11 लाख रेलवे कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर, 78 दिनों के वेतन के बराबर मिलेगा दिवाली बोनस
नई दिल्ली, 6 अक्टूबर: त्योहारी सीजन में रेलवे कर्मचारियों के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है, जहां बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दशहरा और दिवाली को देखते हुए उनके बोनस को मंजूरी दे दी। इसके तहत 78 दिनों के वेतन के बराबर उत्पादकता से जुड़ा बोनस अराजपत्रित रेलवे कर्मचारियों को मिलेगा। सरकार के इस फैसले से 11.56 लाख कर्मचारियों को फायदा होगा। कैबिनेट मीटिंग के बाद बुधवार को हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में अनुराग ठाकुर ने इस बारे में विस्तार से जानकारी दी।

कितना आएगा खर्च?
दरअसल एक समिति तय फॉर्मूले के हिसाब से बोनस का निर्धारण करती है। उसी के हिसाब से इस बार 78 दिनों का वेतन कर्मचारियों को बोनस के रूप में मिलना चाहिए था। बुधवार को कैबिनेट में इस पर चर्चा हुई। साथ ही उसे सर्वसम्मति से पास कर दिया गया। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कैबिनेट के फैसले के बारे में बताते हुए कहा कि उनकी सरकार रेल कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाने के लिए बोनस के रूप में 78 दिन का वेतन देने का फैसला किया है। इस बोनस पर लगभग 1,985 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

पिछले साल कितना था बोनस?
मंत्री ने कहा कि हर साल त्योहारी सीजन से पहले निर्णय की घोषणा की जाती है और इस साल भी कोई अपवाद नहीं रहा है। ये बोनस वित्तीय वर्ष 2020-21 से संबंधित है। इससे पहले 2019-20 में, भारतीय रेलवे ने अपने लगभग 11.58 लाख अराजपत्रित कर्मचारियों को 78 दिनों का बोनस दिया था। बोनस की कुल लागत ₹2,081.68 करोड़ आंकी गई थी। 2020 में रेलवे ने बोनस के भुगतान के लिए निर्धारित वेतन गणना सीमा ₹7,000 प्रति माह तय की थी। इसके बाद प्रति पात्र रेलवे कर्मचारी देय अधिकतम राशि 78 दिनों के लिए 17,951 रुपये निर्धारित की गई।

इन पर भी फैसला
वहीं अन्य फैसलों पर बात करते हुए अनुराग ठाकुर ने कहा कि पीएम मित्र योजना लॉन्च होगी, जो टेक्सटाइल और गारमेंट के क्षेत्र में बहुत बड़ा योगदान देगी। इससे लाखों लोगों को रोजगार मिलेगा। इसमें 5 वर्षों में 4445 करोड़ रुपये का व्यय होगा। 7 मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजनल एंड अपैरल(MITRA) पार्क इसपर तैयार होंगे। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल भी प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मौजूद थे। उन्होंने कहा कि आरओएससीटीएल के लिए योजना 2019 में लॉन्च हुई थी जिसे 2024 तक बढ़ा दिया गया है। इससे टेक्सटाइल क्षेत्र में निर्यात को लेकर उत्साह है। पीएम मित्र योजना से लगभग 7 लाख लोगों की सीधे तौर पर रोज़गार मिले और 14 लाख लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोज़गार मिले, ऐसी हमारी कल्पना है। 10 राज्यों ने अभी तक इस योजना के लिए दिलचस्पी दिखाई है।












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