किसानों की सरकार से आठवें दौर की वार्ता आज, बैठक से पहले नरेंद्र तोमर का कृषि कानूनों पर बड़ा बयान
नई दिल्ली। किसान आंदोलन(farmers protest) के 44 दिन पूरे हो गए हैं। गुरुवार को किसानों ने दिल्ली के चारों तरफ ट्रैक्टर मार्च(tractor parade) निकाला। आज किसानों और सरकार के बीच आठवें दौर की वार्ता होने वाली है। बैठक से पहले केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर( Narendra Singh Tomar ) ने खेती कानूनों(farm laws) को लेकर बड़ा बयान दिया है। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बृहस्पतिवार को कहा कि सरकार तीन नए कृषि कानूनों को वापस लेने के अलावा किसी भी प्रस्ताव पर विचार करने को तैयार है।
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शुक्रवार की बैठक के संभावित नतीजों के बारे में पूछे जाने पर कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा, मैं अभी कुछ नहीं कह सकता। असल में यह इस बात पर निर्भर करता है कि बैठक में चर्चा के लिए क्या मुद्दा उठता है। तोमर ने पंजाब के नानकसर गुरुद्वारा के प्रमुख बाबा लखा को गतिरोध खत्म करने के लिए एक प्रस्ताव देने की बात से भी इनकार किया। वह राज्य के एक जाने-माने धार्मिक नेता हैं। वहीं, कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी ने कहा कि नए कृषि कानून किसानों को छूट देते हैं तथा सरकार मौजूदा गतिरोध यथाशीघ्र खत्म करने को लेकर आशान्वित है। उन्होंने कहा, अभी जो कदम उठाए गए हैं वे महज शुरूआत हैं, और अधिक सुधार किए जाने हैं। अगला, कीटनाशक विधेयक और बीज विधेयक होगा।
उधर, कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर से गुरुवार को भी कृषि सुधार कानूनों का समर्थन करने वाले किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने कृषि कानूनों को किसान हितैषी करार दिया। इस बीच, गृहमंत्री अमित शाह किसान आंदोलन को लेकर फिर एक्टिव हो गए हैं। गुरुवार को पंजाब के भाजपा नेता शाह से मुलाकात करने पहुंचे। बैठक के बाद भाजपा नेता कुमार ज्याणी ने कहा कि किसानों को कानून वापसी की जिद नहीं पकड़नी चाहिए। लेफ्ट के नेता इस आंदोलन में शामिल हो गए हैं और वो नहीं चाहते कि मामले का कोई हल निकले।
वहीं किसानों का कहना है कि सरकार ने मांगें नहीं मानीं तो 26 जनवरी को भी ट्रैक्टर परेड होगी। गुरुवार का मार्च उसी का ट्रेलर था। इधर, शुक्रवार को किसानों की सरकार के साथ 9वें दौर की बातचीत होनी है। इससे एक दिन पहले निकाले गए ट्रैक्टर मार्च के जरिए किसानों ने अपनी ताकत दिखाई। वहीं, इस मार्च पर 60 हजार ट्रैक्टरों के शामिल होने का दावा करके किसानों ने दिखाया कि आंदोलन के 43 दिन गुजरने के बाद भी उनके समर्थन में कमी नहीं आई है।












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