मॉडर्ना की वैक्सीन को दी गई आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी: स्वास्थ्य मंत्रालय
नई दिल्ली, जून 29 ; भारत के औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) ने आज एक और कोरोना वैक्सीन के आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी दे दी। ये वैक्सीन 18 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को लग सकती है। नीति आयोग के सदस्य-स्वास्थ्य डॉ वीके पॉल ने कहा कि, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विकसित पहली वैक्सीन मॉडर्ना को अनुमति दी गई है। इन नई दवा को अनुमति प्रतिबंधित उपयोग के तहत मिली है।
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डॉ. वीके पॉल ने कहा कि, देश में अब कोरोना के खिलाफ चार वैक्सीन कोवैक्सिन, कोविशील्ड, स्पुतनिकवी और मॉडर्ना को मंजूरी दी जा चुकी है। हम जल्द ही फाइजर को भी भारत में आपातकालीन इस्तेमाल के मंजूरी देने वाले हैं। ये चारों वैक्सीन सुरक्षित हैं। ये स्तनपान करने वाली महिलाएं भी ले सकती हैं। इनका नपुंसकता से कोई संबंध नहीं है। टीकाकरण के संबंध में गर्भवती महिलाओं के लिए एडवाइजरी शीघ्र जारी की जाएगी। गर्भवती महिलाओं के लिए वैक्सीन सुरक्षित है, और स्वास्थ्य मंत्रालय इसकी आगे जांच कर रहा है
'मॉर्डना' ने भारत में अपने कोविड-19 रोधी टीके के लिए नियामकीय मंजूरी मांगी थी और सिप्ला ने टीके के आयात, विपणन संबंधी प्राधिकार के लिए आवेदन किया था। मॉडर्ना की वैक्सीन मैसेंजर आरएनए पर निर्भर करती है, जो कोशिकाओं को कोरोना वायरस के खिलाफ इम्यूनिटी तैयार करने के लिए प्रोग्राम करते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ( डब्ल्यूएचओ) से मॉडर्ना को पहले ही मंजूरी मिली हुई है। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, मॉडर्ना की वैक्सीन कोरोना के खिलाफ 94.1% तक असरदार है। डब्ल्यूएचओ का कहना है कि मॉडर्ना वैक्सीन की पहले डोज लगने के 14 दिन बाद कोरोना होने का खतरा 94.1% तक कम हो जाता है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने बताया कि, अप्रैल में कुल 8.99 करोड़ वैक्सीन की डोज़ दी गईं, मई में 6.1 करोड़ डोज़ और जून में अब तक वैक्सीन की 10.75 करोड़ डोज़ दी जा चुकी है। वैक्सीनेशन की नई नीति के समय से हम प्रतिदिन औसतन 57.68 लाख डोज़ उपलब्ध कर पा रहे हैं। 1 मई से 24 जून को ग्रामीण इलाकों में वैक्सीन की कवरेज 9.72 करोड़ डोज़ है जो कि 56% है और शहरी इलाकों में वैक्सीन की कवरेज 7.68 करोड़ डोज़ है जो कि 44% है।












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