Mirzapur-1 में 'भौकाल' हुआ इतना मशहूर कि सीजन-2 में मेकर्स ने बना दिया बियर ब्रांड, क्या आपने नोटिस किया?
मुंबई। अमेजन प्राइम की सबसे लोकप्रिय वेब सीरीज मिर्जापुर जब रिलीज हुई तो एक ऐसा शब्द सामने आया जो हर किसी के जुबान पर चढ़ गया। जी हां साल 2018 में भौकाल शब्द ने खूब सुर्खियां बटोरी। रिलीज के बाद ये सीरीज लोगों को इतनी पसंद आई कि डायरेक्टर्स ने मिर्जापुर 2 बना डाला। साल 2020 में मिर्जापुर 2 सबसे लोकप्रिय सीरीज रही। इस सीरीज के बाद 'भौकाल' और 'ये भी ठीक है' जैसे शब्द रोजमर्रा के प्रयोग में आने लगे।

सीरीज वन में 'भौकाल' शब्द इस कदर प्रसिद्ध हुआ कि सीजन 2 में मेकर्स ने इस नाम से एक पूरा एपिसोड बना दिया। अंदाजा इस बात से भी लगा सकते हैं कि निर्माताओं ने फिल्म में एक बार का नाम ही भौकाल रख दिया और इसी नाम से बियर भी निकाल दी। आपको याद होगा दूसरे सीजन के चौथे एपिसोड में जब मुन्ना भईया और गुड्डू भैया का आमना सामना होता है तो एक बार के बैक रूम में घुसते हैं। अगर ध्यान से देखों तो वहां विभिन्न डिब्बों के साथ-साथ शराब की बोतलें भी हैं, जिनके ऊपर भौकाल बीयर लिखा है।
मिर्जापुर-2 में क्या दिखाया गया
किस तरह से शहर को एक अपराधी अपनी तरह से समानांतर सरकार बना कर चलाता है और राजनीतिक, प्रशासनिक व्यवस्थाएं भ्रष्ट होकर चरमरा जाती हैं यह मिर्जापुर 2 में देखने को मिलता है। शहर संभालने वाले मुन्ना भैया घर की व्यवस्थाएं नहीं संभाल पाते और स्थितियां उनके हाथ से बाहर निकल जाती है। दूसरे सीजन की शुरूआत भी हिंसक सीन से होती है। इस सीरीज का पूरा फोकस गुड्डू पंडित के बदले पर आधारित है। उसका एक ही मकसद है मुन्ना त्रिपाठी की मौत और मीरजापुर की गद्दी हथियाना। इसमें उसका साथ कालीन भैया के कई दुश्मन देते हैं जिसमें खुद उनकी पत्नी बीना भी शामिल है। उधर, मुन्ना त्रिपाठी किसी भी हाल में गद्दी पर बैठने को बेताब है।
साजिशों के बीच ऐसा भी समय आता है, जब कालीन भैया का सबसे भरोसेमंद साथी मकबूल उनके पिता की हत्या करने पहुंचता है। दरअसल, मकबूल का भांजा गुड्डू पंडित के साथ है और जब यह बात मुन्ना को पता चलती है तो वह मकबूल के भांजे व उसकी मां को मार देता है। इसी का बदला लेने जब मकबूल सत्यानंद त्रिपाठी को मारने पहुंचता है, उस समय कालीन भैया की पत्नी बीना कहती है कि अपने ससुर को वह खुद मारेगी। फिर नौकरानी के साथ मिलकर वह ससुर को काट डालती है। एक तरफ पिता की चिता जल रही थी तो वहीं दूसरी तरफ कालीन भइया व मुन्ना के बीच मीरजापुर की गद्दी को लेकर बहस होने लगती है।












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