सरकारी बस में चार्ज नहीं कर पाया मोबाइल, पैसेंजर को मिला 5,000 रुपया मुआवजा
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नई दिल्ली- महाराष्ट्र में एक सरकारी बस डिपो को पैसेंजर को जरूरी सुविधाएं मुहैया नहीं करवा पाने के लिए 5,000 रुपये बतौर मुआवजा देने का आदेश हुआ है। दरअसल, पैसेंजर ने शिकायत की थी कि उससे जिन सुविधाओं का विज्ञापन दिखाया गया और उसके हिसाब से किराया भी वसूला गया, लेकिन वह सुविधाएं बस में उपलब्ध ही नहीं थीं। पैसेंजर की इस शिकायत पर कंज्यूमर फोरम ने मुआवजा देने का हुक्म दिया है।

मामला महाराष्ट्र के जालना जिले का है। शिकायतकर्ता सतीश रतनलाल दयामा अपने एक दोस्त के साथ जालना बस डिपो से महाराष्ट्र स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन की बस 'शिवशाही' में इसी साल 12 जुलाई को औरंगाबाद के लिए सवार हुए। बस में एसी काम नहीं कर रहा था। जब दयामा को लगा कि उनके मोबाइल की बैट्री पूरी तरह से खत्म हो गई है तो उन्होंने बस कंडक्टर से मोबाइल चार्जिंग प्वाइंट के बारे में पूछा। लेकिन, छानबीन करने पर पता चला कि मोबाइल चार्जिंग प्वाइंट काम ही नहीं कर रहा है। बस में लगा एसी भी खराब पड़ा हुआ था।
इसके बाद उन्होंने बस कंडक्टर से अपनी शिकायत दर्ज करने के लिए रजिस्टर मांगा, लेकिन उन्हें वह भी नहीं दिया गया। तब पैसेंजर ने जिला कंज्यूमर फोरम में शिकायत दर्ज कराकर उन्हें हुई असुविधा और मानसिक प्रताड़ना के लिए बस डिपो से मुआवजे की मांग की। उनकी शिकायत में कहा गया था कि राज्य ट्रांसपोर्ट की ओर से विज्ञापन दिया गया था कि बस में मोबाइल चार्जिंग प्वाइंट और एसी उपलब्ध है, इन सुविधाओं के लिए पैसे भी वसूले गए लेकिन दोनों ही काम नहीं कर रहे थे।
मामले को सुनने के बाद कंज्यूमर फोरम की अध्यक्ष निलिमा संत और सदस्य नीता कनकरिया एवं मंजूषा चितलांगे ने जालना बस डिपो को पीड़ितों को 30 दिन के अंदर 5,000 रुपये बतौर मुआवजा भुगतान करने का आदेश दे दिया।












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