सरकारी बाबू लागू नहीं कर सके मोदी की 'नमामि गंगे' परियोजना
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'नमामि गंगे' नामक परियोजना को सरकारी बाबू उनके संसदीय क्षेत्र वाराणसी में सही तरह से लागू नहीं कर पा रहे हैं।

'नमामि गंगे' के लिए 2,037 करोड़ रुपये आवंटित किया था। पर उनके संसदीय क्षेत्र में ही यह अभियान ढीला पड़ रहा है। इस परियोजना की सफलता को लेकर मोदी बहुत गंभीर थे।
बता दें 'नमामि गंगे' परियोजना के तहत ही पंचायती राज विभाग की ओर से गंगा किनारे बसे जिलों में शौचालयों का निर्माण कराया जाना था, लेकिन इस काम को अंजाम तक पहुंचाने के लिए विभाग की रफ्तार काफी धीमी है।
पिछड़े वाराणसी-गाजीपुर
वाराणसी और गाजीपुर भी इस अभियान में पिछड़ गए हैं। इसके अलावा पांच जिलों में निर्माण कार्य अभी शुरू नहीं हो पाया है। नमामि गंगे की रफ्तार को लेकर पंचायती राज विभाग के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। बीती फरवरी के अंत तक केवल 5 प्रतिशत कार्य ही पूरा हो सका है।
गंगा किनारे बसे 25 जिलों के 109 विकास खंडों की 951 ग्राम पंचायतों की पहचान की गई थी शौचालयों के निर्माण के लिए। इनमें वर्ष 2015-16 तक चार लाख शौचालयों का निर्माण होना है, लेकिन अब तक मात्र 17 हजार शौचालयों का निर्माण ही पूरा हो सका है। केंद्र के निर्देशानुसार मार्च 2015 तक 30 प्रतिशत कार्य पूरा हो जाना चाहिए था, लेकिन हकीकत इस लक्ष्य से बहुत दूर है।
186 शौचालयों का निर्माण
वाराणसी के गांवों में प्रस्तावित 13, हजार शौचालयों में से 196 का निर्माण ही पूरा हो सका है। गाजीपुर की प्रगति भी बेहद खराब है। यहां 58,316 शौचालयों को निर्माण होना था, लेकिन 275 शौचालय ही बन सके हैं। इस बीच, पश्चिम उत्तर प्रदेश के बिजनौर, हापुड़, बुलंदशहर, मेरठ एवं मुजफ्फरनगर में एक भी शौचालय का निर्माण नहीं हुआ।












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