दिल्ली Ordinance बिल पर मोदी सरकार की बड़ी जीत! दोनों सदनों में मिलेगा YSRCP का साथ
राज्यसभा में मोदी सरकार के पास बहुमत का अभाव है। इसलिए दिल्ली सर्विस ऑर्डिनेंस की जगह लाए जाने वाले विधेयक को ऊपरी सदन की मंजूरी दिलाना सरकार के लिए चुनौती है। लेकिन, सही समय पर आंध्र प्रदेश की सत्ताधारी वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने सरकार को समर्थन देने की बात कह दी है। पार्टी अविश्वास प्रस्ताव पर भी सरकार को वोट देगी।
एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी की पार्टी ने दिल्ली अध्यादेश विधेयक ही नहीं, बल्कि विपक्षी दलों की गठबंधन की ओर से लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर भी सरकार को समर्थन देने की बात कही है। मानसून सत्र के दौरान बीजेपी की अगुवाई वाली मोदी सरकार के सामने ये दोनों ही बड़ी चुनौतियां हैं, जिससे निपटना अब उसके लिए ज्यादा आसान हो गया है।

दिल्ली अध्यादेश बिल और अविश्वास प्रस्ताव पर वाईएसआर कांग्रेस सरकार के साथ
वाईएसआर कांग्रेस पार्टी पहले भी कई महत्वपूर्ण मसलों पर सीधे या परोक्ष तौर पर संसद में मोदी सरकार का समर्थन करती रही है। राज्यसभा में उसके 9 सांसद हैं और लोकसभा में पार्टी के पास 22 एमपी हैं। गौरतलब है कि दिल्ली में नौकरशाहों की ट्रांसफर पोस्टिंग वाले मामले पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिल्ली सरकार को तरजीह दिए जाने के बाद केंद्र सरकार ने उसे बदलने के लिए लाए गए अध्यादेश की जगह राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) विधेयक लाने का फैसला किया है। इससे दिल्ली में नौकरशाहों की ट्रांसफर-पोस्टिंग के मसले पर केंद्र को अपने अध्यादेश पर संसद की मंजूरी मिल जाएगी।
हम दोनों मुद्दों पर सरकार के पक्ष में वोट करेंगे- जगन रेड्डी की पार्टी के नेता
वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के नेता वी विजयसाई ने एनडीटीवी को बताया है कि 'हम दोनों मुद्दों पर सरकार के पक्ष में वोट करेंगे।' मणिपुर संकट पर केंद्र सरकार के खिलाफ लोकसभा में दिए गए अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस पर सत्तापक्ष के समर्थन में वाईएसआरसीपी के 22 और सांसदों के जुड़ जाने से उसके पक्ष में पलड़ा एकतरफा झुक गया है। वैसे लोकसभा में पार्टी का समर्थन महज
प्रतीकात्मक ही रहेगा, क्योंकि 543 सदस्यों वाले सदन में एनडीए के पास अपने 334 सांसद हैं। वहीं 5 सीटें खाली भी हैं।
विपक्षी दल कर रहे हैं इस विधेयक का विरोध
दिल्ली की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी दिल्ली पर केंद्र सरकार के अध्यादेश को संसद से पास कराने का विरोध करने के लिए पूरा जोर लगा रही है। इसके लिए वह 26 विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन में भी शामिल हुई है। दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल केंद्र सरकार के खिलाफ समर्थन जुटाने के लिए देश के विभिन्न राज्यों में जाकर विपक्षी नेताओं से सहयोग मांग चुके हैं।
विधेयक को संसद से पास कराने का रास्ता लगभग साफ
पिछले हफ्ते बेंगलुरु में हुए विपक्षी इंडिया गठबंधन की बैठक से पहले कांग्रेस ने दिल्ली और पंजाब में एक-दूसरे के जबर्दस्त विरोधी होने के बावजूद इस मसले पर केजरीवाल की पार्टी के समर्थन का ऐलान किया था। लेकिन, अब केंद्र की मोदी सरकार ने राज्यसभा में भी जो समर्थन की बिसात बिछा दी है, उससे लगता है कि दिल्ली वाले अध्यादेश को संसद से कानूनी मान्यता दिलाने का रास्ता साफ हो चुका है।
राज्यसभा का अंकगणित
राज्यसभा में अभी सदस्यों की मौजूदा संख्या 238 है। इस तरह से बहुमत का आंकड़ा 120 होता है। सरकार के पास अपने, सहयोगी दलों, नामांकित सदस्यों और दो निर्दलीय सांसदों को मिलाकर आंकड़ा 112 तक पहुंच जाता है। जबकि, विरोधी गठबंधन के पास सिर्फ 105 सदस्य हैं। ऐसे में सिर्फ वाईएसआर कांग्रेस पार्टी का ही समर्थन बिल पास कराने के लिए काफी है। जबकि, बीजेडी के अलावा भी कई ऐसे दल हैं, जो सीधे या परोक्ष तौर पर सरकार का साथ दे सकते हैं।












Click it and Unblock the Notifications