देश में गरीबी बढ़ाएगी मोदी सरकार, जानिए कैसे?

नयी दिल्ली। देश की पिछली सरकार के दौरान यहां गरीबी की तादात तकरीबन 36.30 करोड़ थी। यानी पूरी जनसंख्या की 30 फीसदी आबादी गरीब थी, लेकिन आपको बता दें कि मोदी सरकार के आने के बाद इन आंकड़ों में बढ़ोतरी होने वाली है। जी हां देश में गरीबी की तादात बढ़ने वाली है। [भारत में 90000 रू. कमाने वाली भी माना जाएगा गरीब]

poverty

दरअसल मोदी सरकार गरीबी का पैमाना माने जाने वाले प्रति व्यक्ति दैनिक खर्च को हटाने का फैसला कर लिया है। जानकारी के मुताबिक गरीबी तय करने वाली प्रति व्यक्ति खर्च को नीति आयोग घटा सकता है। अगर ऐसा हुआ तो देश में गरीबी को तादात बढ़नी तय है।

माना जा रहा है कि ऐसा करने पर कुल आबादी में गरीबों का हिस्सा 40 पर्सेंट तक जा सकता है। गरीबों की संख्या लगभग 48.40 करोड़ तक पहुंच सकती है। नीति आयोग की 14 सदस्यीय कार्यबल इस पर काम कर रहा है। यह सब नैशनल सैंपल सर्वे ऑर्गनाइजेशन के 2011 के आंकड़ों पर आधारित है। उम्मीद की जा रही है कि आयोग जून में अपनी रिपोर्ट पीएम नरेंद्र मोदी को सौंप देगा।

गौरतलब है कि पिछली यूपीए सरकार के दौरान सुरेश तेंदुलकर कमेटी ने ग्रामीण इलाकों में 27 रुपये प्रति व्यक्ति दैनिक खर्च और शहरी क्षेत्रों में 33 रुपये प्रति व्यक्ति दैनिक खर्च की लिमिट से नीचे गुजर-बसर करने वालों को गरीब मानने की बात की थी।

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