2019 चुनाव से पहले मोदी कैबिनेट ने रागी के MSP में की बंपर बढ़ोतरी, जानें Facts
नई दिल्ली। मोदी सरकार ने 2019 आम चुनाव से पहले बड़ा दांव खेल दिया है। नाराज चल रहे किसानों को लुभाने के लिए बुधवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में खरीफ की फसलों के समर्थन मूल्य बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी। खरीफ की जिन फसलों के समर्थन मूल्य यानी MSP(Minimum Support Price) में बढ़ोतरी की है उनमें- धान, रागी, मक्का, मूंग, उड़द समेत चौदह खरीफ फसल शामिल हैं। जिन फसलों के समर्थन मूल्य में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी की गई है, उनमें एक है रागी। रागी का मौजूदा समर्थन मूल्य 1900 रुपये से बढ़ाकर 2,897 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है। यदि लागत के हिसाब से देखें तो रागी के मूल्य में 50 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है। रागी की इनपुट कॉस्ट 1931 रुपए सीएजी ने बताई है, जबकि इसका समर्थन मूल्य 2897 रुपए कर दिया गया है।

रागी के समर्थन मूल्य में क्यों की गई बंपर बढ़ोतरी
रागी के समर्थन मूल्य में क्यों की गई बंपर बढ़ोतरी
बाजरे की खेती को सरकारों से अच्छा समर्थन मूल्य न मिलने के कारण इसका पैदावार पर फर्क पड़ रहा था। रागी के एक प्रकार से बाजरे की ही अलग किस्म है। इसे लाल बाजरा भी कहते हैं। रागी पोषक तत्वों का भंडार है। रागी को नाचनी भी कहते हैं, यह ज्यादातर एशिया और अफ्रीका में उगाया जाता है। इसे आप एक मोटा अन्न भी कह सकते हैं। यह अनेक प्रकार के पोषक तत्वों से युक्त और ऊर्जा का अच्छा स्रोत है। रागी को कई प्रकार से खाया जाता है, साबुत रागी, रागी का आटा, कई अनाजों के मिश्रण के आटे के रूप में भी इसका सेवन किया जा सकता है। देश में इन दिनों कुपोषण को लेकर लंबी-चौड़ी बहस छिड़ी है। यही वजह है कि मोदी सरकार ने रागी का समर्थन मूल्य 1900 रुपए से बढ़ाकर सीधा 2897 कर दिया है।

कैल्शियम, आयरन और विटामिन सी से भरपूर है रागी
रागी कैल्शियम से भरपूर है। इसमें वसा बेहद कम मात्रा में होती है। रागी का आटा खाने से भूख कम लगती है और अगर इसका सेवन सुबह किया जाए तो पूरे दिन बार-बार भूख नहीं सताएगी। रागी मधुमेह से पीडि़त रोगियों के लिए भी काफी फायदेमंद है। इतना ही नहीं, रागी में आयरन की अच्छी खासी मात्रा होती है। यदि आप अंकुरित रागी का सेवन करते हैं तो इसमें विटामिन सी का भी स्तर बढ़ जाता है।

धान से लेकर कपास तक खरीफ की इन फसलों के समर्थन मूल्य में भी अच्छा खासा इजाफा
कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 200 रुपए बढ़ाकर 1,750 रुपये क्विंटल कर दिया गया है। धान की उत्पादन लागत 1166 रुपए प्रति क्विंटल आंकी गई है, इसका समर्थन मूल्य 1750 रुपए प्रति क्विंटल तय किया गया है। इस प्रकार से ए ग्रेड धान का समर्थन मूल्य 1770 रुपए प्रति क्विंटल तय किया गया है।
ज्वार हाईब्रिड की उत्पादन लागत सरकार ने 1619 रुपए बताई है, करीब 50 फीसदी वृद्धि के साथ इसका समर्थन मूल्य 2430 रुपए रखा गया है। बाजरा की उत्पादन लागत 990 रुपए है, इसका समर्थन मूल्य 1950 रुपए तय किया गया है। लागत के हिसाब से बाजरा के समर्थन मूल्य में करीब 96 फीसदी की वृद्धि की गई है।
मक्के की उत्पादन लागत 1131 रुपए है, इसके समर्थन मूल्य को बढ़ाकर 1700 रुपए प्रति क्विंटल किया गया है। उत्पादन लागत के हिसाब से इसमें भी 50 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। अरहर (तूर) की दाल की उत्पादन लागत 3432 रुपए प्रति क्विंटल है, इसे बढ़ाकर 5675 रुपए किया गया है। इसमें 65 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ोतरी की गई है। इसी प्रकार से मूंग दाल के समर्थन मूल्य में 50 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है। इसकी उत्पादन लागत 4650 रुपए है, इसका समर्थन मूल्य बढ़ाकर 6975 रुपए कर दिया गया है। उड़द की दाल की बात करें तो इसकी उत्पादन लागत 3438 रुपए है, इसका समर्थन मूल्य 5600 रुपए तय किया गया है। इस प्रकार से उड़द के समर्थन मूल्य में 62.89 फीसदी बढ़ोतरी की गई है।
मूंगफली (छिलका सहित) की उत्पादन लागत 3260 रुपए है, इसका समर्थन मूल्य 4890 रुपए तय किया गया है। इसमें उत्पादन लागत पर 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। सूरजमुखी बीज की उत्पादन लागत 3596 है, इसके समर्थन मूल्य को बढ़ाकर 5388 रुपए किया गया है। उत्पादन लागत के हिसाब से इसमें भी 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। सोयाबीन की उत्पादन लागत 2266 रुपए प्रति क्विंटल आंकी गई है, इसका समर्थन मूल्य 3399 रुपए तय किया गया है। उत्पादन लागत के हिसाब से इसमें भी 50 प्रतिशत बढ़ोतरी की गई है। इसी प्रकार से तिल की उत्पादन लागत 4166 रुपए है, इसका समर्थन मूल्य 6249 रुपए तय किया गया है। वहीं, रामतिल की उत्पादन लागत 3918 आंकी गई है, इसका समर्थन मूल्य 3918 रुपए तय किया गया है। अंत में कपास की बात करते हैं। कपास की प्रति क्विंटल उत्पादन लागत 3433 बताई गई है, मध्यम स्टेपल कपास का मूल्य 5150 और लंबा स्टेपल कपास का प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य 5450 रुपए तय किया गया है।

मोदी सरकार ने इस तरह तय किया न्यूनतम समर्थन मूल्य
एमएसपी यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य वह कीमत होती है, जिस पर सरकार किसानों से अनाज खरीदती है। सरकार ने फसलों की कीमत तय करने के फॉर्मूले में बदलाव किया है। अब फसल पर आने वाली लागत के आकलन के लिए ए2+एफएल फॉर्मूला अपनाया जाएगा। इस फॉर्मूले के तहत फसल की बुआई पर होने वाला कुल खर्च और उसमें परिवार के सदस्यों की मजदूरी भी शामिल होगी।












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