मायावती को झटका देने के लिये काफी है मोदी की नई कैबिनेट
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टीम मेें जब 19 नये मंत्रियों की एंट्री हुई, तो टीवी चैनलों पर फ्लैश चलने लगा- "अब तेज होगी विकास की रफ्तार", लेकिन जिन नेताओं को मंत्रीमंडल में शामिल किया गया है, अगर उन पर एक नजर दौड़ायें, तो साफ नजर आयेगा कि मंत्रीमंडल में यह फेरबदल मायावती को परास्त करने के लिये किया गया है। वो भी यूपी विधानसभा चुनाव में।
पढ़ें- नये मंत्रियों की पूरी सूची

2017 में होने वाले यूपी विधानसभा चुनाव में भाजपा की टक्कर केवल समाजवादी पार्टी से नहीं, बल्कि बहुजन समाज पार्टी से भी है। सपा को नीचा दिखाने के लिये यूपी की कानून व्यवस्था और सपा सरकार की खामियों को उजागर करके भाजपा लोगों के दिलों में जगह बना सकती है, लेकिन बसपा के वोट काटने के लिये क्या किया जाये?
बस इसीलिये कैबिनेट में विस्तार के दौरान खास तौर से दलित नेताओं को तरजीह दी गई है। जिन 19 सांसदों ने शपथ ली है, उनमें से कई दलित व पिछड़ा वर्ग के हैं।
कुछ उदाहरण-
- अनुप्रिया पटेल, उत्तर प्रदेश से ओबीसी सांसद हैं। मूल रूप से अनुप्रिया अपना दल की हैं, जो एनडीए का एक भाग है।
- कृष्णा राज, शाहजहांपुर, यूपी से दलित सांसद हैं। ये यूपी में अपना प्रभाव दिखा सकती हैं।
- अजय टमटा, उत्तराखंड से दलित सांसद हैं। इनके जरिये दलित वोट खींचने में भाजपा सफल हो सकती है।
- अर्जुन राम मेघवाल, राजस्थान से दलित सांसद हैं।
- रामदास अटवाले, महाराष्ट्र के दलित नेता हैं, जिनका प्रभाव कई अन्य राज्यों में देखा जाता है।
गुजरात से कई लोग आये आगे
यूपी के बाद मोदी सरकार का दूसरा लक्ष्य गुजरात की ओर है। शायद यही कारण है कि गुजरात से कई नेताओं को मंत्रीमंडल में जगह दी गई है। अगर प्रमुख नामों की बात करें तो पुरुषोत्तम रुपाला, जसवंत सिंह भभोर, मनसुख मंडाविया प्रमुख हैं।












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