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केंद्र सरकार ने कोर्ट से कहा, 'उसके पास 'महिला खतना' का कोई डाटा नहीं हैं'

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      Modi Government के पास नहीं है 'महिला खतना' का कोई भी Data । वनइंडिया हिंदी

      नई दिल्ली। दाऊदी बोहरा समुदाय की नाबालिग लड़कियों के खतना (मादा जननांग विकृति) को प्रतिबंध करने के लिए एक लिखित याचिका दायर की गई है। जब कोर्ट ने इस पर महिला एवं बाल विकास मंत्रालय से जवाब मांगा तो उसके पास भारत में एफजीएम के अस्तित्व का समर्थन करने वाला कोई आधिकारिक आंकड़ा या अध्ययन नहीं था। मंत्रालय ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में दायर अपने शपथ पत्र में कहा है कि, 'वर्तमान में कोई आधिकारिक आंकड़ा या अध्ययन (एनसीआरबी आदि) नहीं है जो भारत में एफजीएम के अस्तित्व का समर्थन करता है।' बाल अधिकार अधिवक्ता सुनीता तिवारी ने दायर याचिका में खतना या एफजीएम के अमानवीय कार्य पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। जिसे 'महिला खतना' या 'खाफद' के रूप में भी जाना जाता है। इसे एक संज्ञेय, गैर-संयुग्मित और गैर- जमानती अपराध बताया था।

      तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जे एस खेहर ने मांगी थी मंत्रालय से रिपोर्ट

      तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जे एस खेहर ने मांगी थी मंत्रालय से रिपोर्ट

      मई 2017 में, सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच के समक्ष तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जे एस खेहर, न्यायमूर्ति एस के कौल और न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचुद ने इसे 'अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दा' करार दिया था। बेंच ने डब्ल्यूसीडी मंत्रालय और गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान और मध्य प्रदेश सहित सभी सरकारों से 'विस्तृत जवाब' मांगा था। इन राज्यों में इस समुदाय के लोग अधिक रहते हैं।

      भारत में टाइप 1 एफजीएम प्रतिबंध करने की मांग

      भारत में टाइप 1 एफजीएम प्रतिबंध करने की मांग

      भारत में टाइप 1 एफजीएम (क्लिटोरल हुड को हटाने) पर प्रतिबंध लगाने के लिए प्रचार कर रही बोहरा महिला ने मई में डब्लूसीडी मंत्री मेनका गांधी को अपनी याचिका दायर कर दी थी। इसके तुरंत बाद, मेनका ने कहा कि सरकार एफजीएम से खिलाफ एक कानून लाएगी। अंतरिम उपाय के रूप में, मंत्रालय ने सभी राज्य सरकारों को सलाह दी थी कि आईपीसी और पीओसीएसओ प्रावधानों के तहत एफजीएम के मामलों पर मुकदमा चलाया जा सकता है।

      27 देशों में प्रतिबंधित है यह प्रथा

      27 देशों में प्रतिबंधित है यह प्रथा

      साथ ही इस समुदाय के आध्यात्मिक नेता सिद्ना को भी लिखकर इस प्रथा को प्रतिबंध को करने को कहा गया था। इनमें से कुछ भी नहीं हुआ। वहीं मंत्रालय ने भी इस मु्द्दे पर चुप्पी साध ली है। सुनीता तिवारी ने बताया कि, शपथ पत्र में मंत्रालय का दावा है कि भारत में एफजीएम के अस्तित्व को लेकर उनके पास कोई डेटा नहीं है। आपको बता दें कि तिवारी की याचिका में कहा गया था कि एफजीएम का कुरान में कोई उल्लेख नहीं है, यह प्रथा मूल अधिकारों और बच्चे के अधिकारों का उल्लंघन है। अफ्रीका,अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया समेत 27 देशों में यह प्रतिबंधित है।

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      English summary
      Ministry of Women and Child Development has No official data on existence of Female Genital Mutilation in India

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