संसद का शीत सत्र खत्म, विरोध के वावजूद कई बड़े बिल पास कराने में सफल रही सरकार

नई दिल्ली। नरेंद्र मोदी सरकार ने संसद के शीतकालीन सत्र में कई बड़े बिल पास करा लिए हैं। राज्यसभा में कम नंबर होने के बावजूद भी भाजपा किसी भी बिल को पास कराने के लिए जरूरी वोट पाने में कामियाब रही है। इस सत्र में कई मुद्दों जैसे वायु प्रदूषण, डाटा की निजता और देश की आर्थिक स्थिति पर भी चर्चा हुई है।

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भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार का सहयोगी पार्टी शिवसेना ने बेशक साथ छोड़ दिया लेकिन पार्टी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। शिवसेना महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में 50-50 फॉर्मूले पर बात नहीं बनने के बाद एनडीए से अलग हो गई थी। शिवसेना ने राज्य में सरकार बनाने के लिए राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) और कांग्रेस से हाथ मिला लिया है। हालांकि शिवसेना ने विवादास्पद नागरिकता संशोधन बिल का विरोध नहीं किया है।

सरकार इस शीत सत्र में लोकसभा में 14 तो राज्यसभा में 15 बिलों को मिली मंजूरी दिलाने में कामियाब रही है। इनमें से कई बिल लगातार चर्चा का विषय बने रहे। दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले सरकार ने अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने का सफल दांव भी चलाया। इसके अलावा संसद और विधानसभाओं में एससी-एसटी प्रतिनिधित्व आरक्षण को दस साल आगे बढ़ाने के साथ इनमें एंग्लो इंडियन कोटे को खत्म करने में भी सरकार ने सफलता पाई है।

सरकार ने एसपीजी एक्ट में संशोधन कर एसपीजी की सुरक्षा पीएम तक ही सीमित रखने में सफलता पाई। हैरानी की बात तो ये है कि उच्च सदन में बहुमत न होने और विपक्ष के विरोध के बावजूद सरकार नागरिकता संशोधन बिल और एसपीजी एक्ट संशोधन बिल को बड़े अंतर से कानून बनाने में सफल रही। नागरिकता संशोधन बिल का अधिकतर विपक्षी पार्टियों ने विरोध किया, यहां तक कि इसे राज्यसभा में पास ना कराने के भी काफी प्रयास हुए और मांग हुई कि इसे समीक्षा समिति के पास भेजा जाए। लेकिन फिर भी सरकार ने बहुमत से अधिक वोट इसके पक्ष में पा लिए।

वर्तमान सत्र में सरकार ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों की सुरक्षा), जलियांवाला बाग राष्ट्रीय स्मारक, सरोगेसी विनियमन, कॉरपोरेट कर कम करने संबंधी संशोधन, इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट प्रतिबंध, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय और नागरिकता संशोधन जैसे अहम बिलों को कानून बनाने में कामियाब हुई है। राज्यसभा का 49 वर्षों में सर्वश्रेष्ठ प्रश्नकाल रहा, जहां मौखिक रूप से 9.5 प्रश्नों के उत्तर दिए गए। साल 1972 के बाद पहली बार लोकसभा ने प्रश्नकाल के दौरान एक दिन में मंत्रियों द्वारा मौखिक रूप से सभी 20 सवालों के जवाब दिए।

इस दौरान सत्र खत्म होने पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने प्रेस कांफ्रेंस कर शुक्रवार को बताया कि लोकसभा सत्र की कार्यवाही बहुत ही सकारात्मक रही। सभी महत्वपूर्ण मुद्दों पर संसद में उपस्थित सांसदों ने प्रश्न उठाए। उन्होंने कहा कि लोकसभा की कार्यवाही तय समय से अधिक 28 घंटे और 45 मिनट तक चली है। बिड़ला ने कहा कि हम साल 2022 में नए संसद भवन का निर्माण करेंगे।

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