किन चुनौतियों से भरा रहा मोदी सरकार का पहला सप्ताह? विपक्ष के साथ-साथ अपनों ने भी बोला हमला
Modi Government 3.O: प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार का कार्यकाल शुरू हुए एक सप्ताह बीत चुका है। 9 जून की शाम को नरेंद्र मोदी ने लगातार दो कार्यकाल पूरा करने के बाद तीसरे कार्यकाल के लिए प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। 10 जून की सुबह पीएम ऑफिस पहुंच कर उन्होंने अपना कार्यभार संभाल लिया।
पीएम मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के लिए तासरे कार्यकाल का यह पहला सप्ताह काफी चुनौतियों से भरा रहा। देश से लेकर विदेश तक कई ऐसी घटनाएं हुईं जो प्रधानमंत्री मोदी और उनके नेतृत्व वाली सरकार की छवि के लिए ठीक नहीं रही।

पीएम मोदी को अपने लोगों ने किया टारगेट
नई सरकार के गठन के बाद बीजेपी मातृ संगठन कही जाने वाली राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने भी सवाल उठाए। भाजपा की जीत से लेकर सीटों के नुकसान तक, हर चीज पर प्रश्न चिन्ह लगाए गए। जहां आरएसएस नेता रतन शारदा ने "चुनाव नतीजों ने अति आत्मविश्वास में बैठे बीजेपी के नेताओं को आइना दिखाने" की बात कही तो वहीं संघ प्रमुख मोहन भागवत ने "चुनाव प्रचार दौरान मूल्यों को ना बनाए रखने" का आरोप लगाया। इसके अलावा आरएसएस के वरिष्ठ नेता इंद्रेश कुमार ने भी बीजेपी पर अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधा।
NEET परीक्षा में धांधली
चुनाव परिणाम के साथ-साथ 4 जून को एनटीए द्वारा आयोजित NEET, जो भारत के मेडिकल कॉलेज में नामांकन के लिए एंट्रेंस टेस्ट है, का रिजल्ट भी जारी किया गया। परिणाम घोषित होने के बाद से लगातार छात्र, उनके माता-पिता और शिक्षक परीक्षा और रिजल्ट में धांधली का आरोप लगा रहे हैं।
इस वर्ष, लगभग 67 छात्रों ने 100 प्रतिशत यानी 720 अंक प्राप्त किए। ऐसे अंक जिनके बारे में कुछ लोग दावा करते हैं कि परीक्षा की योजना में इसे प्राप्त करना लगभग असंभव है। बाद में पता चला कि परीक्षा में टॉप करने वाले 67 में से 44 को "अनुग्रह अंक" (ग्रेस मार्क्स) दिए गए थे।
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पहले तो NEET परीक्षा में गड़बड़ियों की बात को नकारा लेकिन अब उन्होंने माना है कि कुछ जगहों पर गड़बड़ियां हुई हैं। इसे लेकर पूरे देश में विरोध प्रदर्शन जारी है। कांग्रेस ने इस मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की है। सरकार पर एनटीए के बचाव का भी आरोप लग रहा है।
जम्मू-कश्मीर में एक के बाद एक आतंकी हमले
जम्मू और कश्मीर में बीते कुछ दिनों के दौरान लगातार एक के बाद एक कई आतंकी हमले हुए। इनमें से सबसे बड़ा हमला रियासी में हुआ। जहां आतंकियों ने वैष्णों देवी से लौट रही हिंदू श्रद्धालुओं से भरी बस को निशाना बनाया। इस हमले में कई लोगों की जान चली गई। इस हमले ने जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
9 जून के बाद से ही जम्मू-कश्मीर के रियासी, कठुआ और डोडा में आतंकी हमले हो चुके हैं। हमलों में आम लोगों के साथ ही सुरक्षाकर्मियों को भी जान गई है। यह माना जाता है कि जम्मू से आतंकियों का लगभग सफाया हो चुका है लेकिन 2021 के बाद से जम्मू में 29 आतंकी हमले हो चुके हैं। अनुच्छेद 370 के हटने के बाद से आतंकवाद मुक्त जम्मू कश्मीर का दावा किया जाता रहा है।
कुवैत में भारतीयों की मौत से उठा पलायन का मुद्दा
बीते दिनों कुवैत की एक इमारत में आग लगने से 49 लोगों की जलकर मौत हो गई। आग की चपेट में आने से हुए मौतों में 45 लोग भारतीय थे जो वहां रायजगार की वजह से रह रहे थे। इन मौतों को लोगों ने पलायन के मुद्दे से जोड़ा कि अगर उन्हें अपने देश में रोजगार मिलता तो दूसरे मुल्क में रोजी-रोटी कमाने के लिए नहीं जाना पड़ता। विपक्ष ने भी इस मुद्दे को उठाया।
बीजेपी नेता ने G7 समिट को लेकर मोदी को बताया नौसिखिया
पीएम मोदी तीसरी बार सरकार बनाने के बाद G7 समिट में शामिल होने इटली पहुंचे। उनके इस दौरे पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस ने कहा कि वह अपनी अंतरराष्ट्रीय छवि को बचाने के लिए G7 समिट में जा रहे हैं।
वहीं, पूर्व कैबिनेट मंत्री और कई बार सांसद रहे बीजेपी नेता सुब्रमण्यन स्वामी ने कहा,"विदेश नीति में मोदी नौसिखिया हैं। दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश होने और सबसे प्राचीन सभ्यता होने के बाद भी भारत G7 का सदस्य नहीं है और सिर्फ विजिटर है।"
गठबंधन की सरकार ने खड़ी की बीजेपी के लिए मुश्किलें
बीजेपी को इस बार स्पष्ट बहुमत ना मिलने के कारण सरकार बनाने के लिए सहयोगी दलों पर निर्भर होना पड़ा है। ऐसे में सहयोगी दलों के नेताओं के बयान केंद्र सरकार की मुश्किलें बढ़ा रही है। आए दिन गठबंधन का कोई न कोई सदस्य ऐसे बयान देता रहता है जिससे सरकार की मुश्किलों में इजाफा हो।
सहयोगी पार्टियों ने उन मुद्दों पर भी अलग रुख साफ कर दिया है जिन पर बीजेपी की सरकार पिछले कार्यकाल में अडिग थी। अग्निपथ योजना से लेकर यूसीसी पर जदयू ने अपनी असहमति जताई है। जेडीयू ने कहा है कि अग्निपथ योजना की समीक्षा हो और यूसीसी लागू करने के लिए आम सहमति बनाई जाए।












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