एक कदम स्वच्छता की ओर चलें हमारा देश दुनियां के सामने सीना तानकर खड़ा हो जाएगा। मां बहनों को सम्मान कैसे मिलेगा। बच्चियों के लिए शौचालय नहीं है।
- मैं हर छोटे से छोटा काम करूंगा मैं करूंगा। विकास करूंगा।












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